यू.जी.सी. NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिस. 2020 जून 2021 समाजशास्त्र

Total Questions: 100

91. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्न का उत्तर दीजिए:

'ज्ञान' की अस्पष्ट अवधारणा के लिए पुरातत्व संबंधी इस चर्चा के अप्रासंगिकता को देखते हुए उपयुक्त अर्थ का आना अभी बाकी है। इसे सहज 'प्रतिक्रियाओं' द्वारा कम से कम अलग किया गया है। इसे प्रसिद्ध मनोविज्ञान अवधारणाओं 'स्मृतियों' से अलग किया गया है और ये सब वैयक्तिक और निजी होता है। प्राचीन प्रस्तर युग के हाथ के हथौड़े से जुड़ा ज्ञान उपयोगी और सार्वजनिक था। इसने हमारे सुदूर के पूर्वगामियों अथवा पूर्वजों को उपयोगी औजारों को बनाने में सहायता की क्योंकि उन्हें अपने शरीर के अवयवों और अंगों की कमजोरियों को पूरा करने के लिए इनकी अवश्यकता थी। इसे उन सभी लोगों द्वाग संततियों को प्रसारित और हस्तांतरित किया गया जिन्होंने हाथ के हथौड़े का निर्माण किया। इस प्रकार इस ज्ञान को संरक्षित किया गया परन्तु इसे केवल संरक्षित ही नहीं किया गया। इस ज्ञान का उन्नयन और विस्तार भी किया गया। दो अथवा तीन सौ हजार वर्ष की अवधि में पुरातत्वविद् बनाए गए हाथ के हथौड़े रूप में हुए सुधारों को ढूंढ़ सकता है जो उनके निर्माण की तकनीक में परिवर्तन को भी ढूँढ़ सकता है। कम प्रयास द्वारा ही बहुत प्रभावी औजारों का निर्माण किया गया। ये प्रभावी परिवर्तन ज्ञान में बढ़ोत्तरी को, खोजों को तथा आविष्कारों को दर्शाते हैं जिन्हें सार्वजनिक किया गया था तथा परंपरागत, विद्या (जनश्रुति) अथवा प्रयुक्त ज्ञान में समाहित किया गया और इन्हें प्राचीन प्रस्तर युगीन समाजों में हस्तांतरित और रखरखाव किया गया। पुरातत्वविदों द्वारा देखे गए इस प्रभावी परिवर्तन 'हाथ का हथौड़ा' मात्र एक सामान्य तकनीकी विकास का मामला है और वह भी हाथ से बनाए गए पत्थर और हड्डी के सरल औजार से लेकर धातुमिश्र से निर्मित जटिल मशीनों तक और कृत्रिम पदार्थों से निर्मित मशीनें जिन्हें विद्युत द्वारा और यहाँ तक कि नाभिकीय ऊर्जा द्वारा चलाया जाता है। यह वह तकनीकी प्रगति है जिसने मानव प्रजाति को जीवन मापन के लिए सभी प्रतिद्वंद्वियों से मानक जाति की जीत को सुनिश्चित किया है। परन्तु तकनीकी विकास अपने आप में ज्ञान संचालन का परिणाम और प्रभाव है। यह संचलन इसलिए संभव था क्योंकि मानव ज्ञान सार्वजनिक था, किसी भी प्रजाति का एक सदस्य अपने अर्जित ज्ञान को दूसरे तक प्रसारित करता था।

पुरातत्वविद हाथ के हथौड़े के रूपों और ______ में परिवर्तन को ढूंढ़ सकते हैं।

Correct Answer: (c) उत्पाद की तकनीक
Solution:प्रश्नगत गद्यांश के अनुसार, पुरातत्वविद हाथ के हथौड़े के रूपों और उत्पाद की तकनीक में परिवर्तन को ढूँढ़ सकते हैं।

92. प्राचीन पाषाण युग में हाथ की कुल्हाड़ी में निहित ज्ञान क्या था?

Correct Answer: (d) उपयोगी
Solution:प्रश्नगत गद्यांश के अनुसार, प्राचीन पाषाण युग में हाथ की कुल्हाड़ी में निहित ज्ञान उपयोगी था।

93. तकनीकी विकास किसके संचयन का परिणाम है?

Correct Answer: (a) ज्ञान
Solution:प्रश्नगत गद्यांश के अनुसार, तकनीकी विकास ज्ञान के संचयन का परिणाम है।

94. ज्ञान में अंतर के भेद पर किसके माध्यम से बल दिया गया है?

Correct Answer: (c) स्मृतियाँ
Solution:प्रश्नगत गद्यांश के अनुसार, ज्ञान में अंतर के भेद पर स्मृतियों के माध्यम से बल दिया गया है।

95. वे औजार जिन्हें उपयोग में लाया जा सकता है उनकी आवश्यकता किसकी कमियों को पूरी करने के लिए थी?

