यू.जी.सी. NTAनेट परीक्षा जून-2020 (इतिहास)

Total Questions: 100

11. निम्नलिखित में से किन किसान नेताओं ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में किसानों के बीच संगठनात्मक कार्य आरंभ किया ताकि वे ब्रिटिश सरकार से अपनी शिकायतें कह सकें?

(A) कुंवरजी मेहता
(B) ईशान चन्द्र राय
(C) भास्कराव जाधव
(D) शशिपद बनर्जी
(E) द्वारकानाथ गांगुली
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिएः

Correct Answer: (a) केवल (A) और (B)
Solution:ब्रिटिश काल में किसानों द्वारा क्षेत्रीय स्तर पर कई संगठित आंदोलन किए गये-
  • गुजरात के कुँवर जी मेहता द्वारा 'पाटीदार युवक मंडल का निर्माण किया गया। कुँवर जी मेहता के आग्रह पर ही सरदार पटेल ने 1920 में बारदोली तालुके में किसानों द्वारा "लगान न अदायगी का आंदोलन चलाया।
  • ईशान चन्द्र राय ने बंगाल (अब बांग्लादेश में युसुफशाही परगने में स्थित) में पाबना किसान विद्रोह (1873) का नेतृत्व किया था। इसके लिए उन्होंने एक पाबना रैयत लीग बनायी थी।
  • द्वारकानाथ गांगुली मुख्य रूप से सामाजिक सुधार के कार्यों से जुड़े थे। भास्करराव जाधव ने ज्योतिबाफुले से प्रभावित होकर 1919 के बाद एक ब्राह्मण विरोधी व कांग्रेस विरोधी पार्टी का गठन किया। शशिपद बनर्जी ब्रह्म समाज से जुड़े एक समाज सुधारक थे।

12. मुगल काल के परवांचाओं के बारे में निम्नलिखित में से कौन से कथन सही है?

(A) मुगल साम्राज्य के अधिकारियों और मंत्रियों द्वारा जारी किया जानेवाला आज्ञा पत्र ।
(B) इस पर राजकीय मुहर की जरूरत नहीं होती थी।
(C) से सम्राट के पूर्व आदेश के संदर्भ में जारी किए जाते थे।
(D) मुगल वंश के आरंभिक चरण में बेगमों और शहजादों की तनख्वाह के निर्धारण के लिए परर्वाचा जारी नहीं किए जाते थे।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिएः

Correct Answer: (c) केवल (A), (B) और (C)
Solution:

मुगल काल के प्रमुख अधिकारियों में वाकिया नवीस, मुशरिफ, परवांचाओं, मीर-ए-बहर आदि का महत्वपूर्ण योगदान था। परवांचाओं परवांचाओं को ऐसी आज्ञाओं को जारी करने का अधिकार था जिसे सम्राट के आदेश के पूर्व दिया जाता था। इस आज्ञापत्र पर राजकीय मुहर की आवश्यकता नहीं होती थी। प्रारंभ में इस आज्ञापत्र को बेगमों और शहजादों की तनख्वाह के निर्धारण के लिए भी प्रयोग किया जाता था।

13. निजाम शाही राज्य में मलिक अंबर ने कृषि और राजस्व ढाँचे में क्रांतिकारी बदलाव किए। इस संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन से प्रावधान सही है?

(A) मलिक अंबर ने भू-राजस्व संग्रहण उगाही को ठेके पर देने की प्रथा समाप्त की।
(B) उसने भू-क्षेत्र का आकलन सरसरी निगाह द्वारा करने (नज़र पाहनी) की शुरुआत की।
(C) नजर पाहनी के अंतर्गत जमीन को बागात और नाबूद में बाँटा जाता था।
(D) भू-राजस्व की अधिकतम दर भूमि की उर्वरा शक्ति के आधार पर उपज का 1/4 से 2/3 हिस्सा हुआ करती थी।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिएः

Correct Answer: (c) केवल (A), (B)और (D)
Solution:

मलिक अम्बर निजामशाही राज्य का प्रमुख शासक हुआ। यह मूलतः एक अबीसीनियाई दास था। इसके द्वारा किए गए प्रमुख कार्य (1) भू-राजस्व संग्रहण प्रणाली को ठेके पर देने की प्रथा (इजारा) समाप्त की तथा जब्ती व्यवस्था लागू किया। (11) भू-क्षेत्रे का आकलन सरसरी निगाह (नजर पाहनी) द्वारा करने की शुरूआत की। (III) इन्होंने दक्षिण में टोडरमल की भूमि व्यवस्था लागू की तथा भू- राजस्व की अधिकतम दर भूमि की उर्वरा शक्ति के आधार पर उपज 1/4  से 2/3 भाग निर्धारित किया।

14. तमिल सिद्धों के संदर्भ में निम्न में से कौन सा कथन सही नहीं है?

