यू.जी.सी. NTAनेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2021/जून 2022 (हिन्दी) Shift-I

Total Questions: 40

11. प्रकाशन वर्ष की दृष्टि से निम्नलिखित नाटकों का सही अनुक्रम है:

A. बकरी
B. कबिरा खड़ा बाजार में
C. मादा कैक्टस
D. कोणार्क
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) D, C, А, В
Solution:प्रकाशन वर्ष की दृष्टि से नाटकों का सही अनुक्रम निम्न है-
नाटक-प्रकाशन वर्ष
कोणार्क-1951 ई.
मादा कैक्टस-1959 ई.
बकरी-1974 ई.
कबिरा खड़ा बाजार में-1981 ई.

12. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (R) के रूप मेंः

अभिकथन (A) : आज की विषम और संकटपूर्ण स्थिति में व्यक्ति अपनी असहायता और अकेलेपन में निर्णय नहीं ले पाता और ले भी पाता है तो उसकी परिणति अर्थहीनता में होती है। कारण (R) : क्योंकि आधुनिक काल में मशीनीकरण के वर्चस्व के कारण व्यक्ति की पहचान खो गयी है। उपरोक्त कथनों के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
Solution:उपरोक्त कथन (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या है।

13. निम्नलिखित में से यह कथन - 'सा काव्यघटनानुकूल शब्दोपस्थितिः' - किसका है?

Correct Answer: (c) जगन्नाथ
Solution:'सा काव्य घटनानुकूल शब्दोपस्थितः' कथन आचार्य जगन्नाथ का है। निम्नलिखित आचार्य एवं उनके कथन -
आचार्य-काव्य लक्षण
वामन-काव्य शब्दोऽयं गुणालंकार संस्कृतयोः शब्दार्थयोः वर्तते।
कुन्तक-शब्दार्थों सहितौ वक्र कवि व्यापार शालिनी। बन्धे व्यवस्थितौ काव्यं तद्विदाह्लादकारिणी
रूद्रट-ननु शब्दार्थौ काव्यम्।

14. पद्माकर भट्ट के बारे में रामचन्द्र शुक्ल का विचार है:

A. ऐसा सर्वप्रिय कवि इस काल के भीतर बिहारी को छोड़ दूसरा नहीं हुआ।
B. परन्तु पद्माकर की कल्पना दृष्टि बिहारी से कमतर थी।
C. पद्माकर की रमणीयता ही सर्वप्रियता का एकमात्र कारण है।
D. पद्माकर की भाषा कड़कती होते हुए भी कबीर जैसी नहीं है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल A और C
Solution:

प‌द्माकर भट्ट के बारे में रामचन्द्र शुक्ल का विचार है। कि "ऐसा सर्वप्रिय कवि इस काल के भीतर बिहारी को छोड़कर दूसरा नहीं हुआ क्योंकि प‌द्माकर की रमणीयता ही सर्वप्रियता का एक मात्र कारण है।

15. 'आषाढ़ का एक दिन' "राज्याश्रय और व्यक्ति- स्वातन्त्र्य के बीच भटकती हुई सर्जनात्मकता का नाटयबिंब है।" यह कथन किस आलोचक का है?

Correct Answer: (b) बच्चन सिंह
Solution:"अषाढ़ का एक दिन राज्याश्रय और व्यक्ति स्वातन्त्र्य के बीच भटकती हुई सर्जनात्मकता का नाट्यबिम्ब है।" यह कथन बच्चन सिंह का है। बच्चन सिंह द्वारा लिखित आलोचनात्मक कृतियां है- हिन्दी नाटक, बिहारी का नया मूल्यांकन, आलोचक और आलोचना, आधुनिक हिन्दी साहित्य का इतिहास, आधुनिक हिन्दी आलोचना के बीज शब्द आदि।

16. कोमल कपोल पाली में सीधी सादी स्मित रेखा जानेगा वही कुटिलता जिसने भौं में बल देखा।

उपर्युक्त छंद से संबंधित सही तथ्य हैं:
A. कपोल-सागर के तट पर मुस्कान रुपी नाव तैर रही है।
B. भौंहो की कुहुटिलता से प्रेमिका के कुटिल हृदय का पता चलात है।
C. भौंहो की कुटिलता से अनुराग सूचित हो रहा है।
D. यह अनुराग गालों पर फैली मुस्कान से व्यक्त हो रहा है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) केवल C और D
Solution:कोमल कपोल पाली में सीधी सादी स्मित रेखा जानेगा वही कुटिलता जिसने भौ में बल देखा। उपर्युक्त छंद से सम्बन्धित सही तथ्य है- भौंहो की कुटिलता से अनुराग सूचित हो रहा है, तथा यह अनुराग गालों में फैली मुस्कान से व्यक्त हो रहा है।

