यू.जी.सी. NTA नेट /जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020 जून-2021 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY) (Shift – 1)

Total Questions: 100

11. यह किसका विचार है कि ब्रह्म जगत अभिन्ननिमित्तोपादान कारण है?

Correct Answer: (b) शंकर और रामानुज
Solution:

ब्रह्म जगत का अभिन्ननिमित्तोपादान कारण है। यह विचार शंकर और रामानुज दोनों का है। शंकर के अनुसार ब्रह्म भूत जगत का आधार है। जगत ब्रह्म का विवर्त है, परिणाम नहीं। शंकर ने केवल इसी अर्थ में ब्रह्म को विश्व का कारण माना है। रामानुज ने ब्रह्म को विश्व का निर्माणकर्ता कहा है। ब्रह्म विश्व का उपादान और निमित्त कारण है वह अपने अंदर निहित अचित से विश्व का निर्माण करता है। जिस प्रकार मकड़ा अपने सामग्री से जाल बुन लेता है। उसी प्रकार ईश्वर स्वयं सृष्टि कर लेता है। रामानुज कहते हैं कि विश्व ब्रह्म का रूपांतरित रूप है।

12. निम्नलिखित कथन को सावधानीपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए:

बुद्धि को उद्देश्य की प्राप्ति होती है जब यह समझती है कि आत्मा में अनुभव करने की इच्छा होती है और चूँकि इसमें वह अनुभूति होती है, ज्ञानेन्दियों को (भी उद्देश्य की प्राप्ति होती है)। यह सही नहीं है; क्योंकि वे अचेतन होती हैं। बुद्धि अचेतन होती है और ज्ञानेन्दियाँ भी यदि वे उद्देश्य का अनुभव नहीं करती हैं, वस्तुओं के आकार में उनके रूपांतर पर कैसे निर्णय किया जा सकता है?
उपर्युक्त कथन में किसकी आलोचना है : 

Correct Answer: (d) न्याय दर्शन द्वारा सांख्य की
Solution:

बुद्धि को उद्देश्य की प्राप्ति होती है जब यह समझती है कि आत्मा में अनुभव करने की इच्छा होती है और चूंकि इसमें वह अनुभूति होती है, ज्ञानेन्द्रियों को भी उद्देश्य की प्राप्ति होती है। यह सही नहीं है, क्योंकि वे अचेतन होती है। बुद्धि अचेतन होती है और ज्ञानेन्द्रियाँ भी यदि वे उद्देश्य का अनुभव नहीं करती है। वस्तुओं के आकार में उनके रूपांतर पर कैसे निर्णय किया जा सकता है? न्याय द्वारा की गई यह आलोचना सांख्य के विषय में है ।

13. निम्नलिखित में से कौन सा अवैध अनुमान है?

Correct Answer: (b) यदि p तो q, p नहीं, इसलिए q
Solution:

यदि p तो q, p नहीं, इसलिए q
यह एक अवैध युक्ति है।
प्रतीकात्मक रूप में,

p ⊃ q
~p
∴ q

‘p’ यहाँ कारण है और q कार्य। यदि कारण नहीं होगा तो कार्य घटित नहीं होगा। अतः यह युक्ति अवैध है।

(a) इसी प्रकार, p या q, p नहीं इसलिए q का सांकेतिक प्रतीक
p v q
~q
∴ p

वैकल्पिक न्यायवाक्य है, जो वैध है।

(c) यदि p तो q, q नहीं
इसलिए p नहीं, का सांकेतिक तर्कवाक्य

p ⊃ q
~q
∴ ~p

जो शर्तक अनुमान है।
यह तर्कवाक्य वैध है।

(d) यदि p तो q, p इसलिए q का प्रतीकात्मक रूप है—

p ⊃ q
p
∴ q

यह पूर्ववत अनुमान है जो एक वैध युक्ति है।

14. निम्नलिखित में से कौन सा तर्क वाक्य 'सभी सदस्य मतदाता हैं?' का प्रतिपरिवर्तित रूप है:

Correct Answer: (b) सभी गैर मतदाता गैर सदस्य हैं
Solution:

'सभी सदस्य मतदाता है' का प्रतिपरिवर्तन इस प्रकार है- सभी गैर मतदाता गैर सदस्य हैं। प्रतिपरिवर्तन का नियम:-
(1) आधार वाक्य का विधेय पद का पूरक, निष्कर्ष में उद्देश्य पद हो जाता है।
(2) आधार वाक्य के उद्देश्य पद का पूरक निष्कर्ष में विधेय पद हो जाता है।
(3) आधार वाक्य एवं निष्कर्ष का गुण समान रहता है।
(4) आधार वाक्य में जो पद अव्याप्त है उसे निष्कर्ष में व्याप्त नहीं होना चाहिए।

15. निम्नलिखित कथनों को ध्यानपूर्वक पढ़िए:

A. सृष्टि का यांत्रिक सिद्धांत इस विचार पर आधारित है कि द्रव्य ने स्वयं को बिना किसी सहायता के लगभग अविश्वसनीय रूप से जटिल प्राणियों में परिवर्तित किया।
B. सृष्टि का प्रयोजनमूलक सिद्धांत इस विचार पर आधारित है कि सृजित वस्तुओं में दृश्य व्यवस्था और कुशलता योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रहे यौक्तिक कर्ता द्वारा बाहर से आरोपित है।
C. न्याय दर्शन के सृजन का सिद्धांत यांत्रिक है।
D. न्याय दर्शन के सृजन का सिद्धांत प्रयोजनपरक है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

Correct Answer: (a) केवल A और B
Solution:

'द्रव्य ने स्वयं को बिना किसी सहायता से लगभग अविश्वसनीय रूप से जटिल प्राणियों में परिवर्तित किया है' यह विचार सृष्टि के यांत्रिक सिद्धांत का आधार है। 'सृजित वस्तुओं में दृश्य व्यवस्था और कुशलता योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रहे यौक्तिक कर्ता द्वारा बाहर से आरोपित है।" यह विचार सृष्टि के प्रयोजन मूलक सिद्धांत का आधार है। इस प्रकार कथन (A) और (B) सत्य है।

16. सांख्य दर्शन के अनुसार धर्म और अधर्म क्या हैं:

Correct Answer: (a) बुद्धि के रूपान्तर
Solution:

सांख्य दर्शन के अनुसार धर्म और अधर्म को बुद्धि का रूपांतर माना गया है।

17. निम्नलिखित में से कौन-कौन से नैतिक निर्णयन पर आर एम हेअर के विचारों के सम्बन्ध में सही है?

