यू.जी.सी. NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2021 जून-2022 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

61. रामानुज के अनुसार जीव (जीवात्मा) की क्या प्रकृति है?

Correct Answer: (d) जीव अस्तित्त्वात्मक रूप से अलग है,परन्तु ब्रह्म से अटूट रूप से संबद्ध है
Solution:

रामानुज के अनुसार जीव अस्तित्वात्मक रूप से अलग है परन्तु ब्रह्म से अटूट रूप से जुड़ा हुआ है। रामानुज कहते हैं की जीव ब्रह्म का अंश है परन्तु शंकर को यह मत मान्य नहीं है क्योंकि ब्रह्म निरवयव है। वल्लभाचार्य कहते हैं की जीव ब्रह्मा का विकार है।
परन्तु शंकर को यह मत मान्य नहीं है क्योंकि ब्रह्म अविकारी है। जीव न आत्मा का अंश है न आत्मा का विकार है और न आत्मा से भिन्न है बल्कि यह स्वतः आत्मा है। यदि जीव को ब्रह्म से भिन्न मान लिया जाए तो वह ब्रह्म से तादात्म्यक नहीं हो सकता है क्योंकि दो भिन्न वस्तुओं में तादात्म्यकता संभव नहीं है।
शंकर कहते हैं की जीव और ब्रह्म के बीच में जो भेद दिखाई पड़ता है। वह सत्य नही है इसका कारण यह है की दोनों का भेद उपाधि के द्वारा निर्मित है। दोनों का भेद व्यवहारिक है सत्य तो यह है की जीव और ब्रह्म में परमार्थतः कोई भेद नहीं है। शंकर का यह कथन कि 'तत् त्वम् असि' आत्मा और जीव की अभिन्नता को प्रमाणित करता है।

62. न्याय भाषा दर्शन में ईश्वरेच्छा है:

Correct Answer: (d) स्वयं शक्ति
Solution:

न्याय भाषा दर्शन के अनुसार 'स्वयं शक्ति' ईश्वर की इच्छा है।

63. निम्मलिखित में से कौन-सा एक तर्कवाक्य का परिवर्तन है? "सभी निवासी मतदाता हैं"

Correct Answer: (d) कोई निवासी गैर-मतदाता नहीं है।
Solution:

'सभी निवासी मतदाता हैं' यह 'A' प्रकार का तर्कवाक्य है इसका परिवर्तन "कोई निवासी गैर मतदाता नही है" होगा।

64. अनुमान द्वारा किस प्रकार की हेत्वाभास की प्रतिबद्धता है: शब्दः नित्यः शब्दावात ?

Correct Answer: (b) असाधारण सव्यभिचार
Solution:

अनुमान द्वारा 'असाधारण सव्यभिचार' की प्रतिबद्धता है। जब हेतु केवल पक्ष में रहता है परन्तु सपक्ष और विपक्ष में नहीं जैसे- भूमि नित्य है, क्योंकि इसमें गन्ध है। इसमें गन्ध हेतु केवल पक्ष (भूमि) में है। यह हेतु जहाँ साध्य का नित्य होना निश्चित है जैसे-आकाश आदि में नहीं रहता और जहाँ साध्य के अभाव का होना, अनित्य होना निश्चित है जैसे- जल आदि विपक्ष में नहीं है।

65. निम्नलिखित में से क्या किर्कगार्ड के दर्शन का समुचित प्रतिनिधित्व करता है?

Correct Answer: (a) आत्मनिष्ठता सत्य है
Solution:

प्रश्नगत विकल्पों में 'आत्मनिष्ठता सत्य है' के द्वारा किर्कगार्ड के दर्शन का समुचित प्रतिनिधत्व होता है। अस्तित्ववाद के प्रणेता किर्कगार्ड ने स्पष्ट घोषणा की है कि 'सत्य आत्मनिष्ठता है।" आत्मनिष्ठता सत्य की कोटि (Category) नहीं वरन् सत्य आत्मनिष्ठता ही है।
वह कहता भी है कि "मैं सत्य को तब तक नहीं जान सकता जब तक की वह मुझमें चरितार्थ न हो जाए।"
सत्य की आत्मनिष्ठता को सिद्ध करने के लिए किर्कगार्ड ने एक तर्क भी दिया है उसके अनुसार दो आत्माओं या आत्मा और ईश्वर के मध्य वस्तुनिष्ठ संबंध होना संभव ही नहीं है क्योंकि ऐसी स्थिति में किसी एक का आत्मनिष्ठ रूप खण्डित हो जाएगा। अतः सत्य आत्मनिष्ठ ही हो सकता है।

66. निम्नलिखित में से कौन-कौन से भारतीय दार्शनिक अनुमान और अर्थापत्ति प्रमाण में भेद करते हैं?

Correct Answer: (b) शंकर और कुमारिल
Solution:

शंकर और कुमारिल दोनों ने अनुमान और अर्थापत्ति प्रमाण में भेद किया है। शंकर अद्वैत वेदान्त के प्रणेता हैं जबकि कुमारिल का संबंध मीमांसा दर्शन से है।

67. बुद्धिवाद और अनुभववाद दोनों के समन्वय का प्रमुख वास्तुकार कौन है?

Correct Answer: (d) कांट
Solution:

काण्ट ने बुद्धिवाद और अनुभववाद का समन्वय किया। काण्ट ने तो पूरी तरह बुद्धिवाद का और न ही अनुभववाद का अनुसरण किया। इन्होंने कहा की बुद्धिवादियों के ज्ञान में अनिवार्यता और सार्वभौमिकता तो मिल जाती है किन्तु नवीनता तथा वास्तविकता नहीं मिलती जबकि अनुभववादियों के ज्ञान में केवल नवीनता मिलती है, अनिवार्यता और सार्वभौमिकता नहीं। काण्ट ने ऐसे ज्ञान को खोजा जिसमें यह तीनों तत्त्व एक साथ मिलें और उसकी यह खेज ज्ञान की जिस परिभाषा में पूरी हुई, वह है "ज्ञान संश्लेषणात्मक प्रागनुभविक निर्णयों की व्यवस्था है।"

68. निम्नलिखित में कौन-सी पुस्तके मौलाना आज़ाद द्वारा लिखी गयी हैं?

(A) गुबार-ए-खातिर
(B) एजुकेशन एण्ड रिलीजियस आइडेंटिटी
(C) इण्डिया विन्स फ्रीडम
(D) तर्जुमानुल कुरान
(E) तर्जुमानुल गीता
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

Correct Answer: (b) केवल A, C और D
Solution:

मौलाना आजाद द्वारा लिखी गई पुस्तकें-
गुबार-ए-खातिर ।
इण्डिया विन्स फ्रीडम ।
तर्जुमानुल कुरान।

69. निम्नलिखित पर विचार कीजिए और कांट के निरपेक्ष आदेश से संबंधित कूट को चुनियेः

A. अंतःकरण की आंतरिक विधि
B. अनुभव निरपेक्ष
C. नैतिक विधि
D. नैसर्गिक विधि
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (c) केवल A, B और C
Solution:

'अंतःकरण की आंतरिक विधि, अनुभव निरपेक्ष तथा नैतिक विधि' तीनों का संबंध काण्ट के निरपेक्ष आदेश से है। काण्ट के अनुसार "निरपेक्ष आदेश वह आदेश है जो कर्म को किसी प्रयोजन की पूर्ति का साधन न मानकर उसे अपने आप में शुभ तथा अनिवार्य मानता है।" अर्थात वह नैतिक सिद्धांत जो किसी साध्य प्रयोजन या हेतु द्वारा नियंत्रित नहीं रहता। जब कर्तव्य के लिए कर्तव्य किया जाता है तब उस कर्तव्य या नैतिक सिद्धांत को निरपेक्ष आदेश कहा जाता है।

70. लेविनास का नीतिशास्त्र किससे संबंधित है?

Correct Answer: (a) दूसरों के प्रति दायित्व मानना
Solution:

'लेविनास का नीतिशास्त्र 'दूसरों के प्रति दायित्व मानने से संबंधित है। लेविनास का उत्तरदायित्व का सिद्धांत सत्तामीमांसा या मौलिक नैतिकता है। इस सिद्धांत का सबसे सकारात्मक पहलू आत्मनिष्ठता की अवधारणा है।