यू.जी.सी. एनटीए नेट परीक्षा जून-2020 वाणिज्य (Shift – 1)

Total Questions: 100

91. निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न सं. 141 से 145 के उत्तर दें।

बर्नआऊट, कार्य के जटिल अंतर्वेयवित्तक तनावकारकों के लंवित प्रत्युत्तर के रूप में उभरने वाला एक मनोवैज्ञानिक संलक्षण है। इस प्रत्युत्तर के तीन प्रमुख आयाम अत्यधिक परिश्रांति, नकारात्मकता की भावना और नौकरी से मोहभंग, तथा अप्रभावशीलता का भाव और निष्पत्ति की कमी है। इस त्रि-आयासी प्रतिरूप की महत्ता है कि यह व्यक्ति तनाव अनुभव को स्पष्ट रूप से सामाजिक संदर्भ में रखता है तथा व्यक्ति की स्वयं और अन्य दोनों की संकल्पना को अंतर्ग्रस्त करता है।
परिश्रांति आयाम का निढ़ाल होने, ऊर्जा की कमी, कमजोरी, अशक्तता और थकान के रूप में भी विवरण दिया गया था। नकारात्मक आयाम का मूलतः गैर-वैयक्तिकरण (मानवीय सेवाओं नियोजतों की प्रकृति के दृष्टिगत) कहा गया था, किन्तु इसका ग्राहकों के प्रति नकारात्मक या अनुचित मनोवृत्तियाँ, तुनकमिज्ञाज्ञी, आदर्शवाद की हानि और निर्गम के रूप में भी विवरण दिया गया था।
निष्पत्ति के निष्प्रभाव को मूलतः न्यून व्यक्तिगत निष्पत्ति कहा गया था, तथा कम उत्पादकता या क्षमता, निम्न नैतिकता और सामना करते की अक्षमता के रूप में भी विवरण दिया गया था। बर्नआऊट के विकास और इसके पश्चात्वर्ती प्रभाव के बारे में विभिन्न संकल्पनात्मक प्रतिरूप है। प्रथम, बर्नआऊट के तीन आयामों के बीच संबंध पर ध्यान था। जिसके अक्सर परवर्ती चरणों में विवरण दिया गया था।
परिश्रांति को पहले 'उच्च मांगों और अत्यधिक भार के प्रत्युत्तर में विकसित होना माना गया तथा तब, यह लोगों और कार्य के प्रति मोहभंग और नकारात्मक प्रतिक्रियायें (गैर-वैयक्तिकरण या नकारात्मकता) उत्पन्न करेगा। अक्षर यह जारी रहता है, तब अगला  चरण अपर्याप्तता और असफलता की भावनाओं (कम व्यक्तिगत निष्पत्ति या पेशेवर निष्प्रभाविता) का होगा। हाल में, बर्नआऊट प्रतिरूप कार्य तनाव और असंतुलनों के कारण उत्पन्न तनाव के भाव के बारे में सिद्धांतों और आधारित हैं। इसके तीन चरण हैं: (अ) कार्य तनावकारक, (ख) व्यक्तिगत तनाव, और (ग) रक्षात्मक जुझारुपन ।
अंततोगत्वा, मांग संसाधन असंतुल के दो विकासात्मक प्रतिरूप उभरे हैं: कार्य माँग संसाधन (जेडी-आर) तथा संसाधनों को संरक्षण (सीओआर) प्रतिरूप । जेडी आर प्रतिरूप इस भाव पर केन्द्रण करता है कि जब व्यक्ति कार्य की निरंतर मांगों का अनुभव करता है तथा उन मांगों को सुलझाने और कम करने के लिए अपर्याप्त संसाधन-उपलब्ध होते हैं, तो बर्नआऊट उत्पत्र होता है। सीओआर प्रतिरूप मूलभूत अभिप्रेरण सिद्धांत का अनुसरण करता है, जिसमें माना जाता है कि उपलब्ध संसाधनों पर निरंतर खतरों के परिणामस्वरूप बर्नआऊट उत्पन्न होता है। बर्नआऊट के असंतुलन प्रतिरूप का एक अलग रूप एरियाज ऑफ वर्कलाइफ (एडब्ल्यू) प्रतिरूप है, जो व्यक्ति कार्य असंतुलनों, या विसंगतियों के संबंध में कार्य तनाव कारकों का निरूपण करता है,किन्तु छह प्रमुख क्षेत्रों मको चिन्हित करता है जिसमें यह असंतुलन उत्पन्न होते हैं: कार्यभार, नियंत्रण, पुरस्कार, समुदाय, निष्पक्षता और मूल्य ।
इन क्षेत्रों में विसंगतियों व्यक्तिगत स्तर पर अनुभूत बर्नआऊट के स्तर को प्रभावित करती हैं, जो परिणामतः कार्य निष्पादन, सामाजिक व्यवहार और व्यक्तिगत तंदुरस्ती जैसे विभिन्न परिणामों को निर्धारित करता है।
निम्नांकित में से किसमें बर्नआऊट के चरणों का सही अनुक्रम है?

