यू.जी.सी. NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2021 जून-2022 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

51. कांट में संवेदना और धारणा का जो सामंजस्य करता है, वह मनः शक्ति क्या है?

Correct Answer: (b) आत्मबोध की अतीन्द्रिय एकता
Solution:

काण्ट में संवेदना और धारणा का जो सामंजस्य करता है वह मनः शक्ति आत्मबोध की अतीन्द्रिय एकता है। काण्ट ने अतीन्द्रिय निगमन के अंतर्गत तार्किक आत्मा का भी विश्लेषण किया है और बताया की बुद्धि ज्ञान की प्रक्रिया कैसे पूर्ण करती है। काण्ट के अनुसार हम ह्यूम की तरह तात्विक आत्मा को तो स्वीकार नहीं कर सकते किंतु तार्किक रूप से एक ज्ञानात्मक क्षमता को स्वीकार करना होगा जिसे उसने 'समाकल्पन की संश्लेषणात्मक एकता' कहा। इसके अंतर्गत न केवल बुद्धि की कोटियां बल्कि संवेदन की प्रक्रिया से जुड़ी तीन क्षमताएँ भी निहित हैं-
(i) सहज प्रत्यक्ष करते हुए विभिन्न संवेदनाओं को धारण करने की योग्यता
(ii) उन संवेदनाओं को कल्पना के माध्यम से स्मरण कर पाने की योग्यता
(iii) संप्रत्यय निर्माण के लिए संवेदनाओं को पहचान पाने की योग्यता बुद्धि विकल्प इसी तार्किक आत्मा में विद्यमान हैं और ज्ञान को संभव बनाते हैं।

52. निम्नलिखित में से किसमें यह मान्यता है कि जैन मीमांसा में प्रत्यक्ष ज्ञान दूसरों के विचारों से प्राप्त होता हैं।?

Correct Answer: (c) मनः पर्याय
Solution:

'मनः पर्याय' के अनुसार जैन मीमांसा में प्रत्यक्ष ज्ञान दूसरों के विचारों से प्राप्त होता है।

53. दार्शनिकता की दृष्टि से सेंट एंसलम को क्या स्वीकार्य नहीं है?

Correct Answer: (d) तर्क का परित्याग करना
Solution:

दार्शनिकता की दृष्टि से सेंट एन्सलम को स्वीकार्य है-
(i) आस्था
(ii) आस्था को समझना।
(iii) यह समझना की 'आविर्भाव क्यों सत्य है।"
जबकि तर्क का परित्याग करना उन्हें स्वीकार्य नहीं है।

54. निम्नलिखित में से कौन सा स्पिनोज़ा के साथ सुसंगत हैं?

Correct Answer: (a) मन और जड़ वस्तु द्रव्य के समानांतर गुण हैं।
Solution:

स्पिनोजा 'मन और जड़ वस्तु' को द्रव्य के समानान्तर गुण मानते हैं। स्पिनोजा का मानना है की मन और देह (जड़) भिन्न तो हैं परन्तु विरोधी नहीं है क्योंकि प्रत्येक वस्तु में चैतन्य और विस्तार सामानान्तर रूप में व्यक्त होते हैं। स्पिनोजा ने गुणों की व्याख्या द्रव्य के सार तत्व के रूप में की है।
चूंकि द्रव्य असीमित व निरपेक्ष है इसलिए उसमें गुणों की संख्या भी असीमित है लेकिन मानवीय बुद्धि की सीमा यह है की वह द्रव्य या ईश्वर के अनंत गुणों में से मात्र दो गुणों को जान पाती है क्योंकि मनुष्य में यही दो गुण होते हैं- (i) चैतन्य और विस्तार।

55. नीचे दो कथन दिए गए है:

कथन - I: राधाकृष्णन ने विश्व की प्रकृतिवादी व्याख्या को अस्वीकार किया क्योंकि वह परम सत् की प्रकृति के महत्व को समझने में विफल रहा
कथन - II: निरपेक्ष को राधाकृष्णन द्वारा शुद्ध चेतना शुद्ध स्वतंत्रता और अनन्त संभावना के रूप में प्रकट किया गया।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (a) कथन । और II दोनों सत्य हैं
Solution:

