A. साझेदार फर्म का व्यवसाय अधिकतम सामान्य लाभ तक जारी रखने के लिए बाध्य नहीं है। B. जहां साझेदार स्वयं द्वारा आग्रहित पूंजी पर ब्याज का हकदार हो, ऐसा ब्याज देय होगा भले ही लाभ हो अथवा नहीं हो।
C. बहिर्गामी साझेदार को फर्म के मुनाफा में शेयर का दावा करने का अधिकार तब तक होता है जब तक कि खाता का अंततः निस्तारण न हो जाए।
D. किसी भी साझेदार को केवल सभी अन्य साझेदारों की सहमति से ही फर्म से निष्कासित किया जा सकता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए
Correct Answer: (a) केवल A, B, D
Solution:उपरोक्त में सही कथन निम्नवत है -
(a) साझेदार फर्म का व्यवसाय अधिकतम सामान्य लाभ तक जारी रखने के लिए बाध्य है।
(b) जहाँ साझेदार स्वयं द्वारा आग्रहित पूंजी पर ब्याज का हकदार हो, ऐसा ब्याज देय होगा जबकि लाभ हो। हानि की स्थिति में ब्याज देय नहीं होगा।
(c) बहिर्गामी साझेदार को फर्म में मुनाफा में शेयर का दावा करने का अधिकार तब तक होता है जब तक कि खातों का अंततः निस्तारण न हो जाए।
(d) किसी भी साझेदार को अन्य सभी साझेदारों की सहमति से निष्कासित किया जा सकता है यह कथन गलत है। क्योंकि साझेदार बराबर का स्वामी होता है यहाँ निष्कासन नहीं हो सकता। जबकि फर्म का विघटन किया जा सकता है।