यू.जी.सी. NTAनेट /जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2021 जून 2022 समाजशास्त्र

Total Questions: 100

91. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और नीचे दिए गए प्रश्न का उत्तर दीजिए।

हॉबहाउस के शब्दों में, संपत्ति को वस्तुओं पर मनुष्य के नियंत्रण के रूप में समझा जा सकता है ऐसा नियंत्रण जिसे समाज द्वारा मान्यता प्राप्त होती है, जो ज्यादातर स्थायी और विशिष्ट है। संपत्ति निजी (व्यक्तिगत या सामूहिक) या सामूहिक हो सकती है। संपत्ति के विकास के वर्णन में हॉबहाउस ने अवलोक किया कि सभी समाज में कुछ व्यक्तिगत निजी संपत्ति होती है लेकिन अनेक आदिम समाज में प्रमुख आर्थिक संसाधनों का सामुदायिक स्वामित्व होता है (उदाहरण के लिए शिकार के लिए भूमि, चराने के लिए भूमि, चरागाह)। अधिक विकसित कृषि समाज में निजी स्वामित्व की प्रधानता होती है। परन्तु हॉबहाउस ने बताया कि यद्यपि जनजातिगत साझा स्वामित्व लुप्त हो गया है, संयुक्त परिवार के लिए सामूहिक स्वामित्व बनाए रखा जा सकता है। आर.एच. लौवी ने भी, सम्पत्ति के बारे में अपने एक उत्कृष्ट लघु वर्णन, जिसमें आदिम और सभ्य समाज की तुलनात्मक आलोचना की गई है, यही विचार प्रस्तुत किया है। सभी आदिम मानव की व्यक्तिगत निजी संपत्ति है जिसमें नाम, नृत्य, गाने, मिथक, उत्सव संबंधी राजसी वस्तुएं, उपहार, हथियार, घरेलू उपकरण शामिल हैं। जहां तक उत्पादन के उपकरणों का संबंध है, शिकारियों और भोजन एकत्र करने वालों में, जहां भूमि जनजातीय संपत्ति (हमेशा परिभावेत नहीं) है और कृषकों और पशुपालनकर्ताओं में अंतर है। कृषकों में बहुधा भूमि व्यक्तिगत निजी संपत्ति होती है, यद्यपि वंश या जनजाति का नियंत्रण भूमि के उपयोग या स्वत्व अंतरण पर हो सकता है। पशु पालन करने वालों में भूमि पर समुदाय का अधिकार हो सकता है, लेकिन पशुधन पर नहीं; पशुधन का स्वामित्व व्यक्तिगत संपत्ति का भाव दृढतापूर्वक विकसित करता है।

अधिक विकसित कृषि समाज में-

Correct Answer: (c) निजी स्वामित्व की प्रधानता होती है
Solution:अधिक विकसित कृषि समाज में निजी स्वामित्व की प्रधानता होती है।

92. "संपत्ति को वस्तुओं पर मनुष्य के नियंत्रण के रूप में समझा जा सकता है।" यह किसका कथन है?

Correct Answer: (b) हॉबहाउस
Solution:"संपत्ति को वस्तुओं पर मनुष्य के नियंत्रण के रूप में समझा जा सकता है।" यह कथन हॉबहाउस का है।

93. निम्नलिखित में से किन पर आदिम मानव का अधिकार व्यक्तिगत निजी सम्पत्ति के रूप में होता है?

Correct Answer: (c) उपरोक्त दोनों
Solution:गाना, मिथक, नृत्य और मानक, हथियार, उपहार, उत्सव संबंधी राजसी वस्तुएँ और घरेलू उपकरण पर आदिम मानव का अधिकार व्यक्तिगत निजी सम्पत्ति के रूप में होता है।

94. पशुपालनकर्ताओं के लिए :

Correct Answer: (b) भूमि पर सामुदायिक स्वामित्व हो सकता है
Solution:पशुपालकर्ताओं के लिए भूमि पर सामुदायिक स्वामित्व हो सकता है।

95. आदिम समाज में प्रमुख आर्थिक संसाधन हैं-

Correct Answer: (c) सामुदायिक स्वामित्व वाले
Solution:आदिम समाज में प्रमुख आर्थिक संसाधन सामुदायिक स्वामित्व वाले हैं।

96. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और नीचे दिए गए प्रश्न का उत्तर दीजिए।