प्रश्नगत कथन (i) राधाकृष्ण ने विश्व की प्रकृतिवादी व्याख्या को अस्वीकार किया क्योंकि वह परम सत की प्रकृति के महत्व को समझने में विफल रहा।" असत्य है। परन्तु कथन (ii) "निरपेक्ष को राधाकृष्णन् द्वारा शुद्ध चेतना और शुद्ध स्वतंत्रता और अनन्त संभावना के रूप में प्रकट किया गया।" सत्य है।

56. लोक संग्रह निम्न के लिए प्रयुक्त होता है:

A. फलहीन कार्यकलाप
B. नैतिक कार्यकलाप
C. धार्मिक कार्यकलाप
D. लोक कल्याण कार्यकलाप
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (d) केवल D
Solution:

लोक संग्रह को प्राप्त साधक अपने अन्दर की पूर्णता से तृप्त होकर किसी भी व्यक्ति या पदार्थ पर स्वार्थ रूप में आश्रित नहीं होते। यह सिद्धि इतनी विलक्षण होती है कि उसके प्रत्येक कर्म भगवदकर्म बन जाते हैं।
गीता में कृष्ण ने अर्जन से कहा "अर्जुन तू निरंतर आसक्ति रहित होकर (फलहीन क्रियाकलाप) सदा ही कर्त्तव्य कर्मों को करता रह क्योंकि आसक्ति से रहित होकर कर्म करता हुआ मनुष्य परमात्मा को प्राप्त हो जाता है।"

57. पी.एफ.स्ट्रॉसन के अनुसार, व्यक्ति की संकल्पना - कि वह चित्त का मूर्त अवधान है- एक पुरातन अवधारणा है और तर्क के मामध्य से स्ट्रॉसन ने निम्नलिखित में से किसे अस्वीकार किया है:

Correct Answer: (a) मनोवैज्ञानिक व्यवहारवाद और कार्टीजन द्वैतवाद
Solution:

पी.एफ. स्ट्रासन के अनुसार व्यक्ति की संकल्पना कि वह चित्त का मूर्त अवधान है एक पुरातन अवधारणा है और तर्क के माध्यम से स्ट्रासन ने 'मनोवैज्ञानिक व्यवहारवाद और कार्टीजन द्वैतवाद' को अस्वीकार किया है।

58. किस विचारधारा का यह मत है कि एक ही समय में घट है भी और नहीं भी, ऐसी मान्यता विरोधाभाषी नहीं है?

Correct Answer: (c) जैन
Solution:

जैन मत के अनुसार एक ही समय में घट है भी और नहीं भी है, ऐसी मान्यता, विरोधाभासी नहीं है। जैन दर्शन के सप्तभंगीनय सिद्धांत 'स्यात अस्ति च' नास्ति च' के अनुसार वस्तु की सत्ता एक अन्य दृष्टिकोण से हो भी सकती है और नहीं भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में 'स्यात है और स्यात नहीं है' का ही प्रयोग हो सकता है।

59. अनक्सगोरास के विचार में कौन-सा कथन सही है?

Correct Answer: (d) मस्तिष्क तत्वों को गतिशील बनाता है।
Solution:

अनाक्जागोरस के अनुसार 'मस्तिष्क तत्वों को गतिशील बनाता है।" अनाक्जागोरस को दर्शन और प्राकृतिक विज्ञान को यूनान लाने का श्रेय जाता है। इनके दर्शन की प्रमुख विशेषता विश्व की यांत्रिकवादी भौतिक व्याख्या है।

60. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है

मिल के उपयोगितावाद के संदर्भ में उत्तर दीजिए:
अभिकथन A : समष्टि के लिए सर्वसुख सर्वोत्तान है
कारण R: प्रत्येक का सुख संबंधित व्यक्ति हेतु उत्तम है
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नांकित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
Solution:

मिल के उपयोगितावाद के अनुसार समष्टि के लिए सर्वसुख सर्वोत्तान है, इसका कारण यह है कि प्रत्येक व्यक्ति का सुख उस व्यक्ति के लिए उत्तम है। ध्यातव्य है कि जे.एस. मिल उपयोगितावादी दार्शनिक हैं मिल के अनुसार "मनुष्य एक उपयोगितावादी प्राणी हैं। वह वही कार्य करता है जिससे सुख की प्राप्ति हो।