यू.जी.सी. एनटीए नेट/ जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2024 (मनोविज्ञान)

Total Questions: 100

31. समूह सेटिंग में कथित निष्पक्षता पर शोध से पता चलता है कि हम तीन अलग-अलग पहलुओं या नियमों पर ध्यान केंद्रित करके निर्णय लेते हैं। ये है:

A. वितरणात्मक न्याय
B. सामूहिक न्याय
C. प्रक्रियात्मक न्याय
D. लेन-देन संबंधी न्याय
(E) परिवर्तनकारी न्याय

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल A, C और D
Solution:समूह सेटिंग में कथित निष्पक्षता से संबंधित शोध के अनुसार हम तीन अलग-अलग पहलुओं या नियमों पर ध्यान केंद्रित करके निर्णय लेते है।
(i) वितरणात्मक न्याय संसाधनों और पुरस्कारों का निष्पक्ष वितरण।
(ii) प्रक्रियात्मक न्याय-निर्णय लेने की प्रक्रिया की निष्पक्षता ।
(iii) लेन-देन संबंधी न्याय लोगों से व्यवहार में सम्मान और ईमानदारी।

32. ऑलपोर्ट वर्गीकरण के अनुसार प्रोप्रियम के विकास का सही क्रम क्या है?

A. स्व छवि
B.  स्वयं का विस्तार
C. शारीरिक स्व
D. स्वयं की पहचान
E. स्वाभिमान

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) C, D, E, B, A
Solution:ऑलपोर्ट के अनुसार, पोप्रियम का विकास एक क्रम में होता है जो व्यक्ति की पहचान और आत्मबोध के विभिन्न चरणों को दर्शाता है इस क्रम में विकास शैशव से प्रारंभ होकर किशोरावस्था तक बढ़ता है। गार्डन ऑलापोर्ट द्वारा प्रस्तावित प्रोप्रियम के विकास के चरण इस प्रकार है:
(i) शारीरिक स्व
(ii)स्वयं की पहचान
(iii)स्वाभिमान
(iv) स्वयं का विस्तार
(v) स्व छवि

33. निम्नलिखित में से कौन सा मत इस बात पर जोर देता है की कोई व्यक्ति परम चैतन्य का न तो भाग है, न ही उससे पृथक है और न ही उसका परिष्करण है।

Correct Answer: (c) अद्वैत
Solution:अद्वैत वेदांत शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित एक दर्शन है, जो यह मानता है कि आत्मा (व्यक्ति) और ब्रह्म (परम चैतन्य) में कोई द्वैत (भेद) नहीं है। लेकिन प्रश्न में विशेष रूप से यह कहा गया है कि व्यक्ति न तो उसका भाग है,

न पृथक है, और न ही उसका परिष्करण है यानी वह कोई भी "सापेक्ष स्थिति” नहीं है- यह मत अद्वैत वेदांत का सूक्ष्म निष्कर्ष है, जिसे "नेति नेति" (ना यह, ना वह) के रूप में भी व्यक्त किया जाता है। इसलिए व्यक्ति की सच्ची पहचान परम चैतन्य से पूर्णतः अभिन्न है- कोई भेद, उपभेद, या अंश नहीं।

34. मुख्य स्नायु मार्ग जो 'ब्रोका' क्षेत्र और 'वेनिक' क्षेत्र को जोड़ता है _____ कहा जाता है।

Correct Answer: (b) आरकूएट फॉसिकुलस
Solution:मुख्य स्नायु मार्ग जो 'ब्रोका' क्षेत्र और वेर्निक क्षेत्र को जोड़ता है आरकूएट फॉसिकुलस कहा जात है। यह मार्ग भाषा से संबंधित जानकारी को समझने और व्यक्त करने में तालमेल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अग्रवर्ती संयोजिका मस्तिष्क के दोनों गोलार्द्धा को जोड़ने वाला एक छोटा तंतु समूह ।
मासा इंटरमिडिया दो थैलेमिक भागों को जोड़ने वाला एक मध्य संरचना।
पश्चवर्ती संयोजिका प्रायः पुपिल की प्रतिक्रिया जैसे विजुअल रिफ्लेक्स में कार्य करती है।

35. केवल पेशेवर मुद्दे ही परीक्षण की उपयुक्ता निर्धारित नही करते। यह नीचे सूचीबद्ध नैतिक मुद्दों से भी निर्धारित होता है:

A. मानवाधिकार
B. विभाजित वफादारी
C. अमानवीयकरण
D. लेबलिंग
E. निजता का हनन

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल A, D और E
Solution:मानवाधिकार, लेबलिंग निजता का हनन को नैतिक मुद्दे के रूप में माना गया है।
  • मानवाधिकार यह एक प्रमुख नैतिक और मानवतावादी विषय है।
  • लेबलिंग - नैतिक चिंता उत्पन्न करता है, विशेषकर मानसिक स्वास्थ्य संदर्भ में
  • निजता का हनन प्रमुख नैतिक उल्लंघन

36. अपनी माँ को कूड़ा फेंकने के लिए डांटता है क्योंकि वहाँ एक बोर्ड लगा है जिस पर ऐसा न करने के लिए कहा गया है। कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार यह उदाहरण नैतिकता के किस स्तर को संदर्भित करता है?

