यू.जी.सी. एनटीए नेट परीक्षा जून-2020 वाणिज्य (Shift – 1)

Total Questions: 100

41. मर्कोसुर, दक्षिण अमेरिकी व्यापार गुट है:

Correct Answer: (b) सामान्य बाजार
Solution:

मुक्त व्यापार क्षेत्र (एफटीए) वह है जहाँ एक देश से दूसरे देश में प्रवेश करने वाले किसी उत्पाद पर कोई आयात शुल्क या होता नही लगाता है। जैसे EFTA - यूरोपियन मुक्त व्यापार क्षेत्र, NAFTA - नार्थ अमेरीका मुक्त व्यापार क्षेत्र। सामान्य बाजार में  सदस्य अंतरिक व्यापार बाधाओं को समाप्त करते है तथा बाह्य व्यापार बाधाओं को अपनाते है। वहाँ सदस्य देश आपस के संसाधनों की मुक्त आवाजाही की अनुमति देते है।
जैसे- मर्कोसूर, दक्षिणी अमेरीकी व्यापार, पूर्वी अफ्रीकी आम बाजार, पश्चिमी अफ्रीकी आम बाजार सीमा शुल्क संघ दो या अधिक पडोसी देशों के बीच व्यापार बाधाओं को दूर करने, सीमा शुल्क को कम करने या समाप्त करने के लिए एक समझौता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण यूरोपियन यूनियन है।
आर्थिक सहयोग सतत् विकास तथा आर्थिक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए आर्थिक और उत्पादक संरचनाओं को आधुनिकीकरण से संबंधित एक कार्यक्रम है। वर्ष 1985 में तुर्की, पाकिस्तान और इरान ऐसे ही आर्थिक सहयोग संगठन में शामिल हुए।

42. निम्नांकित में से कौन से एक डी आई के मेजबान देशों में घरेलू फर्मों पर संभावित नकारात्मक प्रभाव हैं?

A. बाजार एकाधिकार
B. प्रौद्योगिकी निर्भरता
C. बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा
D. लाभ बहि वाह
निम्नांकित विकल्पों में से सहीं उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (e) *
Solution:

(*) यूजीसी द्वारा यह प्रश्न मूल्यांकन से हटा दिया गया तथा सभी को अंक प्रदान लिए गए। प्रश्न में FDI (प्रत्यक्ष), विदेशी निवेश से ऋणात्मक प्रभाव के सम्बन्ध में सही विकल्प चुनने को कहा गया है। जबकि विकल्पों में बाजार एकाधिकार तथा लाभ बर्हिवाह के अतिरिक्त कोई भी ऋणात्मक प्रभाव नहीं हैं। जो कि विकल्पों में उपस्थित नही है। तकनीकी निरर्भता तथा बढ़ी प्रतिस्पर्धा धनात्मक प्रभाव है।

43. अंतिम यूनिट की बिक्री से प्राप्त सीमांत राजस्व प्रत्येक बाजार में बेचे गए, उत्पाद की सीमांत लागत के समतुल्य होने तक अलग-अलग बाजारों में एक ही उत्पाद के लिए अलग-अलग कीमत प्रभारित करने की व्याख्या निम्नलिखित में से किनके द्वारा की जाती है?

A. प्रथम दर्जे का कीमत विभेद
B. द्वितीय दर्जे का कीमत विभेद
C. तृतीय दर्जे का कीमत विभेद
D. साम्य कीमत
E. कीमत विभेद
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिएः

Correct Answer: (c) केवल C और E
Solution:

मूल्य विभेद के दर्जे-
प्रथम दर्जे की मूल्य विभेद- जब व्यवसाय द्वारा किसी उत्पाद के लिए अधिकतम प्रति इकाई मूल्य वसूला जाता है।
द्वितीय दर्जे का मूल्य विभेदीकरण - जब व्यवसाय विभिन्न मूल्यों को उत्पाद के विभिन्न उपभोग की गई मात्रा के अनुसार वसूलता है।
तृतीय दर्जे का मूल्य विभेदीकरण - जब संस्था विभिन्न उपभोक्ता समूहों के लिए विभिन्न मूल्य वसूल करता है। समविच्छेद मूल्य वह होता है जिस मूल्य पर मांग तथा पूर्ति बराबर होती है तथा विभेदीकरण किसी एक उत्पाद का अलग-अलग उपभोक्ताओं अलग-अलग मूल्य वसूल करना होता है। अतः अंतिम इकाई की बिक्री से प्राप्त सीमांत राजस्व प्रत्येक बाजार में बेचे गए उत्पाद की सीमांत लागत के समतुल्य होने तक अलगअलग बाजारों में एक ही उत्पाद के लिए अलग-अलग कीमत प्रभारित करने की व्याख्या तृतीय दर्जे की विभेदीकरण तथा मूल्य विभेदीकरण है।

