यू.जी.सी. NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 भूगोल (Shift-I)

Total Questions: 100

1. खाद्य और कृषि संगठन के अनुसार वर्ष 1990 से 2015 तक की अवधि के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से अग्रणी देश थे?

Correct Answer: (c) ब्राजील और इंडोनेशिया
Solution:

खाद्य और कृषि संगठन (F.A.O.) के अनुसार वर्ष 1990 से 2015 की अवधि के दौरान वनों के संदर्भ में निम्नलिखित में से ब्राजील और इंडोनेशिया अग्रणी देश थे।

2. संयुक्त राष्ट्र ऊर्जा सांख्यिकी 2022 के अनुसार विश्व में प्राकृतिक गैस के सबसे बड़े और द्वितीय सबसे बड़े उत्पादक देश कौन-से हैं?

Correct Answer: (a) संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस
Solution:

संयुक्त राष्ट्र ऊर्जा सांख्यिकी 2022 के अनुसार विश्व में प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा उत्पादक संयुक्त राज्य अमेरिका (23.41%) एवं उसके पश्चात रूस (17.14%) है।

3. दक्षिण अमेरिकी देशों में से कौन-सा दक्षिण अमेरिकी देश ‘ओपेक’ (ओ.पी.ई.सी.) का अंग है?

Correct Answer: (d) वेनेजुएला
Solution:

दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला ‘ओपेक’ (OPEC) का हिस्सा है। पेट्रोलियम निर्यातक देशों का समूह जिसे संक्षेप में ‘ओपेक’ कहा जाता है, इसकी स्थापना 1960 में इराक, ईरान, सऊदी अरब और वेनेजुएला की बैठक में हुई थी। इसका मुख्यालय ऑस्ट्रिया की राजधानी ‘वियना’ में है।

वर्तमान में ओपेक के सदस्य देशों की संख्या 13 है, जिनमें नाइजीरिया, इंडोनेशिया, कुवैत, इक्वाडोर, वेनेजुएला, ईरान, सऊदी अरब, अल्जीरिया, क़तर, यू.ए.ई., इराक, लीबिया तथा अंगोला शामिल हैं।

4. डिजिटल बिंब की व्याख्या के लिए निम्नलिखित में से किस बिंब संवर्धन विधि का अनुप्रयोग किया जाता है?

Correct Answer: (c) स्थानिक लक्षण बदलाव
Solution:

डिजिटल बिंब की व्याख्या के लिए निम्नलिखित में से ‘स्थानिक लक्षण बदलाव’ (Spatial feature Manipulation) संवर्धन विधि का अनुप्रयोग किया जाता है।

5. जब पृथ्वी के पटल में शैल विखंडन होता है और पुनः वही शैल पिंड भिन्न दिशाओं में गतिशील होते हैं, तो उसे कहा जाता है ______

Correct Answer: (c) भ्रंश
Solution:

जब पृथ्वी के पटल में शैल विखंडन होता है और पुनः वही शैल पिंड भिन्न दिशाओं में गतिशील होते हैं, तो उसे ‘भ्रंश’ (Fault) कहते हैं। वहीं ‘वलन’ (Fold) पृथ्वी के अंतर्जात बलों द्वारा उत्पन्न मोड़ को कहते हैं। जब क्षैतिज बल विपरीत दिशाओं में कार्य करते हैं तो ‘तनाव’ (Tension) की स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिससे चट्टानों में ‘दरारें’ (Cracks) देखने को मिलती हैं।

6. निम्नलिखित स्थलरूपों में से कौन-सा विवर्तनिक बलों के कारण निर्मित होता है?

Correct Answer: (a) रिफ्ट घाटी
Solution:

निम्नलिखित स्थलरूपों में ‘रिफ्ट घाटी’ (Rift Valley) का निर्माण विवर्तनिक बलों के कारण होता है तथा भ्रंशों से निर्मित प्रकार की आकृतियाँ बनती हैं। भ्रंश घाटी दो दरारों के बीच वाले भाग के नीचे धंस जाने से निर्मित होती है।

विश्व की सबसे बड़ी भ्रंश घाटी अफ्रीका की ‘महान भ्रंश घाटी’ (Great African Rift Valley) है। अंध घाटी कार्स्ट प्रदेश (Karst Region) में निर्मित होने वाली महत्वपूर्ण स्थलाकृति है, जिसमें स्थलतलीय U- आकार की घाटी हिमनदीय पर्वतीय भागों की घाटी है, जिनके किनारे खड़े ढाल वाले होते हैं तथा तली सपाट व चौरस होती है हिननदों की ये घाटियाँ अंग्रेजी के U-अक्षर से मिलती है।

V- आकार की घाटी - इसका निर्माण नदी के अपरदन द्वारा होता है इसमें दीवारो का ढाल अत्यन्त तीव्र तथा उत्तल होता है। सतह पर निर्मित सिंक होल (घोल रन्ध्र) से नदी का समस्त जल भूमिगत हो जाता है।

7. निम्नलिखित में कौन बृहत् संचलन का तीव्र प्रकार नहीं है?

