Solution:योग दर्शन के अनुसार 'ईश्वर प्राणिधान' योग के अष्टांग मार्गों में से एक 'नियम' का प्रकार है। योग के अष्टांग मार्ग इस प्रकार है- (1) यम, (2) नियम, (3) आसन, (4) प्राणायम, (5) प्रत्याहार, (6) धारणा, (7) ध्यान, (8) समाधि ।
'नियम' के पांच प्रकारों में से एक ईश्वर प्राणिधान का अर्थ है ईश्वर के प्रति श्रद्धाभाव रखना। योग दर्शन में ईश्वर के ध्यान को योग का सर्वश्रेष्ठ विषय माना गया है। नियम के अन्तर्गत क्रमशः शौच, सन्तोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर प्राणिधान आते हैं।