Solution:जैन मत के अनुसार एक ही समय में घट है भी और नहीं भी है, ऐसी मान्यता, विरोधाभासी नहीं है। जैन दर्शन के सप्तभंगीनय सिद्धांत 'स्यात अस्ति च' नास्ति च' के अनुसार वस्तु की सत्ता एक अन्य दृष्टिकोण से हो भी सकती है और नहीं भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में 'स्यात है और स्यात नहीं है' का ही प्रयोग हो सकता है।