यू.जी.सी. NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2021 जून 2022 भूगोल

Total Questions: 100

91. (निर्देश: 91-95) मानव समाज में व्यक्तियों, सामानों एवं सूचना का संचरण सदैव एक मौलिक संघटक रहा है। समकालीन आर्थिक प्रक्रियाओं के साथ गतिशीलता एवं अभिगम्यता में सार्थक वृद्धि हुई है। यद्यपि यह प्रवृत्ति औद्योगिक क्रांति से पूर्व भी थी, तथापि इसमें 20वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में पर्याप्त बढ़ोतरी हुई क्योंकि व्यापार का उदारीकरण हो गया,

आर्थिक ब्लाक उभर कर आए और वैश्विक श्रम एवं संसाधनों के तुलनात्मक लाभों को अधिक दक्षता से प्रयोग किया गया। विभिन्न प्रकार के कार्यकलापों में से आवागमन, ऊर्जा आवश्यकता की आपूर्ति, विनिर्माण सुविधाओं एवं वितरण केन्द्रों के मध्य वितरण के लिए समाज की अपने परिवहन प्रणालियों पर निर्भरता निरंतर बढ़ती रही है।

परिवहन का विशिष्ट उद्देश्य दूरी को कम करना है, जो अनेक मानवीय एवं भौतिक अवरोधों जैसे दूरी, समय प्रशासनिक प्रभागों एवं स्थलाकृतियों से निर्धारित होती है। संयुक्त रूप से, वे किसी संचलन में बाधा प्रस्तुत करते हैं जिसे सामान्य रूप में दूरी के संघर्ष के रूप में जाना जाता है।

बिना भूगोल के कोई यातायात नहीं हो सकता है और बिना यातायात के कोई भूगोल नहीं हो सकता है। इस प्रकार यातायात का लक्ष्य मालभाड़े, व्यक्तियो अथवा सूचना, उत्पत्ति से गंतव्य के भौगोलिक गुणों के रूपान्तरण और इस प्रक्रिया में उनमें मूल्यवर्धन करना है, यह जिस सुगमता से किया जा सकता है, उस परिवहनीयता' में प्रचुर विविधता पायी जाती है।

परिवहनीयता का संदर्भ यात्रियों, माल-भाड़े अथवा सूचना के परिवहन में सुगमता है। यह परिवहन लागत के साथ-साथ परिवहन किए जा रही वस्तुओं के गुणों (क्षण-भंगुरता, नाशवान मूल्य) से प्रभावित होती है, राजनीतिक पहलू जैसे कानून, विनिमय, सीमाएँ एवं शुल्क भी परिवहनीयता 'को प्रभावित करते हैं।

परिवहन का विशिष्ट उद्देश्य गतिशीलता की मांग को पूरी करना है, चूंकि परिवहन तभी रहेगा जब व्यक्तियों माल भाड़े एवं सूचना में गतिशीलता बनी रहे। अन्यथा इसका कोई उद्देश्य नहीं है। यह इसलिए है, कि परिवहन मुख्यतः एक व्युत्पन्न मांग का परिणाम है।

नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन I:
परिवहन का विशिष्ट उद्देश्य संचरण की मांग को पूरा करना है, चूंकि परिवहन तभी अस्तित्व में रहेगा यदि यह व्यक्तियों, माल भाड़े एवं सूचना का संचरण करता है।
कथन II: परिवहन मुख्यतः एक व्युत्पन्न मांग का परिणाम है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) कथन I और II दोनों सत्य है
Solution:

परिवहन की विशिष्ट उद्देश्य गतिशीलता की मांग को पूरी करना है, चूकि परिवहन तभी अस्तितव में रहेगा जब व्यक्तियों, माल-भाड़े एवं सूचना में गतिशीलता बनी रहे अन्यथा कोई उद्देश्य नहीं है। यह इसलिए है कि परिवहन मुख्यतः एक व्युत्पन्न माँग का परिणाम है।

बिना भूगोल के कोई परिवहन नहीं हो सकता है और बिना परिवहन के कोई भूगोल नहीं हो सकता है। अतः कथन I और II दोनो सत्य है।

92. दूरी के संघर्ष' से आप क्या समझते हैं :

Correct Answer: (a) मानव एवं भौतिक अवरोध जो व्यक्तियों, माल-भाड़े एवं सूचना के संचरण में संघर्ष उत्पन्न करते हैं।
Solution:

दूरी के संघर्ष में अनेक मानवीय एवं भौतिक अवरोधो जो व्यक्तियों, माल भाड़े एवं सूचना के संचरण (गतिशीलता) में संघर्ष उत्पन्न करते है जो दूरी, समय, प्रशासनिक विभागों एवं स्थलाकृतियों के द्वारा निर्धारित होती है। संयुक्त रूप से, वे किसी संचरण में बाधा प्रस्तुत करते हैं जिसे सामान्य रूप से दूरी के संघर्ष के रूप में जाना जाता है।

93. परिवहनीयता' क्या है?

