यू.जी.सी. NTAनेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2021/जून 2022 (हिन्दी) Shift-II

Total Questions: 100

71. "विजय तृष्णा का अंत पराभव में होता है, अलक्षेन्द्र! राजसत्ता सुव्यवस्था से बढ़े तो बढ़ सकती है, केवल विजय से नहीं।"

यह विचार 'चन्द्रगुप्त' के किस चरित्र का है?

Correct Answer: (b) दाण्ड्यायन
Solution:"विजय तृष्णा का अंत पराभव में होता है, अलन्द्र । राजसत्ता सुव्यवस्था से बढे तो बढ़ सकती है, केवल विजय से नहीं।" यह विचार चन्द्रगुप्त नाटक के पात्र दण्डायन का है। 'चन्दगुप्त' नाटक के लेखक जयशंकर प्रसाद है। इस नाटक के पुरुष पात्र हैं- चन्द्रगुप्त, चाणक्य, सिहरण, राक्षस, शकटार, आम्भीक, पर्वतक, सिल्यूकस तथा स्त्रीपात्र- कार्नेलिया, कल्याणी, एलिस, मालविका, अलका, सुवासिनी आदि।

72. 'निरख सखी ये खंजन आए, 'गीत से संबंधित तत्य हैं-

(A) मेरे प्रिय ने अयोध्या की ओर रुख करके मेरा ध्यान किया है,
(B) उर्मिला कहती है कि मेरे प्रिय ने मेरा ध्यान किया है, इसलिए कामदेव डरकर भाग गया है।
(C) उन्होंने मेरा ध्यान किया और मुस्कुराए, इसलिए यहाँ कमल खिल उठे हैं।
(D) मैंने भी ध्यान करके अपने हृदय दर्पण में प्रिय की छवि देख ली है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल A और C
Solution:'निरख सखी ये खंजन आए' गीत से सम्बन्धित तथ्य यह है कि उर्मिला कहती हैं मेरे प्रिय ने अयोध्या की ओर रुख करके मेरा ध्यान किया है, इसलिए उनके आंखो के प्रतीक खंजन यहाँ दिखाई देने लगे हैं तथा उन्होंने मेरा ध्यान किया और मुस्कुराए, इसलिए यहाँ कमल खिल उठे हैं। उक्त काव्य पंक्ति के रचयिता मैथिलीशरण गुप्त हैं। मैथिलीशरण गुप्त द्विवेदी युग के कवि हैं। गांधी जी ने इन्हें राष्ट्रकवि की उपाधि दी।

73. 'असाध्य-वीणा' साहित्य- साधना की संकेतक है।

प्रियंवद की तरह इसकी साधना में-

Correct Answer: (a) आत्मान्वेषण करना पड़ता है।
Solution:'असाध्य-वीणा' साहित्य साधना की संकेतक है। प्रियंवद की तरह इसकी साधना में आत्मान्वेषण करना पड़ता है। 'असाध्यवीणा' नामक काव्य के लेखक सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय' है। 'असाध्य वीणा' विसर्जन है। अज्ञेय द्वारा रचित अन्य कविताए हैं- कलकी बाजरे की, साँप, नदी के द्वीप, हरी घास पर क्षण भर, जितना तुम्हारा सच, शब्द और सत्य, यह दीप अकेला आदि।

74. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण के रूप में:

अभिकथन (A) : गैर रोमांटिक दौर में रोमानियत को एक गाली के रूप में प्रयुक्त किया जाता था।
कारण (R): क्योंकि वैयक्तिक अनुभूति के संस्पर्श के बिना उच्च स्तर की प्रेम कविताएं लिखी जा सकती हैं।
उपरोक्त कथनों के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) (A) सही है, लेकिन (R) सही नहीं है।
Solution:

अभिकथन (A): गैर रोमांटिक दौर में रोमानियत को एक गाली के रूप में प्रयुक्त किया जाता था। अभिकथन (A) सही है, जबकि कारण (R) क्योंकि वैयक्तिक अनुभूति के संस्पर्श के बिना उच्च स्तर की प्रेम कविताएँ लिखी जा सकती हैं कथन (A) के संदर्भ में कारण (R) सही नहीं है।

75. 'रत्नखान' के रचयिता हैं:

Correct Answer: (c) मलूकदास
Solution:

'रत्नखान' के रचयिता मलूकदास हैं। मलूकदास संत कवि हैं। इनके द्वारा रचित अन्य रचनाएं है- ज्ञानबोध, ज्ञानपरोक्षि, भक्तवच्छावली, भक्ति विवेक, बारह खड़ी, रामावतार लीला, ब्रजलीला,सुखसागर आदि। जबकि सुन्दर दास ज्ञान समुद्र, सुन्दर विलास नामक कृतियों की रचना की। नन्ददास तथा रसखान भक्त कवि हैं। नंददास द्वारा रचित कृतियां हैं-अनेकार्थी मंजरी, मानमंजरी, सुदामा चरित, रसमंजरी, रूपमंजरी, विरहमंजरी, रूक्मिणी मंगल, रसपंचाध्यायी आदि। रसखान द्वारा रचित कृतियां है- सुजान रसखान, प्रेमवाटिका, दानलीला अष्टयाम आदि ।

76. 'रत्नखान' के रचयिता मलूकदास हैं। मलूकदास संत कवि हैं। इनके द्वारा रचित अन्य रचनाएं है- ज्ञानबोध, ज्ञानपरोक्षि, भक्तवच्छावली, भक्ति विवेक, बारह खड़ी, रामावतार लीला, ब्रजलीला,सुखसागर आदि। जबकि सुन्दर दास ज्ञान समुद्र, सुन्दर विलास नामक कृतियों की रचना की। नन्ददास तथा रसखान भक्त कवि हैं। नंददास द्वारा रचित कृतियां हैं-अनेकार्थी मंजरी, मानमंजरी, सुदामा चरित, रसमंजरी, रूपमंजरी, विरहमंजरी, रूक्मिणी मंगल, रसपंचाध्यायी आदि। रसखान द्वारा रचित कृतियां है- सुजान रसखान, प्रेमवाटिका, दानलीला अष्टयाम आदि ।

उपर्युक्त पंक्तियाँ किस कहानी की प्रारंभिक पंक्तियां हैं?

