Solution:"काम मंगल से मंडित श्रेय, सर्ग इच्छा का है परिणाम, तिरस्कृत कर उसको तुम भूल बनाते हो असफल भव धाम" उपर्युक्त छंद प्रसाद द्वारा रचित 'कामायनी' (1935 ई.), महाकाव्य के श्रद्वा सर्ग से उद्धित है। इस महाकाव्य में 15 सर्ग हैं, जो निम्न हैं- चिंता, आशा, श्रद्धा, काम, वासना, लज्जा, कर्म, ईर्ष्या, इड़ा, स्वप्न, संघर्ष, निर्वेद, दर्शन, रहस्य, आनन्द ।