Correct Answer: (c) पारंपरिक नैतिकता
Solution:इस उदाहरण में बच्चा बोर्ड पर लिखे नियम के आधार पर अपनी माँ को डाँट रहा है। यानि वह नियमों और सामाजिक व्यवस्था का पालन कर रहा है क्योंकि वह मानता है कि नियमों का पालन करना चाहिए। कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धांत में यह स्थिति "पारंपरिक नैतिकता" के अंतर्गत आती है।

37. ऐसे शीलगुण जो केवल सीमित क्षेत्र के भीतर जैसे "चाकलेट पसंद करना" में प्रभावकारी होते हैं, उन्हें कहा जाता है :

Correct Answer: (d) द्वितीयक शीलगुण
Solution:ऐसे शीलगुण जो केवल सीमित क्षेत्र के भीतर जैसे "चाकलेट पसंद करना में प्रभावकारी होते है, उन्हें कहा जाता है- द्वितीयक शीलगुण ऑलपोर्ट के अनुसार द्वितीयक शीलगुण वे गुण होते है

जो किसी व्यक्ति के व्यवहार में केवल विशेष परिस्थितियों या सीमित क्षेत्रों में प्रकट होते हैं। ये स्थायी या प्रमुख नही होते जैसे-चॉकलेट पसंद करना "कभी कभी शार्माना', 'भीड़ से घबराना" आदि।

38. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए:

सूची-Iसूची-II
A. शब्दार्थ-विषयकI. सामाजिक अंत: व्यवहार में भाषा का प्रयोग
B. रूपिमII. नियम जो विनिर्दिष्ट करता है कि व्याकरण की दृष्टि से स्वीकार्य वाक्य बनाने के लिए शब्दों को किस प्रकार व्यवस्थित किया जाए।
C. प्रय व्यवहारिकीIII. सबसे छोटी इकाई जो एक विशिष्ट अर्थ को कूटबद्ध करने के लिए भाषा में प्रयुक्त होती है।
D. वाक्य-विचारIV. अर्थ का अध्ययन

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए -

Correct Answer: (c) A-IV, B-III, C-I, D-II
Solution:सही मिलान है:
सूची-Iसूची-II
A. शब्दार्थ-विषयकi. अर्थ का अध्ययन
B. रूपिमii. सबसे छोटी इकाई जो एक विशिष्ट अर्थ को कूटबद्ध करने के लिए प्रयुक्त होती है
C. यथार्थवादीiii. सामाजिक अंत: व्यवहार में भाषा का प्रयोग
D. वाक्य-विचारiv. नियम जो विनिर्दिष्ट करता है कि व्याकरण की दृष्टि से स्वीकार्य वाक्य बनाने के लिए शब्दों को किस प्रकार व्यवस्थित किया जाए।

39. वह प्रवृत्ति जिसमें समय और स्थान के करीब स्थित दृश्य तत्वों को एक साथ समूहीकृत किया जाता है, कहलाती है:

Correct Answer: (d) निकटता
Solution:वह प्रवृत्ति जिसमें समय और स्थान के करीब स्थित दृश्य तत्वों को एक साथ समूहीकृत किया जाता है निकटता कहलाती है। यह गेश्टाल्ट सिद्धांत का एक सिद्धांत है।

जब दृश्य तत्व समय और स्थान में एक-दूसरे के निकट होते है, तो मन उन्हें एक समूह या पैटर्न के रूप में एक साथ देखने की प्रवृत्ति रखता है।

40. पियाजे के संज्ञानात्मक विकास चरणों में वस्तु स्थायित्व की पूर्ण विकसित भावना किस चरण में प्रकट होती है?

Correct Answer: (a) संवेदी गतिशील चरण
Solution:पियाजे के संज्ञानात्मक विकास चरणों में वस्तु स्थायित्व की पूर्ण विकसित भावना संवेदी गतिशील चरण में प्रकट होती है।
→ पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत के अनुसार वस्तु स्थायित्व की पूर्ण विकसित भावना उस अवस्था को कहते है जब शिशु यह समझने लगता है कि वस्तुएँ तब भी अस्तित्व में रहती है जब वे उसकी आँखों से ओझल हो जाती हैं।