यू.जी.सी. एनटीए नेट परीक्षा जून-2019 (हिन्दी) Shift-II

Total Questions: 100

31. रस की प्रस्तुति के लिए 'तगुपतानुसंधान' शब्द का प्रयोग किस आचार्य ने किया?

Correct Answer: (c) भट्ट लोल्लट
Solution:उत्पत्तिवाद के प्रवर्तक भट्ट लोल्लट ने रस की प्रस्तुति के लिए तद्रुपतानुसंधान शब्द का प्रयोग किया। इनका रस सिद्धांत मीमांसा दर्शन पर आधारित है। इनके अनुसार रस की अवस्थिति मूलतः अनुकार्य अर्थात ऐतिहासिक पात्र रामादि में होती है तथा गौण रूप में अनुकर्ता में भी। निम्नलिखित रस सूत्र और उनके व्याख्याकार इस प्रकार हैं।
रससूत्रव्याख्याकार
उत्पत्तिवाद- भट्टलोल्लट
अनुमितिवाद- शंकुक
भुक्तिवाद- भट्ट नायक
अभिव्यक्तिवाद- अभिनव गुप्त

32. "तुलसी की विलक्षण प्रतिभा इस बात में है कि उन्होंने भक्त और रचनाकार की भूमिकाओं का एक साथ सफल निर्वाह किया है। भक्त मूलतः दैवी शक्ति के किसी स्वरूप में आस्था रखता है जबकि रचनाकार अपनी आस्तिकता नास्तिकता के बाद एक मूलतः ऐहिक या कि धर्मनिरपेक्ष कर्म में प्रवृत्त होता है।"

तुलसीदास के विषय में उपर्युक्त कथन किस साहित्यकार का है?

Correct Answer: (a) रामस्वरूप चतुर्वेदी
Solution:तुलसीदास के विषय में उपर्युक्त कथन रामस्वरूप चतुर्वेदी का है। तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की रचना (सं. 1631 वि.) को किया जिसमें 2 वर्ष 7 माह 26 दिन का समय लगा। इस काव्य को लोकमंगल की साधनावस्था का काव्य कहा गया, इसमें 7 काण्ड हैं। (1) बालकाण्ड (2) अयोध्याकाण्ड (3) अरण्यकाण्ड (4) किष्किंधाकाण्ड (5) सुन्दरकाण्ड (6) लंकाकाण्ड (7) उत्तरकाण्ड । अयोध्याकाण्ड मानस का हृदयस्थल है। तुलसीदास की प्रामाणिक रचनाएँ- गीतावली, दोहावली, कृष्ण गीतावली, रामचरितमानस, रामलला नहछू, विनयपत्रिका, जानकी मंगल, पार्वती मंगल, कवितावली, वैराग्य संदीपनी, बरवै रामायण, रामाज्ञा प्रश्न, हनुमानबाहुक

33. "किसी बात का टोटा होने पर उसे पूरा करने की इच्छा होती है, दुःख होने पर उसे मिटाना चाहते हैं। यह स्वभाव है।"

उपर्युक्त कथन किस निबन्ध से उद्भुत है?

Correct Answer: (c) कछुआ धर्म (चन्द्रधर शर्मा गुलेरी)
Solution:उपर्युक्त कथन चन्द्रधर शर्मा गुलेरी द्वारा रचित 'कछुआ धर्म' निबन्ध से उद्धृत है। भावात्मक निबंधकार चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी' जी ने 'कछुआ धर्म' और 'मारेसि मोहि कुठाव' शीर्षक से निबन्ध लेखन का कार्य किया। कुबेरनाथ जी के महत्वपूर्ण निबन्ध- प्रिया नीलकण्ठी (1968 ई.), रस आखेटक (1970 ई.), विषाद योग (1973 ई.), निषाद बॉसुरी (1974 ई.) कामधेनु (1980 ई.)। गुलाबराय जी के महत्वपूर्ण निबन्ध ठलुआ क्लब मेरी असफलताएँ कुछ उथले कुछ गहरे तथा रघुवीर सहाय जी का महत्वपूर्ण निबन्ध 'ताज' है।

34. निम्नलिखित में से किस आलोचक का संबंध मार्क्सवाद से है?

Correct Answer: (c) शिवदान सिंह चौहान
Solution:

हिन्दी के प्रथम मार्क्सवादी आलोचक शिवदान सिंह चौहान हैं इनके द्वारा रचित भारत में प्रगतिशील साहित्य की आवश्यकता (1937) शीर्षक निबन्ध को प्रथम मार्क्सवादी समीक्षा स्वीकार किया जाता है। इनकी प्रमुख रचनाएँ प्रगतिवाद (1946), साहित्य की परख (1946), हिन्दी साहित्य के अस्सी वर्ष (1954), साहित्यानुशीलन (1955), आलोचना के मान (1958), साहित्य की समस्याएँ (1958), नयी कविता का आत्मसंघर्ष (1964) आदि हैं। नंददुलारे वाजपेयी शुक्लोत्तर युग के तथा राम स्वरूप चतुर्वेदी नई समीक्षा युग के आलोचक हैं।

35. "हिंदी रंगमंच को हिंदीभाषी प्रदेश की सांस्कृतिक पूर्तियों और आकांक्षाओ का प्रतिनिधित्व करना होगा, रंगों और राशियों के हमारे विवेक को व्यक्त करना होगा।"

उपर्युक्त कथन निम्नलिखित में से किस नाटक की भूमिका से सम्बद्ध है?