44. माध्यस्य मूल्यन सिद्धांत (एपीटी) के प्रचालन के तार्किक अनुक्रम में निम्नलिखित चरणों को व्यवस्थित करें

A. कारक संवेदनशीलताओं का अनुमान
B. कारकों के लिए जोखिम प्रीमियम अनुमान
C. समष्टि आर्थिक कारकों का चिन्हांकन
निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (c) C, B, А
Solution:

माध्यस्य मूल्यन सिद्धांत (एटीपी) के प्रचालन के तार्किक अनुक्रम में निम्न चरण हैं-
(1) समष्टि आर्थिक कारकों का चिन्हांकन पहचान
(2) कारकों के लिए जोखिम प्रीमियम अनुमान
(3) कारक संवेदनशीलताओं का अनुमान APT सिद्धांत (माध्यस्य मूल्यंकन सिद्धांत )के प्रणेता स्टीफेन रॉस (Stephen Ross) है।

45. सामग्री की लागत लेखापरीक्षा में शामिल है:

A. वस्तु मंगाने की प्रक्रिया
B. मानक लागत परिवर्त्य के परिकलन की विधि
C. उपरिव्यय वर्गीकरण का
D. कचड़ा, अपवर्ज्य सामग्री, अंतरण का लेखांकन
E. अधि अथवा ऊपरि अवशोषण का लेखांकन
नीचे दिए गए विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनिएः

Correct Answer: (a) केवल A, D
Solution:

सामग्री की लागत लेखा परीक्षण में शामिल है-
(a) वस्तु मंगाने की प्रक्रिया क्या वह अधिकारिक है अथवा नहीं उनकी वास्तविकता तथा गुणवत्ता आदि की सुनिश्चित करना शामिल है।
(b) कबाड़, अपवर्ज्य सामग्री तथा अंतरण आदि का लेखांकन करना भी सामग्री की लागत लेखा परीक्षा में शामिल है।

46. निम्नलिखित में से किस प्रत्यय से अनधिमान वक्र की ह्रासमान प्रवृत्ति की सटीक व्याख्या होती है?

A. हासमान सीमांत उपयोगिता
B. वस्तुओं के मध्य स्थानापन्न की ह्रासमान सीमांत दर
C. तकनीकी स्थापान्न की ह्रासमान सीमांत दर
D. उपयोग की वस्तुओं की संदर्भात्मक माप
E. धन की हासमान सीमांत उपयोगिता
नीचे दिए गए विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (b) केवल B और D
Solution:

अनधिमान वक्र की ह्रासमान प्रवृत्ति की सटीक व्याख्या होती है।
⇒ वस्तुओं में मध्य स्थानापन्य की हासमान सीमांत दरे ।
⇒ उपभोग की वस्तुओं की संदर्भात्मक माप स्थानापन्न सीमांत दर बताती है, कि दो वस्तुओं के बीच स्थानापन्न सम्बन्ध होता है। अर्थात एक का अधिक प्रयोग दूसरी के उपयोग में कमी लाएगा तथा IC वक्र एक तरह की संदर्भात्मक इकाई है जो एक संख्या में मापी न जा सकने वाली उपयोगिता को दर्शाती है। अतः विकल्प B तथा D सही है।

47. उत्पाद के मूल्य विभेद के लिए निम्नांकित में से क्या स्थितियां हैं?

A. फर्म के पास कुल एकाधिकार शक्ति हो
B. भिन्न-भिन्न बाजारों में उत्पाद के लिए माँग की मूल्य लोच अलग अलग होनी चाहिए
C. बाजार अलग किये जा सकें या अलगअलग खण्डों में किये जा सकें
D. व्यापारिक इकाईयों का स्वतन्त्र आवगमन
निम्नांकित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (d) केवल A, B और C
Solution:

मूल्य विभेदीकरण के लिए आवश्यक शर्ते (स्थितियाँ)-
(1) फर्म के पास कुछ एकाधिकार के शक्तियाँ होनी चाहिए अन्यथा अलग मूल्य वसूल करने पर ग्राहक टूट कर कहीं और स्थापित हो सकते हैं।
(2) मूल्य आधारित मांग की लोच विभिन्न बाजारों में भिन्न-भिन्न होनी चाहिए। यदि उनमें समानता होगी तो मूल्य अलग रखने पर विभेदीकरण का उद्देश्य पूर्ण नहीं होगा।
(3) बाजार को किन्हीं आधार पर जैसे ग्राहक की मांग, पसंद, उपयोगिता अथवा प्राकृतिक वातावरण अथवा भौगोलिक आधार पर अलग किया जा सकता है। यदि संभव नहीं है तो बाजार में अलग-अलग मूल्य अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर नहीं रखा जा सकेगा।

48. कारोबार अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता तार्किकता निम्नलिखित में से किस पूर्वधारणा का सामूहिक प्रकटन है?

