यू.जी.सी. एनटीए नेट परीक्षा जून-2019 (हिन्दी) Shift-II

Total Questions: 100

91. निर्देश: प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना है। और दूसरा तर्क है। दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

स्थापना : बिम्बवाद में शब्दों की कमखर्ची, भाषा के समासगुण कम-से-कम शब्दों के प्रयोग से अधिकाधिक अर्थ व्यंजना को महत्त्व दिया गया है।
तर्क : बिम्बवाद के समर्थकों का मानना था कि विषय का सपाट और प्रत्यक्ष निरूपण किया जाना चाहिए। विकल्पः

Correct Answer: (a) (A) सही (R) गलत
Solution:

विम्बवाद में शब्दों की कम खर्ची, भाषा के समासगुण कम से कम शब्दों के प्रयोग से अधिकाधिक अर्थ व्यंजना का महत्त्व दिया गया है। स्थापना के सम्बन्ध में यह कथन सही है। जबकि दिया गया तर्क 'बिम्बवाद के समर्थकों का मानना था कि विषय का सपाट और प्रत्यक्ष किया जाना चाहिए।' स्थापन के सम्बन्ध में सही नहीं है।

92. निर्देशः प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना है। और दूसरा तर्क है। दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

स्थापना  : कविता का अंतिम लक्ष्य जगत् के मार्मिक पक्षों का प्रत्यक्षीकरण करके उनके साथ मनुष्य हृदय का सामंजस्य स्थापन है।
तर्क : केवल मनोरंजन करना कविता का उद्देश्य नहीं है।
विकल्पः

Correct Answer: (c) (A) सही (R) सही
Solution:

कथन (A) और (R) दोनों सही हैं क्योंकि कविता का अंतिम लक्ष्य जगत के मार्मिक पक्षों का प्रत्यक्षीकरण करके उनके साथ मनुष्य हृदय का सामंजस्य स्थापन करना होता है जबकि दिया गया तर्क 'केवल मनोरंजन करना कविता का उद्देश्य नहीं है। बल्कि कविता का उद्देश्य सही है मार्मिक उपदेश देना होना चाहिए।

93. निर्देशः प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमे से एक स्थापना है। और दूसरा तर्क है। दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए :

स्थापना : उन्नीसवीं शताब्दी का नवजागरण भक्तिकालीन लोकजागरण से भिन्न इस बात में है कि वह उपनिवेशवादी दौर की उपज है।
तर्क  : उनकी ऐतिहासिक अन्तर्वस्तु एक समान है।
विकल्पः

Correct Answer: (d) (A)सही (R) गलत
Solution:

इसमें कथन (A) सही है जबकि (R) पूर्णतः गलत है। उन्नीसवीं शताब्दी का नवजागरण भक्तिकालीन लोकजागरण से भित्र इस बात में है कि वह उपनिवेशवादी दौर की उपज है। स्थापना के सम्बन्ध में दिया गया कथन सही है। जबकि दिया गया तर्क 'उनकी ऐतिहासिक अन्तर्वस्तु एक समान है।' सही नहीं है।

94. निर्देशः प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना है। और दूसरा तर्क है। दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

स्थापना  : कला का आस्वाद युग निरपेक्ष नहीं होता।
तर्क  : शाश्वतता का गुण कालजयी कलाकृतियों में सहज अन्तर्भूत नहीं होता।
विकल्पः 

Correct Answer: (b) (A) गलत (R) गलत
Solution:

उपर्युक्त कथन और कारण दोनों गलत हैं। इसका सही रूप है- कला का आस्वाद युग निरपेक्ष होता है क्योंकि कला में युग का प्रभाव स्पष्ट रूप से पड़ता है साथ ही साथ शाश्वता का गुण कालजयी कलाकृतियों में सहज अन्तर्भूत होता है।

95. निर्देशः प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना है। और दूसरा तर्क है। दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

स्थापना  : यूरोपीय साहित्य मीमांसा में कल्पना को बहुत प्रधानता दी गई है।
तर्क  : कल्पना काव्य का अनिवार्य साध्य है।
विकल्पः

Correct Answer: (c) (A) सही (R) गलत
Solution:उपर्युक्त कथन में (A) सही है जबकी (R) गलत है। यूरोपीय साहित्य मीमांसा में कल्पना को बहुत प्रधानता दी गई है। स्थापना के सम्बन्ध में कथन सही है जबकि दिया गया तर्क 'कल्पना काव्य का अनिवार्य साध्य है' सही नहीं हैं, बल्कि कल्पना काव्य का अनिवार्य साधन होती है।

96. उपर्युक्त अनुच्छेद के सन्दर्भ में काव्य-मनीषियों की दृष्टि से समन्वयात्मक होने का आधार क्या है?

