यू.जी.सी. NTA नेट /जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020 जून-2021 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY) (Shift – 1)

Total Questions: 100

21. ऐसे कूट का चयन कीजिए जो दो आधार वाक्यों के निगमनात्मक तर्क के सन्दर्भ में सही नहीं हैं:

Correct Answer: (c) दो सही आधार वाक्यों वाला तर्क और एक गलत निष्कर्ष वैध है
Solution:

दो आधार वाक्यों के निगमनात्मक तर्क की विशेषताएँ-
(1) एक सही और एक गलत आधार वाक्य वाला तर्क और एक गलत निष्कर्ष वैध होता है।
(2) दो गलत आधार वाक्य वाला तर्क और एक गलत निष्कर्ष वैध है।
(3) दो सही आधार वाक्यों वाला तर्क और एक सही निष्कर्ष वैध है।

22. न्याय दर्शन के अनुसार आत्मा क्या हो सकती है :

Correct Answer: (c) ज्ञाता और ज्ञात दोनों
Solution:

न्याय दर्शन के अनुसार आत्मा ज्ञाता और ज्ञात दोनों है। जानना, आत्मा का धर्म है। वह ज्ञान का विषय नहीं हो सकता। आत्मा भोक्ता है। वह सुख-दुख का अनुभव करता है। न्याय दर्शन के अनुसार आत्मा नित्य, निरवयव तथा अविनाशी है। न्याय दर्शन के अनुसार आत्मा सबका द्रष्टा, सुख-दुख को भोगने वाला वस्तुओं को जानने वाला है।

23. सही क्रम का चयन करें :

A. अहिंसा
B. सत्य
C. ब्रह्मचर्य
D. अस्तेय
E.अपरिग्रह
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

Correct Answer: (a) A, B, D, C, E
Solution:

अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह को जैन दर्शन में पंचमहाव्रत कहा गया है। अहिंसा- अहिंसा का अर्थ है, हिंसा का परित्याग। किसी भी प्रकार के जीव की हिंसा का परित्याग।
सत्य- सत्य का अर्थ है. असत्य का परित्याग। सत्य का पालन मन, वचन और कर्म से करना चाहिए।
अस्तेय - अस्तेय का अर्थ है, चोरी का निषेध। जैनदर्शन में चोरी न करना नैतिक अनुशासन कहा गया है।
ब्रह्मचर्य- ब्रह्मचर्य का अर्थ है, वासनाओं का परित्याग करना। जैनों ने ब्रह्मचर्य का पालन मन, वचन, कर्म से करने का निर्देश दिया है।
अपरिग्रह - अपरिग्रह का अर्थ है, विषय वासनाओं का परित्याग। जैन दर्शन में अपरिग्रह को रूप, रस, गंध, स्पर्श, स्वाद से उत्पन्न विषय को कहा गया है।

24. चार्ल्स टेलर की मान्यता की राजनीति के अनुसार निम्नलिखित में से कौन सा सत्य है?

Correct Answer: (a) इसने मतभेद की राजनीति का समर्थन किया जो इस बात पर बल देता है कि प्रत्येक व्यक्ति विशिष्ट पहचान की मान्यता का धारक है
Solution:

चार्ल्स टेलर की मान्यता की राजनीति के अनुसार "इसने मतभेद की राजनीति का समर्थन किया जो इस बात पर बल देता है कि प्रत्येक व्यक्ति एक विशिष्ट पहचान की मान्यता का धारक है।"

25. के सी भट्टाचार्य के अनुसार दर्शन शास्त्र किससे सम्बंधित है:

A. पराचेतन
B. वस्तुपरक चेतना
C. आध्यात्मिक चेतना
D. आनुभविक चेतना
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (b) केवल A, B और C
Solution:

के.सी. भट्टाचार्य के अनुसार दर्शनशास्त्र का सम्बन्ध निम्नलिखित तीन सत्ताओं से है-
(i) पराचेतना (ii) वस्तुपरक चेतना (iii) आध्यात्मिक चेतना

26. वैशेषिकों के अनुसार अश्व जाति में गोजाति का अभाव किस प्रकार का अभाव है?

