यू.जी.सी. NTAनेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2021/जून 2022 (हिन्दी) Shift-II

Total Questions: 100

31. निर्मल वर्मा द्वारा रचित कहानी नहीं है-

Correct Answer: (d) बादलों के घेरे में
Solution:

'बादलों के घेरे में, निर्मल वर्मा द्वारा रचित' कहानी नहीं है। 'बादलों के घेरे (1980 ई.), कहानी के लेखक कृष्णा सोबती है। जबकि अँधेरे में, दूसरी दुनिया तथा 'पिछली गर्मियों में निर्मल वर्मा द्वारा रचित कहानियां हैं। इनके द्वारा रचित अन्य कहानियां हैं- जलती झाड़ी (1965 ई.), बीच बहस में (1973 ई.), कत्वे और कालापानी (1983 ई.), परिन्दे (1960 ई.) आदि।

32. प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित उपन्यासों का सही अनुक्रम है-

(a) राग दरबारी (b) अंधेरे बंद कमरे (c) बाणभट्ट की आत्मकथा (d) मैला आंचल
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) C, D, B, A
Solution:प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित उपन्यासों का सही अनुक्रम हैं-
उपन्यासप्रकाशन वर्ष
बाणभट्ट की आत्मकथा1946 ई.
मैला आंचल1954 ई.
अंधेरे बन्द कमरे1961 ई.
रागदरबारी1968 ई.

33. "समस्त मानव जीवन के प्रवर्तक भाव या मनोविकार ही होते हैं, मनुष्य की प्रवृत्तियों की तह में अनेक प्रकार के भाव ही प्रेरक के रूप में पाए जाते हैं। शील या चरित्र का मूल भी भावों के विशेष प्रकार के संगठन में ही समझना चाहिए।"

उपर्युक्त पंक्तियाँ किस निबंध से उद्धृत हैं?

Correct Answer: (b) भाव या मनोविकार
Solution:"समस्त मानव जीवन ........ समझना चाहिए। उपर्युक्त पंक्तियां भाव एवं मनोविकार निबन्ध से उद्धृत है। 'भाव एवं मनोविकार निबंध के लेखक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हैं। यह निबन्ध चिन्तामाणि (भाग-1) में संकलित हैं। शुक्ल जी द्वारा रचित अन्य निबन्ध हैं- उत्साह, श्रद्वा और भक्ति, करूणा, लज्जा और ग्लानि, लोभ और प्रीति, घृणा, ईर्ष्या, भय, क्रोध, कविता क्या है आदि। जबकि 'मनुष्य ही साहित्य का लक्ष्य है' निबन्ध के लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी तथा 'तुम चन्दन हम पानी' निबन्ध के लेखक विद्यानिवास मिश्र है।

34. "जेहि न मित्र, दुख होहि दुखारी

तिन्हहि विलोकत पातक भारी"
उपर्युक्त चौपाई का सही अर्थ है-
(A) जो मित्रों के दुख से दुखी नहीं होता उसे देखना भी पाप है।
(B) मित्रों के दुख से दुखी होना उचित होते हुए भी जरूरी नहीं है।
(C) मित्रता ऐसी हो जिसमें लाभ हानि की भावना छिपी हो।
(D) मित्रता का निर्वहन न करने वाले को देखना भी पाप है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल A और D
Solution:'जेहि न मित्र, दुख होहि दुखारी
तिन्हहि विलोकत पातक भारी।"
उपर्युक्त चौपाई का सही अर्थ है जो मित्रों के दुःख से दुखी नहीं होता, उसे देखना भी पाप है और मित्रता का निर्वहन न करने वाले को देखना भी पाप है। उक्त चौपाई तुलसीदास कृत रामचरित मानस से उद्धृत है।

35. शाब्दी व्यंजना के प्रकार हैं-

(A) आर्थी व्यंजना
(B) लक्षणामूला
(C) अभिधामूला
(D) लक्ष्य संभवा
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल B और C
Solution:शाब्दी मूला व्यंजना के दो भेद हैं-
1. अमिधा मूला 2. लक्षणा मूला
अभिधा मूला शाब्दी व्यंजनाः अभिधा शब्द शक्ति द्वारा अनेकार्थी शब्द में एक अर्थ निश्चित हो जाने पर जिस शक्ति के द्वारा अन्यार्थ का ज्ञान होता है, उसे अभिधा मूलाशाब्दी व्यंजना कहते हैं। जैसे:- चिरजीवौ जोरी जुरै, क्यों न सनेह गम्भीर । को घटि ये वृषभानुजा, वे हलधर के वीर ।। लक्षणा मूला शाब्दी व्यंजनाः जहाँ मुख्यार्थ की बाधा होने पर लक्षणा शक्ति से अन्य अर्थ निकलता है, परन्तु उसके बाद भी दूसरा अर्थ प्राप्त होता है, वहाँ पर लक्षणा मूला शाब्दी व्यंजना होती है:
जैसे- फली सकल मन कामना, लूट्यौं अगणित चैन ।
आजु अँचै हरि रूप सखि, भये प्रफुल्लित नैन ।।

36. प्लेटो के निम्नलिखित ग्रंथों में आलोचनात्मक सामग्री की दृष्टि से कौन-सा ग्रंथ अधिक उपादेय नहीं है?