A. अपूर्ण सन्तुष्टि
B. प्राथमिकताओं की स्पष्टता
C. वस्तुओं और सेवाओं की विभाज्यता
D. आर्थिक स्वार्थी उद्देश्य
E. सूचना का अधिग्रहण
निम्नांकित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (d) केवल A, B, D और E
Solution:

एक उपभोक्ता जो की तार्किक व्यवहार करता है, यह तार्किकता बतलाती है कि वह किसी कारण वश ही, सोच समझ कर विवेक पूर्ण ढंग से कोई कार्य करता है। एक करोबार अर्थव्यवस्था में वह, उसकी अपूर्ण संतुष्टी अपनी जरूरतों को प्राथमिकताओं के आधार पर वर्गीकृत करके स्पष्ट करना, उसकी आर्थिक क्षमताओं तथा लाभ उद्देश्यों (स्वार्थ) बाजार/ अर्थव्यवस्था की सम्पूर्ण जानकारी (सूचना) के आधार पर ही कोई निर्णय लेता है। यह कहा जा सकता है कि यह इन सभी का सामूहिक प्रकटन है।

49. निवल वर्तमान मूल्य (एनपीवी) और आंतरिक रिटर्न दर (आई आर आर) विधियां निम्नलिखित में से किस कारण परस्पर विरोधी परिणाम देते हैं?

A. अपारंपरिक नकद प्रवाह
B. निवेश आकार असमानता
C. निवेश काल असमानता
D. नकद प्रवाह पैटर्न असमानता
निम्नांकित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (d) केवल B, C और D
Solution:

शुद्ध निवल मूल्य किसी कार्यक्रम की लाभदायकता मापने की तकनीकि है जो कि मुद्रा के समय आधारित मूल्य पर यह बतलाती है कि आज किए गए निवेश की राशि भविष्य में किए गए समान राशि के निवेश से कम होती है। जबकी आंतरिक प्रत्याय की दर वह दर है जो वंटित रोकड प्रवाह पर आधारित है। यह किसी कार्यक्रम द्वारा अर्जित प्रत्याय (रिटर्न) देता है। यह छूट की वह दर है जिस पर शुद्ध वर्तमान मूल्य (NPV) शून्य के बराबर है। दोनों में अंतर के कारण है:-
(1) निवेश की असमानता।
(2) निवेश काल असमता।
(3) नकद प्रवाह पैटर्न (क्रम) असमानता। निवेश की राशि की भिन्नता, निवेश काल की भिन्नता तथा निवेश की रोकड़ प्रवाह का क्रम आदि दोनों में अंतर करते है।

50. निम्नलिखित में से किन दशाओं में संदायगी अवधि विधि का निवेश अवसरों के मूल्यांकन के लिए प्रयोग करने का सुझाव दिया जाता है?

A. अत्यधिक कर्जभार वाला व्यवसाय
B. नकद बाहुल्य व्यवसाय
C. अनिश्चित बाजार परिस्थितियां
D. स्थिर बाजार परिस्थितियां
निम्नांकित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (b) केवल A और C
Solution:

अदायगी अवधि विधि वह विधि है जिसके द्वारा यह ज्ञात किया जाता है कि किसी योजना कार्यक्रम में किया गया निवेश कितने समय में वापस प्राप्त हो जाएगा। इसके लिए प्रति वर्ष प्राप्त होने वाले रोकड़ प्रवाह को जोड लिया जाता है तथा जिस वर्ष भी यह मूल निवेश के बराबर होता है वही अदायगी अवधि कहलाता है। यह वहाँ अधिक उपयोगी है जहाँ पर ऋण पूंजी का अधिक प्रयोग किया जाता है तथा बाजार की परिस्थितियाँ आकलित नहीं की जा सकती अथवा अनिश्चित होती है। इसका एक दोष है कि यह समय मूल्य को ध्यान में नहीं रखता।