Solution:संत मलूक दास का जन्म वत्स देश की राजधानी रही वर्तमान कौशाम्बी जिले के 'वाड़ा' नामक स्थान पर हुआ था। इनकी दो प्रसिद्ध पुस्तकें है- 'रत्नखान' और 'ज्ञानबोध' । इन्होंने हिन्दुओं और मुसलमानों दोनों को उपदेश देने के लिए फारसी और अरबी शब्दों का प्रयोग किया। ज्ञानाश्रयी मार्गी निर्गुण भक्ति संत नानक, रैदास, मलूकदास, दादूयाल आदि है। निर्गुण भक्ति काल के प्रेममार्गी शाखा के कवि- मंझन, कुतबन, मुल्ला दाउद तथा उस्मान है। इन्होंने प्रेमगाथाएँ फारसी की मसाबियों की शैली के आधार पर रची। इन गाथाओं की भाषा अवधी है और इनमें दोहा-चौपाई, छंदो का प्रयोग हुआ है।