Solution:'सुखिया सब संसार है खाये अरु सोवै। दुखिया दास कबीर है जागे अरु रोवै।।" इस कविता का सही प्रतिपाद्य है कि कबीर को संसार की नश्वरता का बोध था, इसलिए उनमें इससे मुक्त होने की तड़प थी, दुनिया के लोग संसार की नश्वरता के बारे में जानते हुए भी बेपरवाह हैं। कबीरदास एक महान संत, समाज सुधारक, कवि थे। इनकी प्रमुख रचनाएं साखी, सबद तथा रमैनी है।