Correct Answer: (a) यात्रियों, माल-भाड़े अथवा सूचना के संचरण में सुगमता
Solution:

परिवहनीयता यातायात का लक्ष्य गाल-भाड़े, व्यक्तियों अथवा सूचना, उत्पत्ति से गंतव्य के भौगोलिक गुणों के रूपान्तरण और इस प्रक्रिया में उनमें मूल्यवर्धन करना है, जिसे सुगमता से किया,जा सकता है। परिवहनीयता का सन्दर्भ यात्रियों, माल-भाड़े अथवा सूचना के परिवहन में सुगमता है।

यह परिवहन लागत के साथ-साथ परिवहन किए जा रही वस्तुओं के गुणों (क्षण भंगुरता नाशवान मूल्य) से प्रभावित होती है। जिसमें राजनीतिक पहलू जैसे कानून, विनियम, सीमाएँ एवं शुल्क भी परिवहनीयता को प्रभावित करता है।

94. विश्व ने 20वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में व्यक्तियों, सामानों एवं सूचना के संचरण में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गयी। निम्नलिखित में से इसके कारण कौन से रहे हैं ?

(A) उदारीकृत व्यापार
(B) आर्थिक ब्लाकों का उद्भव
(C) न्यून श्रमिक उत्पादकता
(D) संसाधनों का दक्ष उपयोग
नीचे दिए गएं विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल (A), (B) और (D)
Solution:

विश्व में 20वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में पर्याप्त बढ़ोत्तरी हुई क्योंकि व्यापार का उदारीकरण हो गया, आर्थिक ब्लाक उभर कर आए और वैश्विक श्रम एवं संसाधनों के तुलनात्मक लाभो को अधिक दक्षता से प्रयोग किया गया।

विभिन्न प्रकार के कार्यकलापों में से आवागमन, ऊर्जा आवश्यकता की आपूर्ति, विनिर्माण सुविधाओं एवं वितरण केन्द्र के मध्य वितरण के लिए समाज की अपने परिवहन प्रणालियों पर निर्भरता निरंतर बढ़ती रही है।

95. समाज अपने यातायात प्रणालियों पर अत्यंत निर्भर हो गया जिसका कारण निम्नलिखित में से कौन सा है?

(A) आवागमन
(B) ऊर्जा आवश्यकताओं की आपूर्ति करना
(C) विनिर्माण एवं वितरण के लिए
(D) इनमें से सभी
नीचे दिए गए विकल्पों में सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल (D)
Solution:

विभिन्न प्रकार के कार्यकलापो में से आवागमन, ऊर्जा आवश्यकता की आपूर्ति, विनिर्माण सुविधाओं एवं वितरण केन्द्रो के मध्य वितरण के लिए समाज की अपने परिवहन प्रणालियों पर निर्भरता बढ़ती रही है। परिवहन का मुख्यतः उद्देश्य दूरी को कम करना है

जो मानवीय क्रियाकलापों को सुगम बनाने में तत्पर है बिना परिवहन के भूगोल का कोई महत्व नहीं है और ना ही भूगोल के बिना परिवहन का।

96. (निर्देश: 96-100) ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में यूनानी विद्वान इरेटोस्थनीज,भूगोल शब्द का प्रयोग करने वाले पहले व्यक्ति थे। लेकिन इससे बहुत पहले से ही मनुष्य भूगोल-सम्बन्धी प्रश्नों का अन्वेषण करता रहा है। यूनानी भूगोलवेत्ताओं ने भूगोल-संबंधीलेखन का श्रेय होमर को दिया है, लेकिन प्राचीनतम ज्ञातमानचित्र सुमेरवासियों ने लगभग ईसा पूर्व 2700 में ही बना लिया था।

भूगोल के अध्ययन का प्रारम्भ मानवीय विद्वत्ता के आरम्भ से ही हुआ है। बौद्धिक प्रगति का पहला महत्वपूर्ण काल,जो पाश्चात्य जगत की लिखित परम्परा का भाग प्राचीन यूनान में मिलता है, जो ईसा पूर्व तीसरा तथा चौथी शताब्दी में पराकाष्ठा पर पहुँचा। यूनानियों ने कार्यप्रणालियाँ विकसित की, जिन्हें हम वैज्ञानिक विधियों के रूप में जानते हैं।

जो लोग सिद्धान्त को मुख्य महत्व का स्थान देना पसन्द करते हैं, वे प्रायः प्लेटो को सबसे अधिक उद्धृत करते हैं, जिसने निगमनात्मक पद्धति को विकसित किया। अरस्तू, जिसने आगमनात्मक पद्धति को विकसित किया, ने अवलोकित तथ्यों के सामान्यीकरण के रूप में अपनी अवधारणाओं को सूत्रबद्ध करने की वरीयता दी।

अरस्तू ने सिद्धान्त से तार्किक निगमन करने के स्थान पर प्रत्यक्ष प्रेक्षण/अवलोकन करने के महत्व पर जोर दिया। प्राचीन यूनानी दार्शनिकों में, भौगोलिक अध्ययन को लेकर दो मूल परम्पराएँ मिलती हैं। पहली परम्परा थेल्स से शुरू होने वाली गणितीय परम्परा है,