Correct Answer: (a) अतिराय कार्य के कारण थकान, कार्य के लिए नापंसदी, लक्ष्यों को प्राप्त करने में असफलता।
Solution:

बर्न आऊट के प्ररणों का सही क्रम है -

  • अतिराय कार्य के कारण थकान ।
  • कार्य के लिए नापसंदी।
  • लक्ष्यों को प्राप्त करने में असफलता।

92. नीचे दो कथन दिए गए है।

कथन (I) : बर्नआऊट का नकारात्मक चरण अक्सर उत्पादन गतिविधि में संलग्न कर्मचारियों द्वारा अत्यधिक कार्य दबाव के कारण, अनुभव किया जाता है।
कथन (II) : बर्नआऊट के नकारात्मक चरण में, व्यक्ति, अन्य लोगों से कट जाता है तथा उनके प्रति रुचि का अभाव प्रकट करता है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नांकित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (d) कथन (I) सही नहीं है, किंतु कथन (II) सही है
Solution:

बर्नआऊट का नकारात्मक चरण अक्सर उत्पादन गतिविधि में संलग्न कर्मचारियों द्वारा अधिक कार्य दबाव के कारण अनुभव किया जाता है। यह कथन गलत है। जबकी कथन (II) बर्नआउट के नकारात्मक चरण में व्यक्ति अन्य लोगों से कट जाता है। तथा उनके प्रति रूचि का अभाव प्रकट करता है, यह कथन सही है।

93. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें।

सूची–Iसूची–II
A. (परिश्रांति)i. कार्य पूर्ण करने में सक्षम नहीं
B. (नकारात्मकता)ii. कार्य के लिए ऊर्जा नहीं
C. (अकुशलता)iii. ग्राहक में कोई रुचि नहीं

निम्नांकित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (c) (A)-(ii), (B)-(iii), (C)-(i)
Solution:

सही मिलान निम्नवत है-

सूची–Iसूची–II
(A) परिश्रांति(ii) कार्य के लिए ऊर्जा नहीं
(B) नकारात्मकता(iii) ग्राहक में कोई रुचि नहीं
(C) अकुशलता(i) कार्य पूर्ण करने में सक्षम नहीं

94. निम्नलिखित में से कौनसा बर्नआऊट का संसाधनअसंतुलन प्रतिरूप नहीं है?

Correct Answer: (c) आयामी प्रतिरूप
Solution:

बर्नआउट के 3 प्रतिरूप हैं-
(1) कार्य, मांग संसाधन प्रतिरूप (JDR)
(2) संसाधनों का संरक्षण प्रतिरूप (COR)
(3) एरियाज ऑफ वर्कलाइफ प्रतिरूप
अतः विकल्प (C) गलत है।

95. निम्नलिखित में से क्या बर्नआऊट द्वारा उत्पन्न होते हैं?