Correct Answer: (d) मृदासर्पण (Solifluction)
Solution:

निम्नलिखित में मृदा सर्पण (Solifluction) बृहत संचलन का तीव्र प्रकार नही है। धरातलीय चट्टानों के नीचे की ओर ढलान की धीमी गति को 'मृदा सर्पण' कहा जाता है इसे एक प्रकार के सर्पण के रूप में भी परिभाषित किया जा सकता है

जो ठंडे क्षेत्रों या उच्च ऊँचाई पर होता है और तब होता है जब संतृप्त चट्टान कचरे का द्रव्यमान ढलान से नीचे बहता है। राक फॉल शैल गिरना, पंक प्रवाह तथा शैल परत अवपतन बृहत संचलन का तीव्र प्रकार है।

8. उष्णकटिबंधी चक्रवात के बनने के संबंध, निम्नलिखित में से कौन सा कारक सही नहीं है?

Correct Answer: (a) उष्णकटिबंधी चक्रवात निम्न अक्षांशों में भूमध्यरेखा के 5° के भीतर समुद्र पर बनते हैं।
Solution:

उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात के बनने के सम्बन्ध मे आवश्यक दशाएँ -

• उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात मुख्य रूप से 5° - 15° अंक्षाशो के मध्य दोनों गोलाद्ध में सागरों के ऊपर पाये जाते हैं। ये सामान्यतया भूमध्य रेखा के दोनो ओर 5°अक्षांशो के मध्य बिल्कुल नही दिखाई पड़ते हैं, जिसका मुख्य कारण क्षीण कोरियालिस बल के पाये जाने से है।

• उष्ण कटिबन्धीय चक्रवातों की उत्पत्ति के लिए समुद्री जल का तापमान ~27°C होना चाहिए।

• गति अथवा ऊँचाई के साथ दिशा में अत्यल्प परिवर्तन के साथ क्षीण वायु आवश्यक है।

• गर्म एवं आर्द्र वायु की लगातार आपूर्ति होती रहनी चाहिए

अतः उपर्युक्त में से विकल्प (a) सही नहीं है।

9. कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के संबंध में निम्नलिखित में से क्या सही नहीं है

Correct Answer: (b) BS - शुष्क मरूस्थली जलवायु
Solution:

जर्मन वनस्पति विज्ञानी वेत्ता' तथा जलवायु विज्ञानवेत्ता ब्लाडीमीर कोपेन ने सन् 1900 में विश्व की जलवायु का वर्णनात्मक वर्गीकरण प्रस्तुत किया, जो कैण्डोल द्वारा 1874 में प्रस्तुत विश्व का वनस्पति कटिबन्ध (Vegetation Zone) पर आधारित था। कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के सम्बन्ध में प्रयुक्त शब्दों की व्याख्या इस प्रकार है।
(i) Af उष्ण कटिबन्धीय आर्द्र जलवायु जिसमे शुष्कतम महीनें में भी वर्षा 6 cm से अधिक होती है वर्षा का मौसमी वितरण समान होता है तथा वार्षिक एवं दैनिक तापान्तर न्यूनतम होता है।
(ii) BS अर्द्धशुष्क स्टेपी जलवायु
(iii) Cfb समुद्रीय पश्चिमी तट जलवायु
(iv) ET टुन्ड्रा जलवायु उष्णतम महीने का तापमान 10°C से कम, किन्तु O C से अधिक होता है।
(v) BW शुष्क मरूस्थलीय जलवायु
अतः उपर्युक्त विकल्प में से विकल्प (b) सही सुमेलित नहीं है।

10. तीन-सेल वाले परिचालन मॉडल में, हेडली सेल को चलाने वाली ऊर्जा की निम्नलिखित में से किस द्वारा आपूर्ति की जाती है?

Correct Answer: (d) कपासी वर्षा मेघों के निर्माण के दौरान उत्सर्जित गुप्त उष्मा।
Solution:

हेडली सेल को चलाने में भूमध्य रेखा से उठने वाली गर्म एवं आर्द्र हवाएं संघनन से निर्मित कपासी वर्षा मेघों में मुक्त हुई गुप्त उष्मा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ताप तथा गतिक कारणों से वायुमंडलीय पवनों के प्रवाह प्रारूप को वायु मण्डलीय त्रिकोशिकीय परिसंचरण या वायुमण्डलीय सामान्य परिसंचरण कहा जाता है। यह परिसंचरण महासागरीय जल को भी गतिमान करता है,

जो पृथ्वी की जलवायु को प्रभावित करती है। उष्ण कटिबन्धीय हेडली सेल कोशिका के अन्तर्गत भूमध्यरेखा पर हवाएँ गर्म होकर ऊपर उठती है तथा ऊँचाई पर जाकर उत्तर तथा दक्षिण दिशाओं की ओर मुड़ जाती है।

भूमध्यरेखा पर स्थानापूर्ति के लिए उपोष्ण कटिबंधीय उच्च दबाव से हवाएँ भूमध्यरेखा की ओर चलने लगती है। भूमध्यरेखा (5°N - 5°S) पर ऊपर उठी हवाएँ उपोष्ण उच्च वायुदाब (30°N 30°5) के पास नीचे उतरती हैं तथा पुनः भूमध्यरेखा की ओर धरातलीय पवनों के रूप में चल पड़ती हैं।