Correct Answer: (a) शरीर के अवयव (अंग)
Solution:प्रश्नगत गद्यांश के अनुसार, वे औजार जिन्हें उपयोग में लाया जा सकता है उनकी आवश्यकता शरीर के अवयव (अंग) की कमियों को पूरी करने के लिए थी।

96. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और नीचे दिए गए प्रश्न का उत्तर दीजिए

भारत में नौकरशाही समाज के आधुनिकीकरण तथा एक सहमति जन्य मानकीय व्यवस्था के विकास हेतु सर्वाधिक स्थायी संरचनात्मक नींव प्रदत्त करती है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि नौकरशाही को आंतरिक सांस्कृतिक तनाव का सामना करना पड़ता हैं ये तनाव नौकरशाहें के अंतर संरचनात्मक सहभागिता में भूमिका द्वंद्व से उत्पन्न होते हैं, उनकी परिवार, जाति तथा सगोत्र अभिमुखी अनन्यता (पार्टि कुलारिज्म) उनकी नौकरशाह-सुलभ भूमिका में सार्वजनीकरण की विचारधारा से टकराव उत्पन्न कर सकते हैं, उनकी 98. व्यक्तिगत निष्ठा उनके 'कार्यालय' के विधिक अनामख तथा अमूर्तता के बीच से निकल सकती है। परन्तु इन खतरों को इस मिथ्या धारणा पर आवश्यक महत्त्व दिया गया तथा उन पर आवश्यकता से अधिक बल दिया गया है कि वे तनाव एकांतिक रूप से भारतीय समाज के अल्प 'विकसित' तथा पारंपरिक स्वरूप से उत्पन्न होते हैं : जब हम इस पर गहराई से विचार करते हैं तो पाते हैं कि अनेक अकार्यों का संबंध समूहों तथा वर्गों के शक्ति तथा सापेक्ष वचन की घटनाओं से होना प्रतीत होता है। इस स्वरूप में नौकरशाही के ऐसे अकार्यों की तुलना पश्चिमी समाज में विद्यमान अकार्यों से की जा सकती है। इस गलत पूर्वधारणा से कोई यह भी बात निकलकर आती है कि प्रकार्यात्मक रूप से समकक्ष प्रक्रियाओं तथा परिणामों ऐसी संरचनात्मक रूप से समान वृद्धि होगी। ऐसे अधिकांश चिंतन में अधिकांश भ्रांति होती है जिसमें पारंपरिक समाज के आधुनिकीकरण की बात होती है?

भारतीय नौकरशाही के विषय में क्या माना जाता है?

Correct Answer: (b) प्रकार्यात्मक समकक्ष सर्वत्र कार्य करते हैं
Solution:प्रश्नगत गद्यांश के अनुसार, भारतीय नौकरशाही के विषय में प्रकार्यात्मक समकक्ष सर्वत्र कार्य करते हैं।

97. भारतीय नौकरशाही को निम्नलिखित में से मुख्यतया किसका सामना करना पड़ता है?

Correct Answer: (b) आंतरिक सांस्कृतिक तनाव
Solution:प्रश्नगत गद्यांश के अनुसार, भारतीय नौकरशाही को मुख्यतया आंतरिक सांस्कृतिक तनाव का सामना करना पड़ता है।

98. भारत में नौकरशाहों की क्या प्रवृत्ति है जिसके कारण नौकरशाही संरचना अकार्यात्मक हो जाती है?

Correct Answer: (a) जाति तथा सगोत्र अभिमुख अनन्यता
Solution:प्रश्नगत गद्यांश के अनुसार, भारत में नौकरशाहों की जाति तथा सगोत्र अभिमुख अनन्यता की प्रवृत्ति है, जिसके कारण नौकरशाही संरचना अकार्यात्मक हो जाती है।

99. निम्नलिखित में से कौन-सी संस्था भारतीय समाज की स्थायी संरचनात्मक नींव तथा मानकीय व्यवस्था में वृद्धि प्रदान करती है?

Correct Answer: (b) नौकरशाही
Solution:प्रश्नगत गद्यांश के अनुसार, नौकरशाही संस्था भारतीय समाज की स्थायी संरचनात्मक नींव तथा मानकीय व्यवस्था में वृद्धि प्रदान करती है।

100. भारतीय समाज में अकार्य का संबंध निम्नलिखित में से किससे होना प्रतीत होता है?

Correct Answer: (a) असमानता
Solution:प्रश्नगत गद्यांश के अनुसार, भारतीय समाज में अकार्य का संबंध शक्ति तथा सापेक्ष वंचन से होना प्रतीत होता है।