Solution:नैदानिक मूल्यांकन का अर्थ है सीखने के दौरान छात्रों की कठिनाइयों का निदान या पता लगाना तथा समस्या का सटीक आकलन करना। यह मूल्यांकन छात्र को उनके व्यक्तित्व, उनके कमजोर बिंदुओं को जानने में मदद करता है। इससे उन्हें यह समझाने में और मदद मिलेगी कि उन्हें किस तरह किस प्रकार का दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
• स्थानन मूल्यांकन (Placement Evaluation), जिसे प्रारंभिक या पूर्व-मूल्यांकन भी कहते हैं, शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया शुरू करने से पहले छात्रों के प्रवेश व्यवहार (entry behavior), यानी उनके पूर्व ज्ञान और कौशल को मापने के लिए किया जाता है।
• संकलनात्मक मूल्यांकन (Summative Assessment) किसी शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया या कार्यक्रम के अंत में छात्र के कुल अधिगम और उपलब्धि का आकलन करने की प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य यह जानना है कि छात्र ने किसी विषय-वस्तु या कौशल में कितनी निपुणता हासिल की है।
• निर्माणात्मक मूल्यांकन (Formative Evaluation) शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के दौरान किया जाने वाला एक सतत मूल्यांकन है, जिसका मुख्य उद्देश्य छात्रों की प्रगति पर नज़र रखना और शिक्षक व छात्र दोनों को सुधार के लिए तत्काल प्रतिक्रिया (feedback) देना है ताकि कमजोरियों की पहचान कर शिक्षण विधियों और सीखने की रणनीतियों में समय पर बदलाव किए जा सकें, यह अंतिम ग्रेडिंग के लिए नहीं बल्कि सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने पर केंद्रित होता है।