Solution:द्रव्य वैशेषिक दर्शन का प्रथम पदार्थ है। द्रव्य की परिभाषा इस प्रकार दी गई है "क्रियागुणवतसमवायिकारणमिति द्रव्य लक्षणम्।" द्रव्य की परिभाषा से यह सूचित होता है कि द्रव्यगुण और कर्म का आधार होने के अतिरिक्त अपने कार्यों का समवायि कारण है। द्रव्य में सामान्य निहित होता है। द्रव्य के सामान्य को 'द्रव्यत्व' कहा जाता है द्रव्य नौ प्रकार के होते हैं- (1) पृथ्वी, (2) अग्नि, (3) वायु, (4) जल, (5) आकाश, (6) दिक, (7) काल, (8) आत्मा, (9) मन । इनमें प्रथम पांच को पंचभूत कहा जाता है। प्रतयेक का एक विशिष्ट गुण होता है।
पृथ्वी, जल, अग्नि और वायु अपने कारणरूप में नित्य तथा कार्यरूप में अनित्य होते हैं। ये अपने परमाण रूप में नित्य हैं इनके परमाणु अविभाज्य, निरवयव नित्य, परिमण्डलाकार गतिहीन, गुण एवं परिमाण की दृष्टि से परस्पर भिन्न तथा भौतिक जगत के उपादान कारण हैं। पृथ्वी शाश्वत और अशाश्वत दोनों है। पृथ्वी के परमाणु शाश्वत हैं परन्तु उससे बने पदार्थ अनित्य है।
इसी प्रकार जल के भी परमाणु शाश्वत हैं तथा जल से निर्मित पदार्थ अनित्य हैं। अग्नि के परमाणु नित्य हैं जबकी अग्नि से बने पदार्थ अनित्य हैं। वायु के परमाणु नित्य हैं परन्तु इससे बनी वस्तुएँ अनित्य हैं। इस प्रकार स्पष्ट है कि वैशेषिक दर्शन के अनुसार पृथ्वी, जल, अग्नि, और वायु नामक द्रव्य कभी नित्य होते हैं, कभी अनित्य ।