Solution:वैदिक साहित्य में ऋत् की समानता सत्य और धर्म दोनों से की गई है। वैदिक साहित्य में 'ऋत्' सही, सनातन प्राकृतिक व्यवस्था और संतुलन के सिद्धांत को कहते हैं। अर्थात वह तत्व जो पूरे संसार और ब्रह्माण्ड को धार्मिक स्थिति में रखे या लाए। वैदिक संस्कृत में इसका ठीक से अर्थ है- जुड़ा हुआ, सत्य, सही या सुव्यवस्थित। यह हिन्दू धर्म का एक मूल सिद्धान्त है।