यू.जी.सी. एनटीए नेट परीक्षा जून-2019 (हिन्दी) Shift-II

Total Questions: 100

41. "पुनर्जागरण का भारतीय साहित्य में पहला प्रतिफलन माइकेल मधुसूदन दत्त के बांग्ला काव्य 'मेघनाथ वध' (1861) को माना गया है।"

उपर्युक्त कथन किस आलोचक का है?

Correct Answer: (d) रामस्वरूप चतुर्वेदी
Solution:'हिन्दी साहित्य और संवेदना का विकास' पुस्तक के लेखक रामस्वरूप चतुर्वेदी हैं। रामस्वरूप चतुर्वेदी जी की महत्वपूर्ण रचनाएँ हैं- हिन्दी नवलेखन (1960), भाषा और संवेदना (1964), अज्ञेय और आधुनिक रचना की समस्या (1968), हिन्दी साहित्य की अधुनातन प्रवृत्तियाँ (1969)।
रामचन्द्र शुक्ल की आलोचनात्मक कृतियाँ- गोस्वामी तुलसीदास (1923), जायसी ग्रन्थावली (1924), भ्रमर गीतसार (1925), रसमीमांसा (1949)।
हजारीप्रसाद द्विवेदी जी के आलोचनात्मक रचनाएँ- सूर साहित्य (1930), हिन्दी साहित्य की भूमिका (1940), कबीर (1941), कालिदास की लालित्य योजना (1965)।

42. निम्नलिखित में से नुक्कड़ नाटक के विषय में क्या सही नहीं है?

Correct Answer: (b) कला के लिए कला
Solution:

'कला के लिए कला' नुक्कड़ नाटक के विषय में सही नहीं है। नुक्कड़ नाटक एक ऐसी नाट्य विधा है, जो परंपरागत रंगमंचीय नाटकों से भिन्न है। यह रंगमंच पर नहीं खेला जाता तथा आमतौर पर इसकी रचना किसी एक लेखक द्वारा नहीं की जाती, बल्कि सामाजिक परिस्थितियों और संदर्भों से उपजे विषयों को इनके द्वारा उठा लिया जाता है। भारत में लोकप्रिय बनाने का श्रेय 'सफदर हाशमी' को है।

43. रामचंद्र शुक्ल के अनुसार रहीम के बारे में कौन-सी बातें सही है?

(A) संस्कृत, अरबी और फारसी के पूर्ण विद्वान थे।
(B) हिन्दी काव्य के उतने मर्मज्ञ कवि नहीं थे जितने फारसी के।
(C) उनकी दानशीलता हृदय की सच्ची प्रेरणा के रूप में थी।
(D) उनकी सभा विद्वानों और कवियों से सदा भरी रहती थी।
(E) जब इनसे कोई कुछ माँगने आता तब भी उन्हें अपनी दरिद्रता का अनुभव नहीं होता था। निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिएः

Correct Answer: (d) (A), (C) और (D)
Solution:रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार रहीम के बारे में निम्न बातें सही हैं-
(1) संस्कृत, अरबी और फारसी के पूर्ण विद्वान थे।
(2) उनकी दानशीलता हृदय की सच्ची प्रेरणा के रूप में थी।
(3) उनकी सभा विद्वानों और कवियों से सदा भरी रहती थी।
रहीम की रचनाएँ- बरवै नायिका भेद (अवधी भाषा) रास पंचाध्यायी, श्रृंगार सोरठा, मदनाष्टक (आठ छंदों की एक स्वतंत्र रचना) खेट कौतुकम (ज्योतिष ग्रंथ हैं)।

44. सुजान की उपेक्षा से विराग उत्पन्न होने के बाद रीतिकालीन कवि घनानन्द वृंदावन जाकर किस सम्प्रदाय के वैष्णव हो गए थे?

Correct Answer: (b) निम्बार्क संप्रदाय के
Solution:

घनानंद रीतिमुक्त धारा के श्रृंगारी कवि हैं, ये दिल्ली के मुगल बादशाह मुहम्मद शाह रंगीले के मीर मुंशी थे। दिल्ली से निकाले जाने के पश्चात् ये वृंदावन आकर निम्बार्क सम्प्रदाय में दीक्षित हो गए।
आचार्य शुक्ल ने घनानन्द को साक्षात् रसमूर्ति कहा है। इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- सुजान सागर, विरह लीला, कोकसार, रसकेलिवल्ली, कृपाकंद, इश्कलता आदि।

45. निम्नलिखित रचनाओं को उनके रचानाकारों के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची-I (रचनाएँ)सूची-II (रचनाकार)
(A) काव्य प्रकाश(i) देव
(B) रसराज(ii) भिखारीदास
(C) रसविलास(iii) रसलीन
(D) रस सारांश(iv) चिन्तामणि
(v) मतिराम

निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिएः

Correct Answer: (a) (A)-(iv); (B)-(v); (C)-(i); (D)-(ii)
Solution:रचनाओं एवं रचनाकारों का सही सुमेल इस प्रकार है-
रचनाएँरचनाकार
काव्य प्रकाश- चिन्तामणि
रसराज- मतिराम
रसविलास- देव
रस सारांश- भिखारी दास
रस प्रबोध- रसलीन

46. 'सखि! पिया को जो मैं न देखें,

तो कैसे का अंधेरी रतियाँ'
उपर्युक्त काव्य पंक्तियाँ किस कवि की हैं?

