Solution:ह्यूम ने डेकार्टवादी बुद्धिवादी की आलोचना की थी। ह्यूम अनुभववादी हैं इन्होने कहा कि हमारा संपूर्ण ज्ञान अनुभव या प्रत्यक्ष पर आधारित है। ह्यूम ने कहा कि संवेदना या विज्ञान के अतिरिक्त हमें "किसी सत्य का ज्ञान नहीं हो सकता। इन्द्रियानुभव से किसी नित्य और अपरिणामी द्रव्य की, चाहे वह जड़ हो या चेतन, सिद्धि नहीं हो सकती है।
विज्ञानों के अनुभविता के रूप में आत्मा की कल्पना करना असंगत है क्योंकि क्षणिक विज्ञान ही स्वयं अपनी अनुभविता हैं। नित्य, एक, समरस और कूटस्थ आत्मा का हमें कभी अनुभव नहीं हो सकता, क्योंकि हमारे विज्ञान जिनका हमें अनुभव हो सकता है अनित्य, अनेक, विशेष और क्षणिक है।
इन क्षणिक संवेदनों या विज्ञानों में सादृश्य और आनन्तर्य है एकता और नित्यता नहीं। तथाकथित आत्मा वस्तुतः क्षणिक संवेदनों या विज्ञानों का निरंतर प्रवाह मात्र है। सुषुप्ति में यह धारा टूट जाती है अतः हमें आत्मा का अनुभव नहीं होता है। इस संवेदन पुंज को हम आत्मा का रूप दे देते हैं। यह हमारी कल्पना है वास्तविक तथ्य नहीं।