किन्तु प्रतिनिधित्व का परिदृश्य भावनात्मक रोलर कोस्टर (उतार और चढ़ाव) को दर्शाता है जिसमें चुनाव अभियान के दौरान बड़ी आशा और सरकार के कार्यों पर बहुत निराशा व्यक्त की जाती है। यह समस्या इस तथ्य से उत्पत्र होती है कि प्रतिनिधि, सरकार और जनता मुख्यतः प्रति विरोधों के आधार पर कार्य करते है।" एक प्रतिनिधि का पद चुनाव से प्राप्त होता है, जो कानून बनाने) के लिए शासितों पर राजनीतिक शासकों के एक समूह से उन्नत करता है। वे पद पर रहते हुए विधायी कार्य करने के लिए समझौता करते है।
प्रतिनिधि अपने किए गए कार्य पर गर्व कर सकते है क्योंकि उन्होंने निर्णय लिए जिसने समझौते को जन्म दिया। किन्तु नागरिक विधायी कार्य पर गर्व नहीं कर सकते और वे प्रायः समझौते से उत्पन्न दुष्परिणामों का सामना करते है। इसका यह अर्थ नहीं कि प्रतिनिधियों को सैदव घृणा की दृष्टि से देखा जाएगा, जैसा कि ऊपर उल्लखित है उनका कार्यालय उन्हें राजनीतिक पहल करने में समर्थ बनाता है जो चुनाव प्रचार में व्यवहार्य नहीं या उन अल्पसंख्यकों की आवश्यकताओं की उपेक्षा करवाता है जिनकी आवश्यकताओं की उपेक्षा हुई है।
यह बताता है कि विधायी समझौते संबंधी आवश्यक कार्य का प्रभाव लोगों पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में पड़ता है। अतः यह यूनानी और अरस्तू वादी लोकतंत्र की उस समझ के प्रतिकूल है, जो राजनीतिक व्यवस्था के रूप में सत्तावादी शक्ति के साथ नागरिकों (अर्थात जनता) के विचारण और निर्णायक शक्ति पर आधारित होती है। ऐसा कहा जाता है कि एथेननी लोकतंत्र में नागरिक और शासक एक दूसरे पर परिवर्तित रूप से शासन करते थे किंतु प्रत्येक विषय में उनकी शक्ति नागरिकों की राजनीतिक उपस्थित और विचारण कार्यवाही पर अपेक्षित थी।
लोकतंत्रों की यूनानी और अरस्तूवादी अवधारणा का अर्थ है