Solution:महमूद गजनवी के दरबार में अल्बरुनी, फिरदौसी, उत्बी आदि विद्वान थे। अल्बरुनी (देश निकाला के पश्चात) गजनवी के साथ भारत आया था। उसने अपनी भारत यात्रा का विवरण 'किताबुल हिन्द' पुस्तक में दिया है। इसमें भारतीय गणित, इतिहास, भूगोल, खगोल, दर्शन आदि की समीक्षा किया गया है। उसके अनुसार हिन्दू सोचते है कि उनके देश जैसा कोई और देश तथा उनके धर्म जैसा कोई और धर्म नहीं हो सकता। इसने ग्रहण की प्रकृति के बारे में ब्रह्मगुप्त के दृष्टिकोण का विरोध भी किया था। उसने बताया कि अस्पृश्य जातियाँ गाँवों और शहरों की सीमाओं के बाहर निवास करती थी।