उनका मानना था कि यदि दुर्भिक्ष, रोग या युद्ध के कारण आवधिक रूप से मृत्यु दर में वृद्धि होती है और जनसंख्या की वृद्धि घटती है केवल तभी संतुलन बनाए रखा जा सकता है। इंग्लैंड और फ्रांस में 19वीं शताब्दी के कई अन्य अध्ययनों ने उनके निराशावादी विचारों को स्वीकार किया था।
19वीं शताब्दी के अंत में इंग्लैंड की जनसंख्या लगभग 10 मिलियन थी लेकिन उसकी अधिकतर खाद्य आपूर्ती को देश की सीमित भूमि में उत्पादन करना पड़ता था। भूमि पर काश्तकारी के नियमों में परिवर्तन से पुराने सामान्य खेतों को सीमाबद्ध किया और छोटे- विखरे भूखंडों के स्थान पर बड़े खेतों निर्माण से ग्रामीण विजनसंख्या (डिपॉपुलेशन) हुई।
कस्बे, विशेषतया वे, जहाँ नये फैक्ट्रीयों की स्थापना की गयी थी, तेजी से बढ़ते गये और अत्यधिक भीड़-भाड़ वाले, गंदे आर अस्वास्थप्रद हो गए। इनमें रहने वाले व्यक्ति गरीब, अल्प पोषित, अतिरिक्त श्रम वाले थे,
जिनका बीमारियों से प्रतिरक्षण सीमित था। इस प्रकार, यदि खाद्य आपूर्ति कम की जाती या जनसंख्या का तेजी से विस्तार होता तो व्यक्ति भुखमरी से ग्रस्त होते और महामारी से जनसंख्या कम हो जाती।
यह इंग्लैंड के इतिहास में पहले भी दो बार हो चुका थाः 14वीं शताब्दी में "ब्लैक डेथ्स" और सत्रहवीं शताब्दी में "ग्रेट प्लेग" का संयोग कम पैदावार तथा खाद्यान कमी से रहा । भुखमरी ने बीमारियों से प्रतिरक्षण क्षमता घटाई और बुबोनिक प्लेग से हजारों व्यक्तियों की मृत्यु हुई थी। माल्थस को डर था कि कुछ इसी प्रकार की स्थिति फिर उत्पन्न होगी।
उनके समय काल में हैजा, आंत ज्वर और चेचक (स्मॉलपॉक्स) जैसी उन बीमारियों के इलाज एवं नियंत्रण के लिए बहुत उन्नति हुई, जो इंग्लैंड और यूरोप में तब भी पांव पसार रही थी। इसका अर्थ यह है कि मृत्यु दरों और विशेषतया शिशु मृत्यु दरों में गिरावट हो रही थी।
माल्स ने परिकलन किया कि जनसंख्या प्रत्येक 25 वर्षों में दोगुनी हो सकती है, लेकिन इसके समतुल्य खाद्य आपूर्ति की अपेक्षा नहीं की जा सकती। वह उन जबरदस्त परिवर्तनों का पूर्वानुमान नहीं लगा सके जो 19 वीं और 20वीं शताब्दी में होने थे।
माल्थस के अनुसार जनसंख्या वृद्धि और पृथ्वी के संसाधनों के बीच क्या सम्बन्ध है?
Correct Answer: (a) जनसंख्या पृथ्वी से जीवन-निर्वाह के लिए उत्पादन की तुलना में तेजी से बढ़ती है।
Solution:माल्थस के अनुसार जनसंख्या वृद्धि और पृथ्वी के संसाधनों का जीवन निर्वाह के लिए उत्पादन की तुलना में तेजी से बढ़ती है। उनका मानना था कि यदि दुर्भिक्ष, रोग या युद्ध के कारण आवधिक रूप से मृत्युदर में वृद्धि होती है और जनसंख्या का वृद्धि घटती है। परिणामस्वरूप तभी संतुलन बनाया जा सकता है।