Correct Answer: (a) फिलेबुस
Solution:प्लेटो के ग्रंथो में आलोचनात्मक सामग्री की दृष्टि से 'फिलेबुस' ग्रंथ अधिक उपादेय नहीं है। जबकि फेद्रुस, इओन तथा रिपब्लिक आलोचनात्मक सामग्री की दृष्टि से उपादेय है।

37. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण के रूप में :

अभिकथन (A): स्त्री संस्कृति में स्त्री पाठ का विवेचन - विश्लेषण आवश्यक है।
कारण (R): क्योंकि स्त्री, संस्कृति पितृ- सत्तात्मक संस्कृति से भिन्न अभिधान है।
उपरोक्त कथनों के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
Solution:

अभिकथन (A) स्त्री संस्कृति के संदर्भ में स्त्री पाठ का विवेचन-विश्लेषण आवश्यक है। कारण (R) क्योंकि स्त्री-संस्कृति पितृ सत्तात्मक संस्कृति से भिन्न अभिधान है। उपर्युक्त कथनों के आलोक में कथन (A) और (R) सही है और (R), (A) की सही व्याख्या है।

38. "नीरव मुरली, कलरव चुप अलि कुल थे बन्द नलिन में कालिन्दी बही प्रणय की इस तममय हृदय पुलिन में।" उपर्युक्त छंद से संबंधित सही भाव हैं-

(A) दुखी और अंधकारमय हृदय में प्रेम की कालिन्दी प्रवाहित हो उठी।
(B) प्रेम में आबद्ध व्यक्ति परम शांति और सुख का अनुभव कर रहा है।
(C) दुखी हृदय में व्याप्त अंधेरे को प्रेम की यमुना भी नहीं बहा सकी।
(D) बाँसुरी के स्वर मौन थे, इसलिए भौरे भी गुंजार नहीं कर रहे थे।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल A और B
Solution:

"नीरव मुरली, कलरव चुप अलि कुल थे बन्द नलिन में कालिन्दी बही प्रणय की इस तममय हृदय पुलिन में।" उपर्युक्त छन्द से सम्बन्धित सही भाव है- दुःखी और अंधकारमय हृदय में प्रेम की कालिन्दी प्रवाहित हो उठी और प्रेम में आबद्ध व्यक्ति परम शांति और सुख का अनुभव कर रहा है। उक्त छन्द जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित 'आँसू' काव्य से उद्धृत है।

39. सूची- I को सूची- II से सुमेलित कीजिए :

सूची - Iसूची - II
A. मैं तुम्हारे हाथ का लीला-कमल हूँ, प्राण के सर में उतरना चाहता हूँ।I. धूमिल
B. वे इस कदर पस्त हैं: कि तटस्थ हैं।II. मुक्तिबोध
C. क्योंकि बहना रेत होना है। हम बहेंगे तो रहेंगे ही नहीं।III. रामधारी सिंह दिनकर
D. सब चुप/साहित्यिक चुप और कविजन निर्वाक/चिंतक, शिल्पकार, नर्तक चुप हैं .......IV. अज्ञेय

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए

Correct Answer: (b) A-III, B-I, C-IV, D-II
Solution:सूची-I तथा सूची- II का सही सुमेलन हैं-
सूची-Iसूची-II
मैं तुम्हारे हाथ का लीला-कमल हूँ।-रामधारी सिंह 'दिनकर'
वे इस कदर परस्त है: कि तटस्थ हैं।-धूमिल
क्योंकि बहना रेत होना है। हम बहेंगे तो रहेंगे ही नहीं।।-अज्ञेय
सब चुन/साहित्यिक चुप और कविजन निर्वाक/चिंतक, शिल्पकार, नर्तक चुप हैं........-मुक्तिबोध

40. यह कथन 'शक्ति, व्युप्तत्ति और अभ्यास समन्वित रुप में काव्यहेतु हैं' -निम्नलिखित में से किसका है?

Correct Answer: (b) मम्मट
Solution:"शक्ति व्युत्पत्ति और अभ्यास समन्वित रूप में काव्य हेतु हैं", यह कथन 'मम्मट' का है। निम्नलिखित आचार्यों के काव्य हेतु के सम्बन्ध में कथन-
कथनआचार्य
प्रतिभा, शास्त्र ज्ञान (व्युत्पत्ति) और अभ्यास तीनों के सम्मिलित रूप को काव्य हेतु माना है।दण्डी
प्रतिभा काव्य का हेतु है। व्युत्पत्ति और अभ्यास प्रतिभा के संस्कार हैं।हेमचन्द्र