17. 'फिर विकल हैं प्राण मेरे' गीत के निहितार्थ हैं:

A. स्त्री आगे बढ़ने के लिए पुरुष का संबल चाहती है।
B. अपनी सीमित दुनिया के घेरे को तोड़कर स्त्री अनदेखी - अनजनी दुनिया को देखना चाहती है।
C. अपनी यात्रा के तिमिराच्छन्न हो जाने की कल्पना करके स्त्री अकेले यात्रा आरंभ करना नहीं चाहती।
D. स्त्री ने अपना लक्ष्य निर्धारित कर लिया है और वह आगे बढ़ने के लिए व्यग्र है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल B और D
Solution:

फिर विकल प्राण मेरे गीत के निहतार्थ हैं- अपनी सीमित दुनिया के घेरे को तोड़कर स्त्री अनदेखी अनजानी दुनिया को देखना चाहती है तथा स्त्री ने अपना लक्ष्य निर्धारित कर लिया है और वह आगे बढ़ने के लिए व्यय है। 'फिर विकल है' प्राण मेरे' गीत की लेखिका महादेवी वर्मा हैं। महादेवी वर्मा छायावाद युग की लेखिका हैं। इनके प्रमुख कविता संग्रह हैं- नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, अग्निरेखा, दीपशिखा, सप्तपर्णा आदि।

18. 'उदासी सम्प्रदाय के प्रवर्तक थेः

Correct Answer: (b) श्रीचन्द
Solution:

'उदासी सम्प्रदाय' के प्रवर्तक गुरु नानक के पुत्र श्री चन्द थे। इस सम्प्रदाय के लोग सनातन धर्म को मानते हैं तथा पंच प्रकृति (जल, अग्नि, पृथ्वी, वायु, आकाश) की पूजा करते हैं। जबकि लक्ष्मीचन्द तथा मलूकदास संत कवि हैं।

19. संस्मरण की पुस्तकें हैं :

Correct Answer: (c) केवल A और C
Solution:'नंगा तलाई का गाँव', आछे दिन पाछे गये', संस्मरण की पुस्तकें हैं। 'नंगातलाई का गाँव' (2004 ई.) संस्मरणात्मक कृति के लेखक विश्वनाथ त्रिपाठी है। इनकी अन्य संस्मरणात्मक कृति है। व्योमकेश दरवेश (2010) गंगा स्नान करने चलोगे (2012)। 'आछे दिन पाछे गये' (2004 ई.) संस्मरणात्मक कृति के लेखक 'काशीनाथ सिंह' हैं। इनके अन्य संस्मरणात्मक कृति हैं- घर का जोगी जोगड़ा (2006), याद हो कि न याद हो (1992)। जबकि ऋण जल धनजल' तथा वे लड़ेगें हजार साल' रिपोर्ताज विधा की रचनाएं हैं। 'ऋण जल धन जल' रिपोर्ताज के लेखक फणीश्वर नाथ रेणु हैं तथा 'वे लड़ेंगे हजार साल' रिपोर्ताज के लेखक शिव सागर मिश्र हैं।

20. 'रामचरित मानस' के अंत में कही गई तुलसीदास की कौन-सी बातें सही हैं?

A. मेरे समान कोई दूसरा दीन नहीं है, इसलिए हे राम, मेरी भवबाधा को दूर करो।
B.राम - कथा का गान वेदों, पुराणों और कवियों ने किया है, किन्तु संतों ने नहीं।
C. जो भक्त रामचरित मानस का अवगाहन कता है वह मध्याह के सूर्य की तरह प्रखर तेजवाला होता है।
D. जिस तरह कामी को स्त्री और लोभी को धन प्रिय है, उसी तरह हे राम, तुम हमेशा मुझे प्रिय लगो ।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) केवल A और D
Solution:

रामचरितमानस के अन्त में तुलसीदास द्वारा कही गयी सही बातें हैं। मेरे समान कोई दूसरा दीन नहीं है, इसलिए हे राम मेरी भव बाधा को दूर करो तथा जिस तरह कामी को स्त्री और लोभी को धन प्रिय है, उसी तरह हे राम, तुम हमेशा मुझे प्रिय लगो' । रामचरिमानस के लेखक तुलसीदास हैं तथा इसमें कुल सात काण्ड हैं। जो इस प्रकार हैं-बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्य काण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड, उत्तरकाण्ड ।