Correct Answer: (a) एक टोकरी भर मिट्टी
Solution:

"किसी श्रीमान जमीदार के महल के पास एक गरीब अनाथ विधवा की झोपड़ी थी। जमींदार को अपने महल का हाता उस झोपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई।" उपर्युक्त पंक्तियां 'एक टोकरी भर मिट्टी' की प्रारंभिक पंक्तियां हैं। 'एक टोकरी भर मिट्टी (1901 ई.)' कहानी के लेखक माधवराव सप्रे है। देवी प्रसाद वर्मा ने इसे हिन्दी का प्रथम कहानी माना है। जबकि 'पूस की रात', 'ठाकुर का कुआ'मुंशी प्रेमचन्द द्वारा रचित कहानी है। 'संवदिया' फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा रचित कहानी है। इस कहानी पर फिल्म भी बन चुकी है।

77. 'हिंदी साहित्य का इतिहास दर्शन' के लेखक हैं-

Correct Answer: (b) नलिन विलोचन शर्मा
Solution:

'हिन्दी साहित्य का इतिहास दर्शन" के लेखक नलिन विलोचन शर्मा है। नलिन विलोचन शर्मा पटना विश्वविद्यालय हिन्दी के प्राध्यापक एवं आलोचक थे। ये हिन्दी में 'नकेनवाद' आन्दोलन के तीन पुरस्कर्ताओं में एक थे। दिये गये अन्य विकल्पों लेखकों के इतिहास ग्रंथ निम्न हैं।

78. भारतेन्दु हरिश्चंद्र की रचनाएं नहीं हैं:

(A) सतसई सिंगार
(B) प्रेम माधुरी
(C) उमर खैयाम की रुबाइयाँ
(D) जार्ज वन्दना
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) केवल C और D
Solution:

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की रचनाएं उमर ख्याम की रूबाइयाँ तथा जार्जवन्दना नहीं है। 'उमर खैयाम की रूबाइयाँ' के लेखक हरिवंश राय बच्चन तथा 'जार्ज वंदना' के श्रीधर पाठक है। जबकि सतसई श्रृंगार तथा प्रेममाधुरी भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की रचनाएं है। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने 70 काव्य ग्रंथो की रचना की है। जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं-भक्ति सर्वस्व, प्रेम मालिका, कार्तिक स्नान, वैशाख माहात्म्य, प्रेम सरोवर, प्रेमतरंग, होली, वर्षाविनोद, प्रेम फुलवारी आदि।

79. 'ईदगाह' कहानी में 'मोहसिन' मेले से कौन सा खिलौना खरीदता है?

Correct Answer: (d) भिश्ती
Solution:'ईदगाह' कहानी में मोहसिन मेले में खिलौना 'भिश्ती' खरीदता है। 'ईदगाह' प्रेमचन्द्र की उर्दू में लिखी गयी कहानी है। यह प्रेमचन्द्र की सुप्रसिद्ध कहानियों में एक है। इसमें एक अनाथ बालक 'हामिद' की कहानी का मार्मिक चित्रण किया गया है। इस कहानी के प्रमुख पात्र हैं- अमीना, महमूद, मोहसिन, नूरे और सम्मी आदि। 'ईदगाह' कहानी में पात्रों द्वारा निम्न खिलौने खरीदे गये।
पात्रखिलौना
नूरेवकील
महमूदसिपाही
सम्मीधोबिन

80. रीति साहित्य के बारे में हजारीप्रसाद द्विवेदी का कथन है-

(A) रीति काव्य मादक कविता का साहित्य है।
(B) रीति कविताएं पाठकों में सामाजिक चेतना का भाव भी पैदा करती हैं।
(C) रीति साहित्य में चित्रित नारी अपनी महिमा से महीयसी नहीं बन पायी है।
(D) रीति कवि दरबारी मनोवृत्ति से परिचित होने पर राज्याश्रयों से विमुख होने लगे।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल A और C
Solution:'रीति साहित्य' के बारे में हजारीप्रसाद द्विवेदी का कथन है- "रीति काव्य मादक कविता का साहित्य है।" तथा रीति साहित्य में चित्रित नारी अपनी महिमा से महीयसी नहीं बन पायी है। हजारी प्रसाद द्विवेदी हिन्दी के निबन्धकार आलोचक तथा उपन्यासकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। इनके द्वारा लिखित आलोचनात्मक कृतियां हैं- सूर साहित्य (1930 ई.), हिन्दी साहित्य की भूमिका (1940 ई.), कबीर (1941 ई.) हिन्दी साहित्य का आदिकाल (1952 ई.), सहज साधना (1963 ई.), कालिदास का लालित्य योजना (1969 ई.), मध्यकालीन बोध का स्वरूप (1970 ई.)।