जिसमें विषयों को सही स्थान पर अवस्थित करने वाले हिप्पार्कस सम्मिलित है और जिसका सार-संक्षेप टोलेमी ने किया। दूसरी परम्परा होमर से शुरू होने वाली साहित्यिक परम्परा है, जिसमें हैकेटियस आते हैं तथा जिसका सार-संक्षेप स्ट्राबो ने किया। मध्य-युग में पतन का एक लम्बाकाल आया,

जब भौगोलिक ज्ञान के क्षितिज संकुचित हो गए और ईसाई मठ का केन्द्र बने। पन्द्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में अन्वेषण युग प्रारम्भ हुआ जब भौगोलिक ज्ञान के क्षितिज को पुनः विस्तारित किया गया। यूरोप में इन सभी नए नवाचारों और पर्यवेक्षणों का आविर्भाव अत्यन्त प्रेरक था

और इसने घटनाओं की ऐसी श्रृंखला को जन्म दिया, जिसकी निरन्तरता आज भी विद्यमान है। सबसे पहले तो धर्मग्रन्थों के शाब्दिक पाठ से उत्पन्न अवधारणाओं को चुनौती दी गई और अकादमिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों को स्थापित करने का संघर्ष शुरू हुआ।

सुयोग्य पेशेवर विद्वानों का यह अधिकार है कि वे प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़ें, अपने निष्कर्षों को प्रकाशित करें, और उनके विश्वास के अनुसार जो सत्य है वह सिखलाएँ और, ऐसा करते समय सिवाय उनके अपने पेशे में स्थापित विद्धत प्रक्रियाओं के मानदंडों के, अन्य किसी भी नियंत्रण से मुक्त रहें।

भूगोल-सम्बन्धी प्रश्नों का सबसे प्रारम्भिक अन्वेषण किससे शुरू हुआ ?

Correct Answer: (d) मानवीय विद्वत्ता का उद्भव
Solution:

भूगोल-सम्बंधी प्रश्नों का सबसे प्रारम्भिक अन्वेषण मानवीय विद्वता के प्रारम्भ से ही शुरू हुआ है लेकिन इसके बाद बौद्धिक प्रगति का पहला महत्वपूर्ण काल, जो पाश्चात्य जगत की लिखित परम्परा का भाग प्राचीन यूनान में मिलता है जो ईसा पूर्व तीसरी तथा चौथी शताब्दी में पराकाष्ठा पर पहुंचा है।

97. आगमनात्मक पद्धति का सम्बन्ध किससे है?

Correct Answer: (b) अनुभवजनित पर्यवेक्षित ज्ञान
Solution:

आगमनात्मक पद्धति का सम्बंध अनुभव जनित पर्यवेक्षित ज्ञान पर आधारित होती है। इसे अरस्तु द्वारा विकसित किया गया था। इन्होंने अवलोकन तथ्यों के सामान्यीकरण के रूप में अपनी अवधारणाओं को सूत्रबद्ध करने को वरीयता दी। अरस्तु ने सिद्धान्त से तार्किक निगमन करने के स्थान पर प्रत्यक्ष प्रेक्षण या अवलोकन करने के महत्व पर जोर दिया।

98. निम्नलिखित में से कौन अन्वेषण युग की विशेषता नहीं है?

Correct Answer: (c) अकादमिक प्रतिबन्ध
Solution:

पन्द्रहवी शताब्दी के उत्तरार्द्ध में अन्वेषण-युग प्रारम्भ होता है जब भौगोलिक ज्ञान के क्षितिज को पुनः विस्तारित किया गया। अन्वेषण युग में सत्य के संधान को प्रोत्साहन, नए प्रतिपादनों का सूत्रीकरण, धार्मिक विश्वासों को दुर्बल करना या चुनौती प्रस्तुत करना तथा अकादमिक स्वतंत्रता के सिद्धान्तों को स्थापित करने का संघर्ष शुरू हुआ।

99. स्थान निर्धारण की गणितीय परम्परा किससे सम्बन्धित ?

Correct Answer: (d) हिप्पार्कस
Solution:

स्थान निर्धारण की गणितीय परम्परा हिप्पार्कस से सम्बन्धित है। प्राचीन यूनानी दार्शनिकों ने भौगोलिक अध्ययन को लेकर दो मूल परम्पराएँ मिलती है, पहली परम्परा थेल्स से शुरू होने वाली गणितीय परम्परा से है जिसमें विषयों को सही स्थान पर अवस्थित करने वाले हिप्पार्कस सम्मिलित है

जिसका सार-संक्षेप टॉलमी ने किया तथा दूसरी परम्परा होमर से शुरू होने वाली साहित्यिक परम्परा है जिसमें हिकैटियस आते है तथा जिसका सारसंक्षेप स्टालो ने किया।

100. किसने सामान्य से विशिष्ट पद्धतियों के तर्क का प्रतिपादन किया ?

Correct Answer: (d) प्लेटो
Solution:

प्लेटो ने सामान्य से विशिष्ट पद्धतियों के तर्क का प्रतिपादन किया। उन्होने निगमनात्मक पद्धति को विकसित किया।