समस्त विश्व में अलग-अलग अधिकारिताओं की प्रतिलिप्याधिकार विधियों में सॉफ्टवेयर को साहित्यिक कृति (कार्य) माना जाता है तो लिखित रूप में रिकार्ड किया जाता है अथवा अन्यथा गणितीय रूप में लघुकृत किया जाता है, जिससे सुरक्षा आशयित है।
प्रतिलिप्याधिकार में किसी विचार की अभिव्यक्ति का संरक्षण होता है न कि स्वयं विचार का ही। इसका उपयोग होता है न कि स्वयं विचार का ही। इसका प्रयोग कार्यविधि, प्रक्रम प्रणाली, सकर्म की विधि, अवधारणा, सिद्धांत अथवा खोज के संरक्षण के लिए भी नहीं हो सकता है।
प्रतिलिप्याधिकार विधि एकाधिकार उत्पन्न करने का निमित्त नहीं है। प्रतिलिपि उन मौलिक कृति (कार्य) में सन्निविष्ट रहता है जिसे किसी नियम माध्यम से पुनः प्रस्तुत किए जाने की प्रयिकता रहती है। प्रतिलिपि अधिकार चलचित्र, संगीत रचना चित्रकारी और अन्य सृजनात्मक अभिव्यंजनों के लिए दिया जाता है।
व्यापार से संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकार (ट्रिप्स) संबंधी करार के अनुच्छेद 10 (1) में कंप्यूटर प्रोग्राम को प्रतिलिप्याधिकार प्रदान किया गया है। 845 प्रतिलिप्याधिकार उन अधिकारों का समुच्चय है जिसके माध्यम से प्रतिलिप्याधिकार के स्वामी के अधिकार का उल्लंधन होने की दशा में कारवाई होती है।
इस प्रकार यह नकारात्मक अधिकार है जिसके मूलस्वरूप लेखक किसी अन्य व्यक्ति को प्रतिलिपि अधिकार प्राप्त सामग्री का संव्यवहार करने से रोकने में सक्षम हो पाते है। कंप्यूटर प्रोग्राम में भी लिप्याधिकार सन्निहित है
बशर्ते कि इसे नवीन और मूल स्वरूप देने के लिए पर्याप्त प्रयास अथवा कौशल का विस्तार किया गया हो। किन्तु ऐसा कंप्यूटर प्रोग्राम जिसके द्वारा केवल गुणन तालिका अथवा वर्णमाला उत्पन्न किया जाता है, उसके मामले में प्रतिलिप्याधिकार का दावा नहीं किया जा सकता है,
क्योंकि इस तरह के कार्य की निर्मित व संनिर्माण में नियोजित कौशल या प्रयास इतना तुच्छ स्तर का है कि इसे नवीन अथवा मूल रूप में होने की संज्ञा नहीं दी जा सकती है।
क्या कंप्यूटर प्रोग्राम के मामले में प्रतिलिप्याधिकार प्रयोज्य हो सकता है?
Correct Answer: (d) हाँ, यदि इसे नवीन और मूल स्वरूप देने के लिए पर्याप्त प्रयास अथवा कौशल का विस्तार किया गया हो।
Solution:कंप्यूटर प्रोग्राम के मामले में प्रतिलिप्याधिकार प्रयोज्य हो सकता है यदि इसे नवीन और मूल स्वरुप देने के लिए पर्याप्त प्रयास अथवा कौशल का विस्तार किया गया है।