Correct Answer: (d) तमिल सिद्धों का मुख्य केंद्र तोंडनाडु और पांडिनाडु था।
Solution:

तमिलनाडु में आयुर्वेद के मूल सिद्धान्तों पर आधारित तमिल अभिव्यक्ति तमिल सिद्ध चिकित्सा प्रणाली के रूप में जानी गयी। इस सिद्ध सम्प्रदाय के चिकित्सक मुख्यतः तमिलनाडु में तथा आंध्रप्रदेश और केरल के सीमावत क्षेत्रों में चिकित्सा कार्य करते थे। इस चिकित्सा शास्त्र का ज्ञान भगवान शिव से अगस्त्य ऋषि को प्राप्त हुआ। तमिल सिद्धों ने भगवान शिव तथा उनके पुत्र मुरुगन (कार्तिकेय) के महत्व पर जोर दिया। तिरुमुलर का दर्जा सभी तमिल सिद्धों में सबसे ऊंचा था। इस सिद्धवाद में ब्राह्मण विरोधी तथा कर्मकांड-विरोधी लक्षण प्राप्त होते है। महर्षि अगत्स्य का इस पद्धति पर प्रभुत्व अधिक होने के कारण 'अगत्स्य सम्प्रदाय' के नाम से भी जाना जाता है।

15. निम्नलिखित में से किस शाहजादे/अमीर के पुस्तकालय में सोलहवीं सदी के उत्तरार्द्ध में मुगल शैली में शाहनामा की सचिव प्रति तैयार करवाई गई?

Correct Answer: (d) अब्दुल रहीम खान-ए-खाना
Solution:अब्दुल रहीम खान-ए-खाना का जन्म लाहौर में हुआ था बैरम खाँ के पुत्र के रूप में इनके बचपन का नाम 'रहीम' था। अब्दुल रहीम खान-ए-खाना ने बाबर की आत्मकथा को तुर्की से फारसी में अनुवाद किया।

'मआसिरे रहीमी' और 'आइने अकबरी" में इन्होंने "खानखाना" व रहीम नाम से कविता की है। इनकी पुस्तकालय में सोलहवीं सदी के उत्तरार्द्ध में मुगल शैली में शाहनामा की सचित्र प्रति तैयार करवाई गई। ये भक्तिकाल से सम्बन्धित थे तथा भगवान कृष्ण की स्तुति में हिन्दी दोहे लिखा करते थे।

16. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन से कथन सही हैं?

(A) एक आंदोलन के रूप में उन विभिन्न राजनीतिक झुकावों, विचारधाराओं और सामाजिक समूहों वर्गों को सम्मिलित किया जब तक ये प्रजातंत्रिक और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्रवाद के प्रति प्रतिबद्ध है।
(B) आरंभिक राष्ट्रवादी नेताओं ने जन आंदोलनों को संगठित नहीं किया परन्तु उन्होंने उत्पीड़कों के विरुद्ध वैचारिक संघर्ष चलाया।
(C) आरंभिक राष्ट्रवादी नेताओं ने प्रेस और वाक् स्वतंत्रता के प्रत्येक उल्लंघन के विरुद्ध संर्घष किया।
(D) उन्होंने न्यायिक और कार्यकारी शक्तियों के पृथक्कीकरण के लिए संघर्ष किया और नस्ली भेदभाव के विरुद्ध लड़ाई लड़ी।
निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

Correct Answer: (a) (A), (B), (C) और (D)
Solution:

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसम्बर 1885 को हुआ था। इसकी स्थापना का उद्देश्य राजनीतिक झुकावों, विचारधाराओं और सामाजिक वर्गों को सम्मिलित करके एक मजबूत तंत्र बनाना था। इसमें जुड़ने वाले सभी राष्ट्रवादी नेताओं ने प्रेस और वाक् स्वतंत्रता के उल्लंघन के साथ-साथ न्यायिक और कार्यकारी शक्तियों के पृथक्कीकरण के लिए भी संघर्ष किया। भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष में इसने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

17. गुप्त सम्राट चन्द्रगुप्त द्वितीय को किस/ किन अन्य नाम/ नामों से जाना जाता था?