मिडल की सामाजिक परिवर्तन और विकास के सिद्धांत, प्रसिद्ध  स्थिति चक्रीय कारण और संचयी पविर्तन से संबंधित है। वे विकास की सार्वभौमिक उद्विकासात्मक अवस्थाओं के निर्माण करने की वैधता पर संदेह करते हैं। उनके अनुसार उनमें अक्सर उद्देश्यमूलक और रूढ़िवादी वैचारिकी छिपी होती है। इसके सभी घटक स्थितियों वाले एक समग्र रूप में सामाजिक व्यवस्था के एक उपरिगामी आंदोलन, विकास में अति - महत्त्वपूर्ण कारक हैं। मिर्डाल द्वारा दक्षिण एशियाई देशों के लिए वर्णित यह दशाएं हैं:
(1) निर्गत और आय
(2) उत्पादन की दशाएं
(3) जीवन स्तर
(4) जीवन और कार्य के प्रति अभिवृत्तियाँ
(5) संस्थाएं
(6) नीतियां ।
वे इन दशाओं के मध्य एक -दिशीय कार्य-कारण संबंध देखते हैं, दिए गए परिस्थितियों में ऊर्ध्वगामी अथवा अधोगामी आंदोलन के कारण अन्य परिस्थितियों में समान प्रकृति के संचयी आंदोलन होंगे। इन परिस्थितियों से संबंधित मूल्य सिद्धांत एक देश और दूसरे देश में भिन्न हो सकते हैं विशेषकर साधन-मूल्यों और स्वतंत्र-मूल्यों में, जहां स्वतंत्र मूल्य अपने आप में लक्ष्य के रूप में भी समझे जा सकते हैं। ये मूल्यांकन प्रत्येक 99. राष्ट्रीय समाज में विकास के वैचारिक संदर्भ को परिभाषित करते हैं। लेकिन समग्र रूप में सामाजिक व्यवस्था के गुणों वाले सावयवी रूप से चयनित तरीके से जुड़े हैं। मिर्डाल के अनुसार भारत और अन्य दक्षिण एशियाई देशों में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया चरमोत्कर्ष की तेजी से बढ़ती है, और तर्क संगत विकल्प के लिए समय उन के लिए सीमित है। एक क्रमिक वादी उपागम के लिए अवसर भी समाप्त हो गया है। मिर्डाल यह विचार करते हैं कि तीव्र ढंग से बड़ा परिवर्तन, क्रमिक रूप से छोटा परिवर्तन करने की अपेक्षा अधिक कठिन नहीं बल्कि और भी आसान है। इस प्रकार के बड़े तीव्र परिवर्तन भारतीय समाज में सामाजिक और सांस्थानिक दशाएं है। ये परिस्थितियां (ऊपर की 4 और 5) विकास के सभी अन्य परिस्थितियों को गतिशील बनाए रखने की मुख्य कुंजी है।

मिर्डाल के सामाजिक परिवर्तन और विकास का सिद्धांत किस पर आधारित है:

Correct Answer: (c) उपरोक्त दोनों
Solution:मिडल के सामाजिक परिवर्तन और विकास का सिद्धांत संचयी परिवर्तन और चक्रीय कारण पर आधारित है।

97. विकास के सार्वभौमिक उद्विकासात्मक अवस्थाओं के निर्माण होने में निम्न शामिल हो सकता है:

Correct Answer: (c) उपरोक्त दोनों
Solution:विकास के सार्वभौमिक उद्विकासात्मक अवस्थाओं क निर्माण होने में उद्देश्यमूलक वैचारिकी और रुढ़िवादी वैचारिकी शामिल हो सकता है।

98. निम्नलिखित में कौन-सा कारक दक्षिण एशियाई देशों के विकास के लिए मिडल द्वारा वर्णित नहीं किया गया है?

Correct Answer: (a) पर्यावरण
Solution:पर्यावरण कारक दक्षिण एशियाई देशों के विकास के लिए मिर्डाल द्वारा वर्णित नहीं किया गया है।

99. मिर्डाल के अनुसार, यह और भी आसान है-

Correct Answer: (b) तीव्र ढंग से बड़े परिवर्तन करना
Solution:

मिर्डाल के अनुसार तीव्र ढंग से बड़े परिवर्तन करना और भी आसान है।

100. भारत में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया है:

Correct Answer: (c) उपरोक्त दोनों