Correct Answer: (c) आषाढ़ का एक दिन
Solution:उपर्युक्त कथन 'आषाढ़ का एक दिन' नाटक की भूमिका से सम्बद्ध है। निम्नलिखित रचनाओं के रचनाकार इस प्रकार हैं-
रचना/नाटक-रचनाकार/नाटककार
आगरा बाज़ार-हबीब तनवीर
एक और द्रोणाचार्य-शंकर शेष
आषाढ़ का एक दिन-मोहन राकेश
चन्द्रगुप्त-जयशंकर प्रसाद

36. 'तौलिया' मूलतः किस भाषा का शब्द है?

Correct Answer: (c) पुर्तगाली
Solution:'तौलिया' मूलतः पुर्तगाली भाषा का शब्द है। अन्य पुर्तगाली शब्द हैं-बाल्टी, तम्बाकू, मेज, गमला, काजू, चाभी, परात, पिस्तौल। अन्य भाषा के कुछ महत्वपूर्ण शब्द हैं-
अरबी शब्द- अमीर, अजायब, कबीर, औरत, औसत, आदमी, इस्तीफा, किताब, कुर्सी, किस्मत फारसी शब्द- हिन्दी, कबूतर, किशमिश, आवारा, गुलाब, जिन्दगी, चश्मा, पलंग, शादी, बीमार तुर्की शब्द - कैंची, दारोगा, तोप, उर्दू, कुर्ता, बारुद, मुगल
जापानी शब्द- रिक्सा
चीनी शब्द- चाय, लीची।

37. निम्नलिखित में से कौन-कौन सी रचनाएँ भारतीय प्रशासन व्यवस्था पर सटीक व्यंग्य करती है?

(A) भोलाराम का जीव (B) सिक्का बदल गया
(C) जामुन का पेड़ (D) पिता
नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिएः

Correct Answer: (a) (A) और (C)
Solution:

भारतीय प्रशासन व्यवस्था पर सटीक व्यंग्य करने वाली रचनाएँ हैं-
(A) भोलाराम का जीव (हरिशंकर परसाई)
(C) जामुन का पेड़ (कृष्ण चंदर)।
नोट- 'सिक्का बदल गया' कृष्णा सोबती की तथा 'पिता' ज्ञान रंजन की कहानी है।
हरिशंकर परसाई के व्यंग्यात्मक निबंध- पगडंडियों का जमाना
(1966 ई.), जैसे उनके दिन फिरे (1963), सदाचार की ताबीज
(1967), विकलांग श्रद्धा का दौर (1980), भूत के पाँव पीछे
(1982), सुनो भाई साधो (1983), तुलसीदास चंदन घिसे (1986)1
कृष्ण चंदर के उपन्यास हैं- एक गधे की आत्मकथा, एक गधा नेफा में, गद्दार, सपनों का कैदी, मिट्टी के सनम, रेत का महल, कागज की नाव ।

38. निम्नलिखित में से कौन-सी बोली राजस्थानी की नहीं है?

Correct Answer: (b) मडियाली
Solution:

'मडियाली' राजस्थानी की बोली नही है विवरण इस प्रकार है- शौरसेनी अपभ्रंश से निकली भाषायें- (1) पश्चिमी हिन्दी, (2) राजस्थानी, (3) पहाड़ी, (4)गुजराती।
राजस्थानी बोली के अन्तर्गत- (1) मेवाती, (2) मालवी, (3) जयपुरी ( ढाडी), (4) मारवाड़ी आती हैं।
पश्चिमी हिन्दी की बोलियाँ- (1) कौरवी (खड़ी बोली), (2) ब्रजभाषा, (3) हरियाणवी (बांगरू), (4) बुन्देली, (5) कन्नौजी ।

39. आनंदवर्धन ने किसे ध्वनि की आत्मा माना है?

Correct Answer: (c) रस ध्वनि
Solution:आनन्दवर्धन ने 'रस ध्वनि' को ध्वनि की आत्मा माना है। आनन्दवर्धन (9वीं शती का उत्तरार्द्ध) को ध्वनि सम्प्रदाय का प्रवर्तक माना जाता है। इन्होंने 'ध्वन्यालोक' नामक ग्रंथ की रचना की। ध्वनि को इन्होंने काव्य की आत्मा माना है। कुछ अन्य ध्यातव्य हैं-
सम्प्रदाय  प्रवर्तक  
अलंकार  भामह  
रीति वामन 
रस  भरतमुनि 
औचित्य  क्षेमेन्द्र 

40. "मर्यादा मत तोड़ो

तोड़ी हुई मर्यादा
कुचले हुए अजगरसी
गुंजलिका में कौरव वंश को लपेटकर
सूखी लकड़ी-सा तोड़ डालेगी।"
'अंधायुग' का उपर्युक्त संवाद किसका है?

Correct Answer: (d) विदुर
Solution:

उपर्युक्त संवाद अंधायुग (1955 ई.) के प्रमुख पात्र 'विदुर' का है। यह एक गीतिनाट्य है, इसके रचयिता धर्मवीर भारती हैं। इसका कथानक महाभारत युद्ध के अंतिम दिन पर आधारित है। इसमें युद्ध और उसके बाद की समस्याओं और मानवीय महत्वाकांक्षाओं को प्रस्तुत किया गया है। धर्मवीर भारती कृत प्रमुख नाटक हैं- ठेले पर हिमालय (1958 ई.), पश्यन्ती (1969). कहनी-अनकहनी (1970 ई.), कुछ चेहरे कुछ चिन्तन (1995). शब्दिता (1977), मानव मूल्य और साहित्य (1960 ई.)।