(A) देवगुप्त
(B) देवराज
(C) देवपुत्र
(D) देवव्रत
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चयन करें:

Correct Answer: (b) केवल (A) और (B)
Solution:

चन्द्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य समुद्रगुप्त का पुत्र था। गुप्त साम्राज्य की राजसत्ता प्राप्त करने के पश्चात इसने शक मुद्राओं के ही अनुकरण कर “चाँदी के सिक्के' उत्कीर्ण करवाये। इसके अन्य नाम देवगुप्त, देवराज तथा देवश्री थे। इन्होंने विक्रमांक, विक्रमादित्य, परमभागवत जैसी उपाधियाँ भी धारण की। इनके शासनकाल में नौ विद्वानों की एक मण्डली निवास करती थी जिसे 'नवरत्न' कहा गया है। चीनी यात्री 'फाह्यान' इन्हीं के शासनकाल में भारत आया था।

18. निम्नलिखित में से किस ग्रंथ में हिंदुस्तान के सूफी संतों के जीवनवृतांत दिया गया है और जिसके रचयिता ने उसे जहांगीर को भेंट किया था?

Correct Answer: (c) अखबार उल अखयार
Solution:

मुगलकाल में शरीयत का बुजूदी और हिन्दू विचारधाराओं से संबंध स्थापित करने में कादिरी सिलसिला का प्रमुख योगदान रहा। कादिरी परंपरा के अब्दुल हक मुहद्दिस देहलवी ने अपने ग्रंथ "अखबार-उल-अखयार" में हिन्दुस्तान के सूफी संतों का जीवनवृत्तांत दिया है। देहलवी ने इस ग्रंथ को मुगलशासक जहाँगीर को भेंट की तथा जहाँगीर के लिए सुन्नी सिद्धांतों के विषय के रूप में 'नूरिया-ए-सुलतानिया' नामक ग्रंथ को लिखा। कादिरी संप्रदाय का मूल आधार शरीयत पर जोर देने के साथ-साथ सर्वेश्वरवादी विचारों की ओर झुकाव था।

19. सुल्तान मुहम्मद तुगलक द्वारा जारी सांकेतिक मुद्रा के संबंध में निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?

(A) बरनी के अनुसार इन सांकेतिक सिक्कों के लिए जो धातु इस्तेमाल की गयी, वह तांबा था।
(B) फरिश्ता का कहना है कि यह कांस्य या पीतल था।
(C) दूसरे सिक्कों पर सिर्फ अरबी में लिखा गया था, जबकि इन सांकेतिक सिक्कों पर फारसी में भी लिखा था।
(D) सांकेतिक सिक्कों पर लिखी इबारत को स्पष्ट और पठनीय बनाने पर कोई ध्यान नहीं दिया गया था।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिएः

Correct Answer: (b) केवल (A), (B) और (C)
Solution:

मुहम्मद बिन तुगलक अरबी एवं फारसी का महान विद्वान था। इसने मुख्य रूप से दोआब में कर वृद्धि, देवगिरी को राजधानी बनाना, सांकेतिक मुद्रा जारी करना खुरासान पर आक्रमण तथा कराचिल अभियान को चलाया। सांकेतिक मुद्रा का प्रचलन अत्यधिक विशाल सेना रखने के उद्देश्य से किया गया था। उसने ताँबे तथा इससे मिश्रित काँसे के सिक्के जारी किए। इनकी सांकेतिक मुद्रा के बारे में बरनी एवं फरिश्ता जैसे विद्वानों ने स्पष्ट मत प्रकट किया। उसने सांकेतिक मुद्रा को स्पष्ट और पठनीय बनाया। उसके द्वारा जारी सिक्के अपनी आकृति, बनावट एवं परिष्कार की कलात्मक उत्कृष्टता की दृष्टि से बेजोड़ थे।

20. निम्नलिखित स्मारकों को आरंभिक काल में उनके ऐतिहासिक कालानुक्रम में रखें:

(A) चश्मा-ए नूर, अजमेर
(B) बीबी का मकबरा, औरंगाबाद
(C) एतमाद-उद् दौला का मकबरा, आगरा
(D) बेगम शाही मस्जिद, लाहौर
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन करें:

Correct Answer: (c) (D), (A), (C), (B)
Solution:

दिए गए स्मारकों का सही कालक्रम इस प्रकार है-
बेगम शाही मस्जिद, लाहौर -1611-14 जहाँगीर
चश्मा-ए-नूर, अजमेर -1611-14 जहाँगीर
एतमाद्-उद् दौला का मकबरा, आगरा - 1622-28 नूरजहाँ
बीबी का मकबरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र)- 1651-61 औरंगजेब के
पुत्र आजम शाह द्वारा