भारतीय काव्य-मनीषियों ने काव्य की वस्तु के साथ ही उसके अर्थ की सीमा का अन्वेषण भी किया है। काव्य की अर्थव्याप्ति समूचे मानवलोक में होती है। काव्य का संबंध उस अर्थ से है जिसमें कल्पना और सौंदर्य का आधार होता है। राजशेखर ने कल्पना को स्वीकार करते हुए कहा है कि काव्य के कर्ताओं को वस्तुओं का स्वरूप जैसा प्रतिभासित होता है उसका वर्णन वे उसी रूप में करते हैं। काव्य और दर्शन तथा काव्य और विज्ञान में भी अंतर होता है।

काव्य का सत्य विज्ञान के सत्य से भिन्न है। क्योंकि काव्य का सत्य तथ्यात्मक नहीं अनुभूत्यात्मक होता है और यह अनिवार्य रूप से मानवकल्याण का साधन भी है। काव्य में असत्य नामक वस्तु की कोई सत्ता संभव नहीं है बल्कि उसमें वर्णित वस्तुओं की अपनी एक विशिष्ट सत्ता होती है। काव्य की वस्तु कवि की निजी अनुभूति पर आधारित है। वस्तुतः काव्य में सत्याभास के समान प्रतीत अर्थवाद ही होता है जिसके आधार पर काव्य की वस्तु को असत्य नहीं कहा जा सकता है।

राजशेखर के अनुसार काव्य में शिव के साथ अशिव के समावेश का कारण यह है कि कवि लोक की यात्रा करता है और सुंदर के साथ असुंदर का चित्रण सुंदर की महत्ता को प्रतिपादित करने के लिए ही करता है। काव्य में सुंदर के साथ असुंदर, शिव के साथ अशिव और सत्य के साथ असत्य का समावेश करता है। अतएव असुंदर का अशिव का चित्रण सुंदर और शिव के संप्रेषण के लिए अनिवार्य है।

यह उपदेश निषेध रूप में होता है, विधेय रूप में नहीं, क्योंकि काव्य का मूल प्रयोजन सुंदर और शिव में अंतर्भूत है जो सत्य के रूप में ही व्यक्त होता है। आधुनिक काव्य में सौंदर्यबोध के नए व्यापक धरातल में सुंदर और असुंदर का समावेश किया गया है। प्राचीन काव्यशास्त्र में अर्थभिन्नता की दृष्टि से इसकी स्वीकृति इस तथ्य का प्रमाण है कि बदले हुए समसामयिक संदर्भ में भी इस काव्यदृष्टि में प्रासंगिकता समाप्त नहीं हुई है।

वस्तुतः काव्यमनीषियों की दृष्टि एकांगी न होकर समन्वयात्मक रही है जो उसकी प्रगतिशील दृष्टि का ही प्रतीक है। यह सत्य है कि इस दृष्टि का कारण मनोवैज्ञानिक यथार्थवाद न होकर आदर्शवादी दार्शनिकता ही है।

Correct Answer: (d) आदर्शवादी दार्शनिकता से जुड़ा होना
Solution:उपर्युक्त अनुच्छेद के सन्दर्भ में काव्य-मनीषियों की दृष्टि से समन्वयात्मक होने का आधार आदर्शवादी दार्शनिकता से जुड़ा होना है। आदर्शवादी दार्शनिकता से आशय आदर्श स्वरूप व आदर्श सत्ता को स्वीकार कर निरन्तर गतिशील रहना है।

97. उपर्युक्त अनुच्छेद के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

Correct Answer: (c) कवि क्योंकि लोक की यात्रा करता है, इसलिए सुंदर के साथ असुंदर का चित्रण संभव नहीं
Solution:

उपर्युक्त अनुच्छेद के संदर्भ में 'कवि क्योंकि लोक की यात्रा करता है इसलिए सुन्दर के साथ असुन्दर का चित्रण संभव नहीं, यह कथन सही नहीं हैं जबकि राजशेखर के अनुसार काव्य में सुन्दर के साथ असुंदर का समावेश रहता हैं। काव्य का मूल प्रयोजन सत्य के रूप में ही अभिव्यक्त होता है। अशिव का चित्रण शिव के चित्रण के लिए अनिवार्य है।

98. उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार काव्य-मनीषियों की प्रगतिशील दृष्टि का आधार क्या है?

Correct Answer: (b) समन्वयात्मक दृष्टि को अपनाना
Solution:उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार काव्य-मनीषियों की प्रगतिशील दृष्टि का आधार एकांगी न होकर समन्वयात्मक दृष्टि को अपनाना है। शेष विकल्प सही नहीं है।

99. उपर्युक्त अनुच्छेद के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौनसा कथन सही है?

Correct Answer: (d) काव्य का सत्य अनुभूतिपरक है।
Solution:उपर्युक्त अनुच्छेद में काव्य का सत्य विज्ञान के सत्य से भिन्न है क्योंकि काव्य का सत्य अनुभूतिपरक होता है और यह अनिवार्य रूप से मानवकल्याण का साधन भी है। काव्य में सिर्फ सत्य की सत्ता स्थापित होती है।

100. उपर्युक्त अनुच्छेद के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

Correct Answer: (c) काव्य के कर्ता वस्तुओं का वर्णन उसी रूप में नहीं करते जैसा उन्हें प्रतिभासित होता है।
Solution:

'काव्य के कर्ता वस्तुओं का वर्णन उसी रूप में नहीं करते जैसे उन्हे प्रतिभाषित होता है।' उपर्युक्त अनुच्छेद के सन्दर्भ में कथन सही नहीं है। जबकि अन्य कथन सही है, जो इस प्रकार हैं- भारतीय काव्य- मनीषियों ने काव्य की वस्तु के साथ ही उसके अर्थ की सीमा का अन्वेषण भी किया है।
• काव्य की अर्थव्याप्ति समूचे मानवलोक में होती है।
• काव्य का संबंध उस अर्थ से है जिसमें कल्पना और सौन्दर्य का आधार होता हैं।