A. ग्राहकों के लिए चिंता
B. नकारात्मक सामाजिक व्यवहार
C. शारीरिक और मानसिक तनाव
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (c) केवल (B) और (C)
Solution:

बर्नआऊट द्वारा उत्पन्न होने वाले उत्पाद हैं-
(1) नकारात्मक सामाजिक व्यवहार
(2) शारीरिक और मानसिक तनाव
अतः विकल्प (C) सही है।

96. निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न सं. 96 से 100 तक के उत्तर दें।

उपभोक्ताओं का अपने अधिकारों के प्रति जागरुक होना और जिम्मेदारीपूर्वक तथा समझदारी से उन अधिकारों का प्रयोग करना वांछनीय है। सार्वजनिक और निजी संचार माध्यमों में ऑडियों वीडियो प्रचार के इस युग में विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादकों, विनिर्माताओं, वितरकों और डीलरों द्वारा किए गए अतिरंजित अथवा असत्य दावों की प्रामणिकता का पता लगाना अक्षरः असंभव नहीं तो अत्यंत कठिन अवश्य है। सेवाओं और वस्तुओं के बारे में किए जाने वाले अतिरंजित और प्रायः असत्य दावों की सर्वत्यागी प्रवृत्ति के मद्देनजर उपभोक्ता संरक्षण कानून की आवश्यकता और इसके बारे में आम जनता को जागरुक बनाना नितांत जरूरी हो गया है। इस सिलसिले में भारत में तमाम अधिनियम बनाए गए हैं,
यथा- खाद्यान्न मिलावट निवारण अधिनियम, 1954; आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955; किराया खरीद अधिनियम 1972; मानक भार और माप-तोल अधिनियम, 1976; इत्यादि। बहरहाल, इन अधिनियमों में सन्निहित उपाय ज्यादा समय लेनेवाले, अपर्याप्त और मंहगे है। अन्य न्यायिक प्रक्रियाओं की तरह यहाँ भी दोषी शायद ही पकड़े जाते है या उन पर मुकदमा चलता है और बहुत ही कम मामलों में दोष-सिद्धी हो पाती है। दोषियों पर कार्रवाई नहीं होने की दशा में पीड़ितों के पास कोई चारा नही बचता और वे हताश हो जाते है।
गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

Correct Answer: (b) उपभोक्ता हितों का सुगम बनाने के लिए भारतीय न्यायिक प्रणाली में आमूलचूल सुधारों की आवश्यकता है।
Solution:

गद्यांश के आधार पर उपभोक्ताहितों को सुगम बनाने के लिए भारतीय न्यायिक प्रणाली में आमूलचूक सुधारों की आवश्यकता है। यह विकल्प सही है।

97. गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

Correct Answer: (d) दिए गए गद्यांश के आधार पर उपयुक्त में से कोई भी निष्कर्ष नहीं निकलता
Solution:

उपयुक्त गद्यांश से किसी भी एक निष्कर्ष पर पहुँच पाना संभव नही हैं। न यह सिद्ध हो सकता है कि उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूक है तथा इनका प्रयोग वह जिम्मेदारी पूर्वक करते हैं। न ही यह सिद्ध हो सकता है कि वह जागरूक नही है इस लिए वह अधिकारों का प्रयोग नहीं करते। अतः विकल्प (d) सही है।

98. गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

Correct Answer: (b) गद्यांश में उपभोक्ता हितों से संबंधित कानूनों की विस्तृत सूची नही दी गई हैं।
Solution:

गद्यांश में उपभोक्ता हितों से संबंन्धित कानूनों की विस्तृत सूची नही दी गई है। यह विकल्प सही है।

99. निम्नलिखित में से किसे गद्यांश का केंद्रीय बिंदु माना जा सकता है?

Correct Answer: (a) उपभोक्ता
Solution:

गद्यांश का केन्द्रीय बिन्दु उपभोक्ता है। पूरा गद्यांश इन्हीं ध्यान रखकर दिया गया है।

100. गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

Correct Answer: (b) उत्पादक और विनिर्माता उपभोक्ता अधिकारों के प्रति असंवेदनशील हैं
Solution:

उत्पादक एवं विनिर्माता उपभोक्ता अधिकारों के प्रति असंवेदनशील है। यह कथन गद्यांश के आधार पर सबसे उपयुक्त है।