Solution:मिल के द्वारा विचार और अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के पूरक रूप में कार्य की स्वतंत्रता का प्रतिपादन किया गया है। मिल के अनुसार कार्य की स्वतन्त्रता "मानव जीवन के सुख का एक मुख्य तत्व है और वहीं वैयक्तिक एवं सामाजिक प्रगति का भी आवश्यक तत्व है।
मिल मानव कार्यों को दो भागों में विभाजित करता है-
1. स्व-विषयक (Self ragarding)
2. परविषयक (othersregarding)।
पहले क्षेत्र के अन्तर्गत वे कार्य आते है जिनका सम्बन्ध व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन से होता है। दूसरे क्षेत्र में वे कार्य आते हैं, जिनका प्रभाव समाज के अन्य व्यक्तियों पर पड़ता है। पर विषयक कार्यों में व्यक्ति की स्वतन्त्रता सीमित होती है,
विशेषकर जबकि उसके कार्यों से अन्य व्यक्तियों की स्वतन्त्रता में बाधा पहुँचती है। मिल 'नकारात्मक स्वतंत्रता' का पक्षधर है जिसका तात्पर्य है। प्रतिबंधों का अभाव। मिल के अनुसार "व्यक्ति अपने मन व शरीर का स्वामी है।" यानि कुछ भी करने को स्वतंत्र है।