A. वे आदेशात्मक प्रकृति के होते हैं।
B. उन्हें स्वीकृति प्रदान करना उनके आदेशों को स्वीकार करना है।
C. किसी आदेश को स्वीकार करने में कुछ करना या किसी वस्तु को कारक बनाना शामिल है D. वे तथ्य का कथन करने वाले, सत्य प्रकार्यात्मक विमर्श होते हैं
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (a) केवल A, B और C
Solution:

नैतिक निर्णयन पर आर.एम. हेअर के विचार-
(1) नैतिक निर्णयन आदेशात्मक प्रकृति के होते है।
(2) उन्हें स्वीकृति प्रदान करना, उनके आदेशों को स्वीकार करना है।
(3) किसी आदेश को स्वीकार करने में कुछ करना या किसी वस्तु को कारक बनाना शामिल है।

18. नीचे दो कथन दिए गए हैं :

कथन - I : निर्धारणात्मक सिद्धांत मोटे तौर पर यह कहता है कि सभी अन्य प्राकृतिक घटनाओं की तरह मानव कार्य का भी निर्धारण पूर्व परिस्थितियों, प्रकृति के अपरिवर्त्य नियम के द्वारा होता है।
कथन - II : दर्शन शास्त्र की अधिकांश क्लासिकी भारतीय विचारधाराओं द्वारा अनुसमर्थित कर्म का सिद्धांत निर्धारण वाद की ओर ले जाता है क्योंकि किसी व्यक्ति के वर्तमान कर्म उसके अतीत के कर्मों के परिणाम होते हैं:
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (c) कथन । सही है, किन्तु कथन II गलत है
Solution:

प्रश्नगत कथन (I) "निर्धारणात्मक सिद्धांत मोटे तौर पर यह कहता है कि सभी अन्य प्राकृतिक घटनाओं की तरह मानव कार्य का भी निर्धारण पूर्व परिस्थितियों, प्रकृति के अपरिवर्त्य नियम द्वारा होता है।" सत्य है।
कथन (III) दर्शन शास्त्र की अधिकांश क्लासिकी भारतीय विचारधाराओं द्वारा अनुसमर्थित कर्म का सिद्धांत निर्धारणवाद की ओर ले जाता है, क्योंकि किसी व्यक्ति के वर्तमान कर्म उसके अतीत के कर्मों के परिणाम होते हैं।" गलत है। क्योंकि प्राचीन भारतीय दर्शन कर्मवाद में विश्वास करते हैं जिसके अनुसार वर्तमान जन्म के फल पूर्व जन्म के कर्मों का परिणाम होते हैं। लेकिन यह आवश्यक नहीं कि वो निर्धारणवाद को मानते हों।

19. धर्म के उद्गम के सम्बन्ध में विवेकानंद का विचार निम्नलिखित में से कौन है?

Correct Answer: (d) इन्द्रियातीत होने के लिए संघर्ष
Solution:

आधुनिक सामाजिक, धार्मिक सुधारकों में से एक स्वामी विवेकानन्द का मानना था कि "इन्द्रिय जगत से परे की लालसा ही धर्म के उदभव का कारण रही है।" इन्द्रियातीत सत्ता की अनुभूति के पश्चात मनुष्य ने उस सत्ता को एक विशेष आवरण से आच्छादित करने का प्रयास किया। इसे उसने धर्म का नाम दिया। मनुष्य अपने विवेकशील अवस्था से ही पारलौकिक सत्ता की अनुभूति के लिए संघर्षरत रहा है। इस संघर्ष के परिणाम स्वरूप उसे जिस दिव्यता की अनुभूति हुई उसको उसने एक विशेष और आदरणीय ढाँचे में ढालने का प्रयास किया और उसे धर्म की संज्ञा दी।

20. किसने अमूर्त विचारों के सिद्धांत का खंडन किया?

Correct Answer: (a) बर्कले
Solution:

अमूर्त विचार के सिद्धान्तों का खण्डन बर्कले ने किया। बर्कले कहते हैं कि 'अमूर्त विचार' एक असंगत कल्पना है क्योंकि हम इन्द्रियों द्वारा विशेष का ही ज्ञान कर सकते हैं, सामान्य का नहीं। 'सामान्य मनुष्य' की कल्पना करते ही किसी मनुष्य विशेष की आकृति मस्तिष्क में आती है। काल्पनिक विज्ञान वदतो व्याघात है। ध्यान देने की बात है कि बर्कले सामान्य का खण्डन नहीं करते। सामान्य और सार्वभौम विज्ञानों की सत्ता उन्हें मान्य है। उनका कथन है कि ये सामान्य विज्ञान इन्द्रियानुभव से नहीं आते और न इनको अमूर्त या काल्पनिक कहा जा सकता है। अतः इन तथाकथित 'अमूर्त विज्ञानों के आधार पर भी बाह्य द्रव्यों की सत्ता नहीं मानी जा सकती है।