यू.जी.सी. एनटीए नेट परीक्षा जून-2019 (हिन्दी) Shift-II

Total Questions: 100

1. निम्नलिखित उपन्यासों का प्रकाशन काल की दृष्टि से सही अनुक्रम क्या है?

Correct Answer: (c) गर्म राख, भूले बिसरे चित्र, टेरा कोटा, मानस का हंस
Solution:

दिये गये उपन्यासों का प्रकाशन काल की दृष्टि से सही अनुक्रम 'गर्म राख, भूले बिसरे चित्र, टेरा कोटा, मानस का हंस' है। सम्बन्धित विवरण इस प्रकार है-

उपन्यासप्रकाशन वर्षलेखक
गर्म राख1957 ई.उपेन्द्रनाथ 'अश्क'
भूले बिसरे चित्र1959 ई.भगवतीचरण वर्मा
टेरा कोटा1971 ई.लक्ष्मीकान्त वर्मा
मानस का हंस1972 ई.अमृत लाल नागर

2. प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित संस्मरणकृतियों का सही अनुक्रम क्या है?

Correct Answer: (d) स्मृतिकण, हम हशमत, लीक-अलीक, वन तुलसी की गंध
Solution:

प्रकाशन वर्ष के अनुसार दी गई संस्मरण कृतियों का सही अनुक्रम है- 'स्मृतिकण, हम हशमत, लीक अलीक, वन तुलसी की गंध'। द्रष्टव्य विवरण इस प्रकार है-

संस्मरणप्रकाशन वर्षलेखक
स्मृतिकण1959 ई.सेठ गोविन्द दास
हम-हशमत1977 ई.कृष्णा सोबती
लीक अलीक1980 ई.भारत भूषण अग्रवाल
वन तुलसी की गंध1984 ई.फणीश्वर नाथ 'रेणु'

3. निम्नलिखित संस्थाओं को उनके प्रवर्तकों के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची-I (संस्थाएँ)सूची-II (प्रवर्तक)
(A) ब्रह्म समाज(i) महात्मा फुले
(B) प्रार्थना समाज(ii) एनी बेसेंट
(C) थियोसिफिकल सोसायटी(iii) म. गो. रानाडे
(D) सत्यशोधक समाज(iv) राजा राममोहन राय
(v) दयानंद सरस्वती

निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिएः

Correct Answer: (a) (A)-(iv); (B)-(iii); (C)-(ii); (D)-(i)
Solution:सही सुमेल इस प्रकार हैं-
संस्थाएँस्थापना वर्षप्रवर्तक
ब्रह्म समाज1828 ई.राजा राम मोहन राय
प्रार्थना समाज1867 ई.महादेव गोविन्द रानाडे
थियोसिफिकल सोसायटी1882 ई.एनी बेसेन्ट, मैडम ब्लावात्सकी कर्नल हेनरी अल्काट
सत्यशोधक समाज1873 ई.महात्मा ज्योतिबा फुले
आर्य समाज1875 ई.दयानन्द सरस्वती

4. निम्नलिखित में से किस कवि का संबंध नवगीत विधा से नहीं है?

Correct Answer: (b) गिरधर राठी
Solution:कवि गिरिधर राठी का सम्बन्ध नवगीत विधा से नहीं है। हिन्दी में नवगीत परम्परा का आरम्भ राजेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा सन 1958 ई.में सम्पादित 'गीतांगिनी' शीर्षक नवगीत संकलन से माना जाता है।
नवगीत विधा के प्रमुख कवि- वीरेन्द्र मिश्र, कुमार रवीन्द्र, माहेश्वर तिवारी, डॉ. शम्भूनाथ सिंह, उमाकांत मालवीय, रवीन्द्र भ्रमर, श्रीकृष्ण तिवारी, रामनाथ अवस्थी, आदि हैं। वीरेन्द्र मिश्र की रचनाएँ- गीतम, लेखनी-बेला, अविराम चल मधुवन्ति । माहेश्वर तिवारी की रचना हरसिंगार कोई तो हो और शंभूनाथ सिंह का 'जहाँ दर्द नीला है' आदि प्रमुख हैं।

5. "माई न होती, बाप न होते, कम न होता काया।

हम नहिं होते, तुम नहि होते, कौन कहाँ ते आया।
चंद न होता, सूर न होता, पानी पवन मिलाया।
शास्त्र न होता, वेद न होता, करम कहाँ ते आया ।"
उपर्युक्त काव्य पंक्तियाँ किस कवि की हैं?

Correct Answer: (b) नामदेव
Solution:

प्रश्नोक्त पंक्तियाँ नामदेव की हैं। नामदेव को बिठोवा संत भी कहा जाता है। इन्होंने भक्ति के सगुण एवं निर्गुण दोनों मार्ग को अपनाया है। शेष कवियों की प्रसिद्ध पंक्तियाँ इस प्रकार हैं-

कविपंक्तियाँ
कबीर-माधो मैं ऐसा अपराधी, तेरी भगति होत नहीं साधी।
नामदेव-मन मेरी सूई तन मेरा धागा, खेचर जी के चरण पर नामा सिंपी लागा।
रैदास-जब हम होते तब तू नहीं, अब तू है मैं नहीं।
मलूकदास-नाम हमारा खाक है, हम खाकी बन्दे। खाकहिं ते पैदा किए अति गाफिल गंदे।।

6. "जीवन मुँह चाही को नीको ।

दरस परस दिन राति करति है, कान्ह पियारे पी को ।
उपर्युक्त पंक्तियों में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने किस भाव की अभिव्यक्ति मानी है?

