यू.जी.सी. NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2021 जून-2022 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

31. निम्नलिखित में से कौन सा कांट को स्वीकार्य नहीं है?

Correct Answer: (d) संश्लेषणात्मक निर्णय शत प्रतिशत निश्चित ज्ञान देते हैं
Solution:

"संश्लेषणात्मक निर्णय शत प्रतिशत निश्चित ज्ञात देते हैं।" यह विचार काण्ट को स्वीकार्य नहीं है। काण्ट ने ज्ञान की परिभाषा में कहा कि "ज्ञान संश्लेषणात्मक प्रागनुभविक निर्णयों की व्यवस्था है।" इस परिभाषा का विश्लेषण तीन शब्दों के आधार पर किया जा सकता है-
(i) निर्णय (ii) संश्लेषणात्मक (iii) प्रागनुभविका काण्ट ने कहा कि निर्णय प्रतिज्ञप्ति है जिसमें उद्देश्य और विधेय दोनों होते हैं। प्रतिज्ञप्तियां भी दो प्रकार की हो सकती हैं- संश्लेषणात्मक व विश्लेषणात्मक ।
संश्लेषणात्मक प्रतिज्ञप्ति वह है जिसका विधेय पद, उद्देश्य पद के संबंध में कोई नई सूचना प्रदान करें। जबकि विश्लेषणात्मक प्रतिज्ञप्ति वह है जिसका विधेय पद उद्देश्य पद की ही व्याख्या करता है कोई नयी सूचना नहीं देता है। प्रतिज्ञप्तियों को अनुभव की अपेक्षा के आधार पर पुनः दो वर्गों में बांटा जा सकता है- (i) आनुभविक प्रतिज्ञप्ति (ii) प्रागनुभविक प्रतिज्ञप्ति । आनुभविक प्रतिज्ञप्ति की सत्यता अनुभव के आधार पर स्थापित होती है जबकि प्रागनुभविक प्रतिज्ञप्ति अनुभव से निरपेक्ष और अनिवार्य होती है।
काण्ट ने इन दोनों आधारों पर किए गए भेदों को परस्पर मिलाया और पाया की संश्लेषणात्मक प्रागनुभविक प्रतिज्ञप्ति वह है जो प्रागनुभविक होने के कारण अनिवार्य और सार्वभौम ज्ञान देती है, संश्लेषणात्मक होने के कारण उसमें नवीनता भी होती है।
विश्लेषणात्मक प्रागनुभविक प्रतिज्ञप्तियों में नवीनता नहीं होती। संश्लेषणात्मक आनुभविक प्रतिज्ञप्तियों में अनिवार्यता तथा सार्वभौमिकता नहीं होती जबकि विश्लेषणात्मक आनुभविक प्रतिज्ञप्ति संभव ही नहीं है।

32. डेकार्ट के अनुसार असंगत क्या है?

Correct Answer: (c) इन्द्रिय अनुभव को समस्त ज्ञान के प्रवेशद्वार के रूप में देखना
Solution:

डेकार्ट इन्द्रिय अनुभव को समस्त ज्ञान के प्रवेश द्वार के रूप में नहीं मानता है। डेकार्ट ने बुद्धिवादी ज्ञानमीमांसा को चुना है। डेकार्ट का आदर्श बुद्धिवाद है और बुद्धिवादी ज्ञानमीमांसा का आदर्श गणित है। अतः स्वाभाविक है कि डेकार्ट दर्शन में गणितीय पद्धति का प्रयोग करना चाहता है।
वह कहता है कि गणितीय पद्धति से प्राप्त ज्ञान में निश्चितता, स्पष्टता और सुभिन्नता होती है। डेकार्ट के समर्थकों ने यांत्रिक समन्वय के संबंध में एक नई व्याख्या प्रस्तुत की। इसके अनुसार आत्मा और शरीर के संबंध की स्थापना ईश्वर स्वयं करता है मानसिक संकल्प तथा शारीरिक उत्तेजनाएं वे अवसर है। जिनका उपयोग करके ईश्वर उनके समतुल्य स्थिति पैदा करता है। ईश्वर हर क्षण यह नहीं करता उसने ब्रह्माण्ड की गति और आत्मा की क्रियाओं के मध्य एक ऐसा संबंध बना दिया है जिससे यह व्यवस्था स्वतः परिचालित होती रहती है।
ग्यूलिंक्स ने एक घड़ी साज द्वारा बनाई गई दो घड़ियों के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया कि जिस प्रकार दो घड़ियां स्वतंत्र होकर भी एक दूसरे से सुसंगत हैं उसी प्रकार ईश्वर निर्मित व्यवस्था के कारण आत्मा व शरीर परस्पर स्वतंत्र होकर भी परस्पर सुसंगत है।

33. सूची - I को सूची - II से सुमेलित कीजिए:

सूची - Iसूची - II
A. भासर्वज्ञI. तत्त्वोपप्लव सिंह
B. जयराशिभट्टII. न्यायसार
C. हेमचन्द्रIII. विज्ञानमात्रतासिद्धि
D. वसुबन्धुIV.प्रमाणमीमांसा

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

Correct Answer: (b) A- II, B- I, C- IV, D - III
Solution:

सही समेल निम्नवत है-

सूची - Iसूची - II
A. भासर्वज्ञII. न्यायसार
B. जयराशिभट्टI. तत्त्वोपप्लव सिंह
C. हेमचन्द्रIV. प्रमाणमीमांसा
D. वसुबन्धुIII. विज्ञानमात्रतासिद्धि

34. निम्नलिखित में किस समकालीन भारतीय विचारक ने विचार दिया कि आत्मज्ञान स्वयं के बारे में जानने के बराबर है?

