कोविड-19 के प्रभाव से उबरकर स्वास्थ्य लाभ पाते हुए भारत ने डिजिटीय क्षेत्र में निवेश से बढ़ावा पाकर 13% की वृद्धि दर प्राप्त की। अवसंरचना व ऊर्जा समझौतों से भी भारत में एम एंड ए को सहारा मिला। परिणाम स्वरूप प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ डी आई) के क्षेत्र में भारत 2020 में 13% वृद्धि प्राप्त कर सका। वैश्विक विफलता के बीच, चीन ही ऐसा अन्य देश है जिसने उल्लेखनीय एफ डी आई वृद्धि प्रदर्शित की है। व्यापार व विकास संबंधी संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन (अंकटाड) द्वारा जारी 'इन्वेस्टमेंट ट्रेंड मॉनीटर' के अनुसार 2020 में वैश्विक एफडीआई में 42% की गिरावट आई और यह 2019 में 1.5 ट्रिलियन अमरीकी डालर से घट कर अनुमानित 859 विलियन अमरीकी डालर रह गई।
विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के निराशाजनक वर्ष में भारत और चीन ही दो प्रमुख बहिर्वासी थे। भारत ने डिजिटीय क्षेत्र में निवेश से बढ़ावा पाकर सकारात्मक वृद्धि (13%) प्राप्त की। इस क्षेत्र में विशेष पर अधिग्रहण के जरिए निवेश रहा। सीमा पारीय एम और ए में 83% वृद्धि हुई और यह $27 बिलियन डालर हो गया। अवसंरचना व ऊर्जा समझौतों से भी भारत में एम और ए समझौतों को सहारा मिला।
भारत व तुर्की, विशेष कर ई-वाणिज्य प्लेटफार्म, डेटा प्रसंसकरण सेवाओं और डिजिटीय भुगतान सहित आईटी परामर्शी और डिजिटीय क्षेत्रों में, अच्छी संख्या में समझौते कर रहे हैं। आईसी टी और फार्मा क्षेत्र में अलगअलग देश के रूप में, एशिया का महाकाय देश चीन एफडीआई प्राप्तकर्ता देश के रूप में दुनिया में प्रथम रहा और वहाँ यह 4% से बढ़कर 163 बिलियन अमरीकी डालर हो गया।
उच्च प्रौद्योगिकीय उद्योगों में 2020 में 11% की वृद्धि हुई और सीमा पारीय एम और ए में 54% की वृद्धि हुई। यद्यपि उनकी निवेश गतिविधियों में 2020 के आरंभ में मंदी आयी, तथापि अब वे निम्न ब्याज दरों और बाजार मूल्य में वृद्धि का लाभ उठा कर विस्तार के लिए समुद्र पारीय बाजारों में परिसम्पत्तियों के अधिग्रहण और संकट से प्रभावित प्रतिद्वंद्वी व लघु नवीकारी कंपनियों के अधिग्रहण के लिए तत्पर हो रहे हैं।
आईसीटी और फार्मा क्षेत्र में एफडीआई प्रवाह के सन्दर्भ में विश्व में किस देश का प्रदर्शन सर्वोत्तम रहा है?