Solution:स्काटिश भूगोलवेत्ता 'जेम्स हट्टन' (1726-1997) ने अपनी पुस्तक 'थ्योरी ऑफ अर्थ' (theory of Earth) में सर्वप्रथम 1785 ई. में 'एकरुपतावाद' (Uniformitarianis) का सिद्धान्त दिया। इसी पुस्तक में उन्होंने 'वर्तमान भूत की कुँजी है'
कथन दिया या जिसे आगे चलकर उनके शिष्यों 'जॉन प्लेफेयर' (John Playfair) और 'चार्ल्स ल्येल' ने परिमार्जित किया।
अमेरिकी भूगोलवेत्ता 'विलियम मोरिस डेविस' को अपरदन चक्र के सिद्धान्त का विकास' करने के लिए, डार्विन की प्रसिद्ध पुस्तक 'ओरिजिन ऑफ स्पीसीज' (Origin of Species) जिसमें प्राकृतिक चयन का सिद्धान्त के साथ-साथ 'एटाल' (Atoll) की उत्पत्ति के बारे में डार्विन के कार्य और समय के साथ-साथ जैविक प्रजाति के धीरे-धीरे रुपान्तरण के विचार को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
एच. जे. फ्लूअर ने अपने राज्यों एवं शहरों से सम्बन्धित नगरीय आकारिकी (City forms) के विवेचन में 'ऐतिहासिक परम्पराओं' पर जोर दिया वही नस्लों के अध्ययन में डार्विन से प्रभावित होकर मानवीय अध्ययनों की एकता पर बल देता है।