Correct Answer: (c) जिद्द कृष्णामूर्ति
Solution:

जिद्द कृष्णमूर्ति एक समकालीन भारतीय विचारक थे। इन्होंने विचार दिया की आत्मज्ञान स्वयं के बारे में जानने के बराबर है।

35. निम्नलिखित में से किसने डेकार्टवादी बुद्धिवाद की आलोचना की थी?

Correct Answer: (d) ह्यूम
Solution:

ह्यूम ने डेकार्टवादी बुद्धिवादी की आलोचना की थी। ह्यूम अनुभववादी हैं इन्होने कहा कि हमारा संपूर्ण ज्ञान अनुभव या प्रत्यक्ष पर आधारित है। ह्यूम ने कहा कि संवेदना या विज्ञान के अतिरिक्त हमें "किसी सत्य का ज्ञान नहीं हो सकता। इन्द्रियानुभव से किसी नित्य और अपरिणामी द्रव्य की, चाहे वह जड़ हो या चेतन, सिद्धि नहीं हो सकती है।
विज्ञानों के अनुभविता के रूप में आत्मा की कल्पना करना असंगत है क्योंकि क्षणिक विज्ञान ही स्वयं अपनी अनुभविता हैं। नित्य, एक, समरस और कूटस्थ आत्मा का हमें कभी अनुभव नहीं हो सकता, क्योंकि हमारे विज्ञान जिनका हमें अनुभव हो सकता है अनित्य, अनेक, विशेष और क्षणिक है।
इन क्षणिक संवेदनों या विज्ञानों में सादृश्य और आनन्तर्य है एकता और नित्यता नहीं। तथाकथित आत्मा वस्तुतः क्षणिक संवेदनों या विज्ञानों का निरंतर प्रवाह मात्र है। सुषुप्ति में यह धारा टूट जाती है अतः हमें आत्मा का अनुभव नहीं होता है। इस संवेदन पुंज को हम आत्मा का रूप दे देते हैं। यह हमारी कल्पना है वास्तविक तथ्य नहीं।

36. निम्नलिखित न्यायवाक्य पर विचार कीजिए और इनमें व्याप्त दोष पहचानिएः

कुछ मित्र धनवान हैं
कोई धनवान मित्र मददगार नहीं है
कोई मददगार व्यक्ति मित्र नहीं है।

Correct Answer: (a) अवैध मुख्य पद
Solution:

37. "आत्मानुभूति परम शुभ है" यह मत किसके द्वारा संपोषित है:

कठोरतावाद
आत्मप्रसादवाद
भाववाद
अहम्वाद
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

Correct Answer: (b) केवल A और B
Solution:

'आत्मानुभूति परम शुभ है' यह मत संकीर्णवाद तथा आत्मप्रसादवाद का है।

38. "ईश्वर अविचल गतिकर्ता है; निम्र में से ये कथन किसका है?

Correct Answer: (d) अरस्तू
Solution:

'ईश्वर अविचल गतिकर्ता है' यह विचार अरस्तू का है। विकासवाद की व्याख्या करते हुए अरस्तू ने विकास के कई स्तर बताए हैं जिसमें अंतिम स्तर शुद्ध आकार का है।
यह स्तर अनुभवातीत है तथा यह शुद्ध आकार ईश्वर ही है। यहाँ ईश्वर को निमित्त कारण के रूप में स्वीकार किया गया है जो कि पदार्थ और आकार के संयोग के लिए गति प्रदान करके विकास आरम्भ करता है। इस शुद्ध आकार को ही अरस्तू ने यहाँ 'गतिहीन चालक' कहा है जो स्वयं गतिहीन रहते हुए भी पूरे जगत की गति का कारण है।

39. अस्पष्टता के नीतिशास्त्र का प्रतिपादन किसने किया है?

Correct Answer: (c) सिमोन दि बोवा
Solution:

'अस्पष्टता' के नीतिशास्त्र का प्रतिपादन सिमोन दि बोवा ने किया है। सिमोन दि बोवा जर्मन की प्रसिद्ध लेखिका थी यह अपने नारीवादी लेखों के लिए प्रसिद्ध थी।

40. निम्रलिखित न्यायवाक्य पर विचार कीजिए और इसमें व्याप्त दोष को पहचानिए

कोई कुत्ते दो पैर वाले नहीं हैं
कोई बिल्ली दो पैर वाली नहीं है।
कोई बिल्ली कुत्ता नहीं है

Correct Answer: (c) दो निषेधात्मक आधारवाक्य का दोष
Solution: