Solution:कार्ल मार्क्स हीगल से सहमत थे कि इतिहास द्वंद्रात्मक योजना के अनुसार अपने आपको प्रकट करता है। जहाँ द्वन्द्रात्मक भौतिकवाद मार्क्सवाद का दार्शनिक आधार है। वही ऐतिहासिक भौतिकवाद उसका अनुभवमूलक आधार यानि समाज की प्रगति कैसे हुई, यह बताता है।
इसे इतिहास की आर्थिक व्याख्या या इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या भी कहा जाता है। कार्ल मार्क्स ने अपनी कृति- A critic of politcal Economy, 1859 की प्रस्तावना में लिखा हैं- मनुष्य की चेतना उनके अस्तित्व को निर्धारित नहीं करती बल्कि उनका सामाजिक अस्तित्व उनकी चेतना का निर्धारण करता है।
मार्क्स पदार्थ को सक्रिय समझते हैं, जो आंतरिक द्वन्द से अपने आप बदलता है।