जनगणना 2011 के अनुसार भारत की साक्षरता दर 74.04% है जिसमे पुरूष साक्षरता दर 82.14% और महिला साक्षरता दर 65.46% है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2022-2027 के लिए प्रौढ़ शिक्षा हेतु नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के नाम से अभिहित एक नयी योजना स्वीकृत किया है। एक प्रगतिशील कदम के रूप में, वर्तमान सरकार ने "प्रौढ़ शिक्षा' पद को "सभी के लिए शिक्षा पद से प्रतिस्थापित करने का फैसला किया है।
बुनियाद परक साक्षरता और संख्या (न्युमरेसी) जो 21वीं शताब्दी के किसी नागरिक के लिए आवश्यक अन्य घटकों को साथसाथ प्रदान करना योजना के उद्देश्य हैं। योजना स्वयं सेवावाद के सा ऑनलाइन साधन के माध्यम से क्रियान्वित होगी। जनगणना 2011 के अनुसार, 15 वर्ष की आयु और उससे ऊपर का आयु समूह के लिए देश के गैर-साक्षरों की निरपेक्ष संख्या 25.76 करोड़ है। जिसमे महिलाए 16.60 करोड़ हैं। यह योजना देश के सभी राज्यों केंद्रशासित प्रदेशों में 15 वर्ष और उससे ऊपर की आयु के गैर-साक्षरों को आच्छादित करेगी।
आधार और मोबाइल नंबर के साथ पंजीयन के माध्यम से एन. आई. सी., एन.सी.इ.आर.टी. और एन.आई.ओ.एस के सहयोग से ऑनलाइन शिक्षण, अधिगम, आकलन पद्धति का उपयोग कर वित्तीय वर्ष 2022- 2027 के लिए बुनियाद परक साक्षरता और संख्या (न्युमरेसी) का लक्ष्य प्रति वर्ष एक करोड़ है।
इस योजना में लड़कियों और महिला, एस.सी./ एस.टी. ओ.बी.सी. अल्पसंख्यकों, दिव्यांगजनों हशिए पर लोग यायावर/ निर्माण कार्यकर्ता श्रमिक इत्यादि को प्राथमिकता दी जाएगी, जो कि प्रौढ़ शिक्षा से पर्याप्त तरीके और तात्कालिक रूप से लाभन्वित हो सकते हैं नीति आयोग के सभी आकांक्षी जिलों, राष्ट्रीय राज्य औसत से कम साक्षरता दर वाले जिलों, 2011 की जनगणना के अनुसार, 60 प्रतिशत से कम महिला साक्षरता दर वाले जिलों पर क्षेत्रवार ढंग से ध्यान दिया जाएगा। योजना के क्रियान्वयन और लाभार्थियों और स्वैच्छिक अध्यापकों को सर्वेक्षण संचालित करने हेतु विद्यालय इकाई होगी।
वित्तीय वर्ष 2022-27 के लिए "नव भारत साक्षरता कार्यक्रम" हेतु प्राक्कलित परिव्यय 1037.90 करोड़ रूपए है जिसमें केंद्र का साझा किया जाने वाला हिस्सा 700 करोड़ रूपए और बाकी की धनराशि राज्यों द्वारा साझा की जाएगी।
जनगणना 2011 के अनुसार, 15 वर्ष और उसके ऊपर की आयु वाले देश के गैर-साक्षर पुरूषों की निरपेक्ष संख्या है: