यू. जी. सी. NTA नेट (जून) परीक्षा, 2020 राजनीति शास्त्र

Total Questions: 100

91. लोकतंत्र के इस परिप्रेक्ष्य में प्रतिनिधित्व लोकतंत्र को सहायता या हानि कर सकता है भले ही प्रतिनिधित्व लोकतांत्रिक न हो क्योंकि यह लोगों की प्रतिवृत्ति नहीं हो सकता है।

किन्तु प्रतिनिधित्व का परिदृश्य भावनात्मक रोलर कोस्टर (उतार और चढ़ाव) को दर्शाता है जिसमें चुनाव अभियान के दौरान बड़ी आशा और सरकार के कार्यों पर बहुत निराशा व्यक्त की जाती है। यह समस्या इस तथ्य से उत्पत्र होती है कि प्रतिनिधि, सरकार और जनता मुख्यतः प्रति विरोधों के आधार पर कार्य करते है।" एक प्रतिनिधि का पद चुनाव से प्राप्त होता है, जो कानून बनाने) के लिए शासितों पर राजनीतिक शासकों के एक समूह से उन्नत करता है। वे पद पर रहते हुए विधायी कार्य करने के लिए समझौता करते है।

प्रतिनिधि अपने किए गए कार्य पर गर्व कर सकते है क्योंकि उन्होंने निर्णय लिए जिसने समझौते को जन्म दिया। किन्तु नागरिक विधायी कार्य पर गर्व नहीं कर सकते और वे प्रायः समझौते से उत्पन्न दुष्परिणामों का सामना करते है। इसका यह अर्थ नहीं कि प्रतिनिधियों को सैदव घृणा की दृष्टि से देखा जाएगा, जैसा कि ऊपर उल्लखित है उनका कार्यालय उन्हें राजनीतिक पहल करने में समर्थ बनाता है जो चुनाव प्रचार में व्यवहार्य नहीं या उन अल्पसंख्यकों की आवश्यकताओं की उपेक्षा करवाता है जिनकी आवश्यकताओं की उपेक्षा हुई है।

यह बताता है कि विधायी समझौते संबंधी आवश्यक कार्य का प्रभाव लोगों पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में पड़ता है। अतः यह यूनानी और अरस्तू वादी लोकतंत्र की उस समझ के प्रतिकूल है, जो राजनीतिक व्यवस्था के रूप में सत्तावादी शक्ति के साथ नागरिकों (अर्थात जनता) के विचारण और निर्णायक शक्ति पर आधारित होती है। ऐसा कहा जाता है कि एथेननी लोकतंत्र में नागरिक और शासक एक दूसरे पर परिवर्तित रूप से शासन करते थे किंतु प्रत्येक विषय में उनकी शक्ति नागरिकों की राजनीतिक उपस्थित और विचारण कार्यवाही पर अपेक्षित थी।

लोकतंत्रों की यूनानी और अरस्तूवादी अवधारणा का अर्थ है

Correct Answer: (a) नागरिकों की विचारण शक्तियों पर राजनीतिक आदेशों की निर्भरता
Solution:

लोकतंत्र की यूनानी व अरस्तूवादी धारणा का अर्थ है। नागरिकों की विचारण व निर्णायक शक्तियों पर राजनीतिक आदेशों की निर्भरता।

92. लोगों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से क्या प्रभाव पड़ता है?

Correct Answer: (d) विधायी समझौता
Solution:

गंद्याश के आधार पर लोगों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विधायी समझौते संबंधी आवश्यक कार्य का प्रभाव पड़ता है।

93. चुनाव के स्पष्ट परिणाम क्या है?

Correct Answer: (c) प्रतिनिधि का पद
Solution:

प्रतिनिधित्व लोकतंत्र में चुनाव के स्पष्ट परिणामों में एक प्रतिनिधि का पद के चुनाव से है जो कानून बनाने के लिए शासितों पर राजनीतिक शासितों के एक समूह को अन्त करता है।

94. प्रतिनिधियों ने अपनी उपलब्धियों पर क्यों गर्व अनुभव किया था?

Correct Answer: (b)उन्होंने ऐसे निर्णय लिए जिससे समझौता हुआ
Solution:

गंद्याश के आधार पर सही उत्तर विकल्प (2) है।

95. निम्नलिखित में से किसे प्रतिनिधित्व के परिदृश्य में दर्शाया गया है?