Correct Answer: (c) असूया भाव की
Solution:प्रश्नोक्त पंक्ति में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने असूया भाव की अभिव्यक्ति मानी है। निर्गुण भक्तिभाव सगुण भक्तिभाव से विपरीत धारा है। निर्गुण भक्तिभाव में ईश्वर की सत्ता को स्वीकार नहीं करते हैं।
निर्गुण शाखा प्रमुख कवि कबीर, रैदास, जंभनाथ, लालदास, दादू दयाल आदि है।
सगुण शाखा के प्रमुख कवि- सूरदास, तुलसीदास, मीरा, नन्ददास, कृष्णदास, परमानन्ददास, कुम्भनदास आदि हैं।
असूया भाव - इसमें दूसरे के गुण में दोष निकालने की प्रवृत्ति होती है।
दैहिक श्रृंगार - बाहरी साज सज्जा का स्वरूप जो मुख्य रूप से स्त्रियों में देखने को मिलता है। निर्गुण काव्य की विशेषताएं-
(i) निर्गुणोपासना
(ii) रहस्यवाद का उत्कृष्ट वर्णन
(iii) बहुदेववाद का विरोध
(iv) सामाजिक अन्याय और आडम्बर का विरोध
(v) लोक-कल्याण की भावना और जाति का विरोध
(vi) नारी के कामिनी रूप की निन्दा
(vii) सधुक्कड़ी भाषा का प्रयोग।

7. "बैठे हुए सुखद आतपतप में मृग रोमंथन करते हैं,

वन के जीव बिवर से बाहर हो विश्रब्ध विचरते हैं।"
उपर्युक्त पंक्तियों में किसका वर्णन है?

Correct Answer: (c) रश्मिरथी में परशुराम आश्रम का
Solution:

प्रश्नोक्त पंक्तियों में रश्मिरथी में परशुराम के आश्रम का वर्णन किया गया है। रश्मिरथी (सूर्य का सारथी) की रचना रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा 1952 ई. में की गई, इसमें 7 सर्ग हैं। दिनकर को 'अधैर्य का कवि' तथा 'डिप्टी राष्ट्रकवि' कहते हैं। इनकी कृतियाँ- रेणुका (1935), हुंकार (1939), सामधेनी (1947), कुरुक्षेत्र (1946), उर्वशी (1961), परशुराम की प्रतीक्षा (1963), इतिहास के आँसू (1951) आदि हैं।

8. "विलक्षण बात यह है कि आधुनिक गद्य-साहित्य की परम्परा का प्रवर्तन नाटक से हुआ।"

उपर्युक्त कथन किस इतिहासकार का है?

Correct Answer: (b) रामचन्द्र शुक्ल
Solution:"विलक्षण बात यह है कि आधुनिक गद्य-साहित्य की परम्परा का प्रवर्तन नाटक से हुआ।" उपर्युक्त कथन रामचन्द्र शुक्ल जी का है। हिन्दी का प्रथम नाटक एवं उनके प्रस्तोता इस प्रकार हैं-
प्रस्तोतानाटक
डॉ. दशरथ ओझा- गयसुकुमार रास
डॉ. गणपति चन्द्र गुप्त- गोरक्ष विजय
डॉ. बच्चन सिंह- आनन्द रघुनंदन
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल- आनन्द रघुनंदन
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र- नहुष

9. "और अब तो हवा भी बुझ चुकी है

और सारे इश्तहार उतार लिए गए हैं
जिनमें कल आदमी-
अकाल था।..."
उपर्युक्त पंक्तियाँ किस कवि की हैं?

Correct Answer: (c) धूमिल
Solution:प्रश्नोक्त पंक्तियाँ सुदामा पाण्डेय 'धूमिल' की हैं। सुदामा पाण्डेय धूमिल ने अपनी कविता के द्वारा राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक विषमता पर तीव्र प्रहार किया है। धूमिल जनसरोकार के कुशल चितेरे हैं। "उनकी कविता हत्यारों के खिलाफ एक लड़ाई है।"
काव्य संग्रह- संसद से सड़क तक (1972 ई.), कल सुनना मुझे आदि है।
शेष साहित्यकारों की प्रसिद्ध पंक्तियाँ इस प्रकार हैं-
साहित्यकारप्रसिद्ध पंक्तियाँ
नागार्जुन -

कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास
कई दिनों तक कानी कुतिया, सोई उसके पास।

मुक्तिबोध -

अब अभिव्यक्ति के सारे खतरे उठाने होंगे।
तोड़ने होंगे मठ और गढ़ सभी।

लीलाधर जगूड़ी-

एक आदमी अभी मेरा एक शब्द लेकर मुझे टोह गया।
उसके मुँह में वह शब्द अब भी गरम होगा।

10. 'मैं नीर भरी 'दुख की बदली।'

महादेवी वर्मा का उपर्युक्त गीत उनके किस काव्य संग्रह से सम्बद्ध है?

Correct Answer: (d) सांध्यगीत
Solution:

'मैं नीर भरी दुख की बदली' पंक्ति महादेवी वर्मा के 'सांध्यगीत' काव्य संग्रह से ली गयी है। नीहार (1930 ई.), रश्मि (1932 ई.), नीरजा (1935 ई.) (इसे सेक्सरिया पुरस्कार मिला), सांध्यगीत (1936 ई.), यामा (1940 ई.), दीपशिखा (1942 ई.), सप्तपर्णा (1960 ई.), इनकी अन्य प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।