Solution:रामचरितमानस के अन्त में तुलसीदास द्वारा कही गयी सही बातें हैं। मेरे समान कोई दूसरा दीन नहीं है, इसलिए हे राम मेरी भव बाधा को दूर करो तथा जिस तरह कामी को स्त्री और लोभी को धन प्रिय है, उसी तरह हे राम, तुम हमेशा मुझे प्रिय लगो' । रामचरिमानस के लेखक तुलसीदास हैं तथा इसमें कुल सात काण्ड हैं। जो इस प्रकार हैं-बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्य काण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड, उत्तरकाण्ड ।