Solution:छठवीं शताब्दी में 'कुरुष महान' (साइरस I) ने भारत पर आक्रमण किया था। यह प्रथम पारसी (ईरानी) आक्रमण था। इसके पश्चात दारा-1 ने भारत पर आक्रमण किया। बाद में पारसियों ने भारत में अपना स्थाई निवास बनाया। 1620 में अंग्रेजो की फैक्ट्रियाँ सूरत में स्थापित होने से बड़ी संख्या में पारसी कारीगर व्यापार से जुड़े। अंगेज भी इन्हीं के माध्यम से व्यापार करते थे।
पारसी सुमदाय के लोग आगे चलकर पश्चिमी तट के बंदरगाहों से दो प्रमुख वस्तु कपास और अफीम का व्यापार करते थे। भारत में व्यापारिक कंपनियों की स्थापना से पूर्व यह प्रमुख (वस्तु व्यापार) व्यापार था। फिरोजशाह मेहता, मैडम भीखा जी कामा जैसे पारसी समुदाय के लोगों ने भारत में शिक्षा के क्षेत्र में प्रमुख योगदान दिया।