Correct Answer: (c) अमीर खुसरो
Solution:

प्रश्नोक्त पक्तियाँ खड़ी बोली के प्रथम प्रयोक्ता आदिकालीन कवि अमीर खुसरो की हैं। अमीर खुसरो हिन्दी खड़ीबोली के प्रथम कवि के रूप में माने जाते हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- खालिकबारी, दीवाने हिन्दवी, हालात ए कन्हैया, मुकरियाँ, दो सुखने, गजल । इन्होंने सितार और तबला का आविष्कार किया। प्रसिद्ध संगीतज्ञ तथा हज़रत निजामुद्दीन औलिया के परम शिष्य थे। विद्यापति की उपाधियाँ 'मैथिल कोकिल कविशेखर, अभिनव जयदेव, आदि हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- कीर्तिलता, कीर्ति पताका, गोरक्ष विजय ।

47. 'दोनों का हठ था दुर्निवार, दोनों ही थे विश्वासहीन 'कामायनी' की उपर्युक्त पंक्ति से क्या आशय है?

Correct Answer: (c) देव और दानव दोनों हठी और विश्वासहीन थे।
Solution:

'दोनों का हठ था दुर्निवार, दोनों ही थे विश्वासहीन' 'कामायनी' की उपर्युक्त पंक्ति से आशय है- 'देव और दानव दोनों हठी और विश्वासहीन थे।' 'कामायनी' छायावाद के पुरस्कर्ता जयशंकर प्रसाद का भाव प्रधान महाकाव्य है। कामायनी (1935) मंगला प्रसाद पारितोषक से पुरस्कृत रचना है। कामायनी में 15 सर्ग हैं जिनका विवरण इस प्रकार है- (1) चिन्ता, (2) आशा, (3) श्रद्धा, (4) काम, (5) वासना, (6) लज्जा, (7) कर्म, (8) ईर्ष्या, (9) इड़ा, (10) स्वप्न, (11) संघर्ष, (12) निर्वेद, (13) दर्शन, (14) रहस्य, (15) आनन्द । आचार्य शांतिप्रिय द्विवेदी ने कामायनी को छायावाद का उपनिषद कहा है।

48. 'इश्क भरा है देख ले और जगत् से दूर

एक अचम्भा हमने देखा देहरी का नासूर।'
अमीर खुसरो की उपयुक्त पहेली से क्या अभिप्राय है?

Correct Answer: (b) कुआँ
Solution:

अमीर खुसरो की उपर्युक्त पहेली का अभिप्राय 'कुआँ है। अमीर खुसरो की महत्वपूर्ण पहेलियाँ - (i) “एक थाल मोती से भरा, सबके सिर पर औंधाधरा । चारों ओर वह थाली फिरे, मोती उससे एक न गिरे ।।" - आकाश
(ii) "एक नार ने अचरज किया। साँप मारि पिजड़े में दिया। जों जो साँप ताल को खाए। सूखे ताल साँप मर जाए।।" - दीपक
(iii) "अरथ ते इसका बूझेगा। मुँह देखो तो सूझेगा।। - दर्पण इनके द्वारा रचित ग्रंथ - (i) खालिक बारी, (ii) पहेलियाँ, (iii) मुकरियाँ, (iv) दो सुखने, (v) गजल आदि।

49. आचार्य भरत ने काव्य दोषों की संख्या कितनी मानी है?

Correct Answer: (d) 10
Solution:

भरतमुनि के अनुसार 10 काव्य दोष हैं। जो इस प्रकार हैं- (1) गूढ़ार्थ, (2) अर्थान्तर, (3) अर्थहीन, (4) भिन्नार्थ, (5) एकार्थ, (6) अभिलुप्तार्थ, (7) न्यायावेत, (8) विषम, (9) विसंधि, (10) शब्दच्युति । मम्मट ने 3 प्रकार के काव्यदोष माने हैं- (1) शब्द कोष, (2) अर्थदोष, (3) रस दोष । भामह ने 3 प्रकार के काव्य दोष माने हैं- (1) सामान्य दोष, (2) वाणी दोष (3) अन्य दोष

50. जन्म-काल के अनुसार निम्नलिखित रचनाकारों का सही अनुक्रम क्या है?

Correct Answer: (c) सूरदास, जायसी, तुलसी, रहीम
Solution:जन्म काल के अनुसार दिये गये रचनाकारों का सही अनुक्रम है- सूरदास, जायसी, तुलसी, रहीम। सम्बन्धित विवरण इस प्रकार है-
रचनाकारजन्मवर्ष
सूरदास1478 ई.
मलिक मुहम्मद जायसी1492 ई.
गोस्वामी तुलसीदास1532 ई.
रहीम दास1556 ई.