बर्नआऊट, कार्य के जटिल अंतर्वेयवित्तक तनावकारकों के लंवित प्रत्युत्तर के रूप में उभरने वाला एक मनोवैज्ञानिक संलक्षण है। इस प्रत्युत्तर के तीन प्रमुख आयाम अत्यधिक परिश्रांति, नकारात्मकता की भावना और नौकरी से मोहभंग, तथा अप्रभावशीलता का भाव और निष्पत्ति की कमी है। इस त्रि-आयासी प्रतिरूप की महत्ता है कि यह व्यक्ति तनाव अनुभव को स्पष्ट रूप से सामाजिक संदर्भ में रखता है तथा व्यक्ति की स्वयं और अन्य दोनों की संकल्पना को अंतर्ग्रस्त करता है।
परिश्रांति आयाम का निढ़ाल होने, ऊर्जा की कमी, कमजोरी, अशक्तता और थकान के रूप में भी विवरण दिया गया था। नकारात्मक आयाम का मूलतः गैर-वैयक्तिकरण (मानवीय सेवाओं नियोजतों की प्रकृति के दृष्टिगत) कहा गया था, किन्तु इसका ग्राहकों के प्रति नकारात्मक या अनुचित मनोवृत्तियाँ, तुनकमिज्ञाज्ञी, आदर्शवाद की हानि और निर्गम के रूप में भी विवरण दिया गया था।
निष्पत्ति के निष्प्रभाव को मूलतः न्यून व्यक्तिगत निष्पत्ति कहा गया था, तथा कम उत्पादकता या क्षमता, निम्न नैतिकता और सामना करते की अक्षमता के रूप में भी विवरण दिया गया था। बर्नआऊट के विकास और इसके पश्चात्वर्ती प्रभाव के बारे में विभिन्न संकल्पनात्मक प्रतिरूप है। प्रथम, बर्नआऊट के तीन आयामों के बीच संबंध पर ध्यान था। जिसके अक्सर परवर्ती चरणों में विवरण दिया गया था।
परिश्रांति को पहले 'उच्च मांगों और अत्यधिक भार के प्रत्युत्तर में विकसित होना माना गया तथा तब, यह लोगों और कार्य के प्रति मोहभंग और नकारात्मक प्रतिक्रियायें (गैर-वैयक्तिकरण या नकारात्मकता) उत्पन्न करेगा। अक्षर यह जारी रहता है, तब अगला चरण अपर्याप्तता और असफलता की भावनाओं (कम व्यक्तिगत निष्पत्ति या पेशेवर निष्प्रभाविता) का होगा। हाल में, बर्नआऊट प्रतिरूप कार्य तनाव और असंतुलनों के कारण उत्पन्न तनाव के भाव के बारे में सिद्धांतों और आधारित हैं। इसके तीन चरण हैं: (अ) कार्य तनावकारक, (ख) व्यक्तिगत तनाव, और (ग) रक्षात्मक जुझारुपन ।
अंततोगत्वा, मांग संसाधन असंतुल के दो विकासात्मक प्रतिरूप उभरे हैं: कार्य माँग संसाधन (जेडी-आर) तथा संसाधनों को संरक्षण (सीओआर) प्रतिरूप । जेडी आर प्रतिरूप इस भाव पर केन्द्रण करता है कि जब व्यक्ति कार्य की निरंतर मांगों का अनुभव करता है तथा उन मांगों को सुलझाने और कम करने के लिए अपर्याप्त संसाधन-उपलब्ध होते हैं, तो बर्नआऊट उत्पत्र होता है। सीओआर प्रतिरूप मूलभूत अभिप्रेरण सिद्धांत का अनुसरण करता है, जिसमें माना जाता है कि उपलब्ध संसाधनों पर निरंतर खतरों के परिणामस्वरूप बर्नआऊट उत्पन्न होता है। बर्नआऊट के असंतुलन प्रतिरूप का एक अलग रूप एरियाज ऑफ वर्कलाइफ (एडब्ल्यू) प्रतिरूप है, जो व्यक्ति कार्य असंतुलनों, या विसंगतियों के संबंध में कार्य तनाव कारकों का निरूपण करता है,किन्तु छह प्रमुख क्षेत्रों मको चिन्हित करता है जिसमें यह असंतुलन उत्पन्न होते हैं: कार्यभार, नियंत्रण, पुरस्कार, समुदाय, निष्पक्षता और मूल्य ।
इन क्षेत्रों में विसंगतियों व्यक्तिगत स्तर पर अनुभूत बर्नआऊट के स्तर को प्रभावित करती हैं, जो परिणामतः कार्य निष्पादन, सामाजिक व्यवहार और व्यक्तिगत तंदुरस्ती जैसे विभिन्न परिणामों को निर्धारित करता है।
निम्नांकित में से किसमें बर्नआऊट के चरणों का सही अनुक्रम है?
Correct Answer: (a) अतिराय कार्य के कारण थकान, कार्य के लिए नापंसदी, लक्ष्यों को प्राप्त करने में असफलता।
Solution:बर्न आऊट के प्ररणों का सही क्रम है -
- अतिराय कार्य के कारण थकान ।
- कार्य के लिए नापसंदी।
- लक्ष्यों को प्राप्त करने में असफलता।