Correct Answer: (a) चुनाव अभियान के दौरान बड़ी आशाएँ
Solution:

प्रतिनिधित्व के परिदृश्य में भावनाओं का रोलर कोस्टर (उतार-चढ़ाव) को दर्शाया जाता है जिसमें चुनाव के दौरान बड़ी आशा व सरकार के कार्यों पर बहुत निराशा व्यक्त की जाती है।

96. रोनैल्ड ड्वार्किंग का विचार यह है कि लोगों के कुछ अधिकार तो मौलिक होते है लेकिन अनेक अधिकार मौलिक नहीं होते। वे मौलिक है।

क्योंकि वे "राज्य के विरुद्ध अधिकार है। डुवार्किन का कहना है कि तुरुप के पत्ते के रूप में अधिकारों की अवधारणा राज्य के विरुद्र व्यक्ति के अधिकार की विशिष्ट संकल्पना को चिन्हित करता है जो कि संयुक्त राज्य में संवैधानिक सिद्धान्त का केन्द्र है" विशेष परिशिष्ट में ड्वार्किन ने इस बात की वकालत की सरकार ने विरूद्ध अधिकार की संकल्पना उस स्थिति में और उपयोगी हो जाती है जब समाज का नस्ली आधार पर बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक में विभाजित किया है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार इसी कोटि में आते है।

अतः वे सबल अधिकार है। वे जोर देते है कि इस अधिकारों की अनुमति होनी चाहिए और इनमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और न ही इनको प्रतिबंधित करना चाहिए। इन स्वतंत्रताओं की अनुमति देनी चाहिए भले ही इससे सामूहिकता के कल्याण का उल्लंघन होता हो। इसके विपरीत, वह अधिकारों के एक बड़े क्षेत्र की पूर्वकल्पना करते है जहाँ राज्य सामान्य कल्याण के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु उन अधिकारों को सीमित करने के लिए विधायन बना सकता है। इन्हें ; अशक्त अधिकार कह सकते है।

उदाहरण के लिए समानता का अधिकार, जो एक सशक्त अधिकार है की तुलना में स्वतंत्रता का अधिकार एक अशक्त अधिकार बन जाता है। यह प्रथम दृष्टया परस्पर विरोधी लग सकता है लेकिन ऐसा नहीं है। उदाहरण के लिए सुरक्षा एवं निर्वाध ट्रैफिक प्रवाद के लिए सड़कों पर लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने का अर्थ अधिकारों को सीमित करना नहीं है, दूसरी ओर प्रकाशन पर प्रतिबंध अथवा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रतिबंध अधिकारों का दमन करेगा भले ही वह सामान्य कल्याण में वृद्धि करें। अतः हालांकि दोनों विषयों में अधिकार सम्मिलित है लेकिन एक को सीमित करना न्यायोचित है जबकि दूसरे को सीमित करना सही नहीं हैं।

राज्य के विरुद्ध जिन अधिकारों का दावा किया जाता है उन्हें माना जाता है:

Correct Answer: (a) मौलिक अधिकार
Solution:

राज्य के विरूद्ध मौलिक अधिकारों का प्रयोग व्यक्तियों द्वारा किया जाता है। भारतीय संविधान में अनुच्छेद 12 से 35 तक मौलिक अधिकारों का जिक्र है।

97. सरकार के विरुद्ध अधिकार तब बहुत उपयोगी हो जाते है जब समाज को बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक के आधारों पर बाँटा जाता है:

Correct Answer: (c) नस्ल के आधार पर
Solution:

नस्लीय आधार पर समाज के वर्गकिरण के समय सरकार के विरूद्ध अधिकारों का महत्व बढ़ जाता है।

98. निम्न में से कौन-सा अशक्त अधिकार है?

Correct Answer: (c) स्वतंत्रता का अधिकार
Solution:

स्वतंत्रता का अधिकार अशक्त अधिकार होता है। अर्थात् इनका युक्तियुक्त निबंधन किया जा सकता है।

99. सशक्त अधिकारों के लिए आवश्यक है |

Correct Answer: (b) अनुमति प्राप्त करना
Solution:

सशक्त अधिकारों के लिए उसका अनुमति प्राप्त होना आवश्यक है।

100. सामान्य कल्याण के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु जिन अधिकारों को सीमित किया जा सकता है उन्हें कहा जा सकता है?

Correct Answer: (d) अशक्त अधिकार
Solution:

अशक्त अधिकारों को सामान्य कल्याण के उद्देश्य से सीमित किया जा सकता है।