Correct Answer: (a) अन्योन्याभाव
Solution:

न्याय दर्शन के अनुसार 'अश्व' जाति में 'गो' जाति का अभाव अन्योन्याभाव है। अन्योन्याभाव का अर्थ है दो वस्तुओं की भिन्नता। अभिप्राय यह है कि जब एक वस्तु का दूसरे वस्तु से भेद बतलाया जाता है तब अन्योन्याभाव का प्रयोग होता है। अन्योन्याभाव का उदाहरण है-घोड़ा गाय नहीं है।

27. नीचे चार कथन दिए गए हैं, इनमें से दो इस प्रकार सम्बन्धित हैं कि ये दोनों सही हो सकते हैं

लेकिन वे दोनों गलत नहीं हो सकते हैं। ऐसे दो कथनों को दर्शाने वाले सही कूट का चयन कीजिए:
A. ईमानदार व्यक्तियों को शायद ही कष्ट होता है।
В. ईमानदार व्यक्तियों को कभी कष्ट नहीं होता है।
C. लगभग सभी ईमानदार व्यक्तियों को कष्ट होता है।
D. प्रत्येक ईमानदार व्यक्ति को कष्ट होता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में सहीं उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (a) केवल A और C
Solution:

प्रश्नगत कथनों में कथन (A) ईमानदार व्यक्तियों को शायद ही कष्ट होता है तथा कथन (C) लगभग सभी ईमानदार व्यक्तियों को कष्ट होता है। सत्य है। परन्तु कथन (B) असत्य है, यह आवश्यक नहीं है कि ईमानदार व्यक्तियों को कभी कष्ट नहीं होता, क्योंकि ईमानदार व्यक्तियों को भी कष्ट होता है। इसी प्रकार कथन (D) भी असत्य है, यह जरूरी नहीं की प्रत्येक ईमानदार को कष्ट हो।

28. सूची-I के साथ सूची-II से सुमेलित कीजिए:

सूची–I (सिद्धांत)सूची–II (लेखक/विचारक/सिद्धांत का नाम आदि)
A. जीव केंद्रीकताI. यह नैतिक धारणा कि कुछ प्राणियों के लिए नैतिक विचार अपने आप में लक्ष्य होते हैं, न कि मानव उद्देश्यों के साधन।
B. पारि केंद्रीकताII. यह नैतिक धारणा कि सभी जीवित व्यक्तियों के लिए नैतिक मूल्य अपने आप में लक्ष्य होते हैं, न कि मानव उद्देश्यों के साधन।
C. मानव केंद्रीकताIII. यह नैतिक धारणा कि व्यक्ति और सम्पूर्ण पारितंत्र, जल-मंडल, प्रजातियाँ, जैव समुदाय में अन्तर्निहित मूल्य होते हैं जो अपने आप में लक्ष्य होते हैं।
D. प्राणी केंद्रीकताIV.यह विचार कि मनुष्य नैतिक अधिकारों के एक मात्र या प्राथमिक वाहक होते हैं।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) A- II, В - III, С- IV, D-I
Solution:

सही सुमेल इस प्रकार है-

सूची–I (सिद्धांत)सूची–II (विवरण)
जीव केंद्रीकतायह नैतिक धारणा कि सभी जीवित व्यक्तियों के लिए नैतिक मूल्य अपने आप में लक्ष्य होते हैं, न कि मानव उद्देश्यों के साधन।
पारि केंद्रीकतायह नैतिक धारणा कि कुछ प्राणियों के लिए नैतिक विचार अपने आप में लक्ष्य होते हैं, न कि मानव उद्देश्यों के साधन।
मानव केंद्रीकतायह विचार कि मनुष्य नैतिक अधिकारों के एक मात्र या प्राथमिक वाहक होते हैं।
प्राणी केंद्रीकतायह नैतिक धारणा कि व्यक्ति और सम्पूर्ण पारितंत्र दोनों, जल संसाधन, प्रजातियाँ, जैव समुदाय में मूल्य अन्तर्निहित होते हैं जो अपने आप में लक्ष्य होते हैं।

29. वैशेषिकों के अनुसार कौन-सा द्रव कभी नित्य होता है। और कभी अनित्य होता है :

Correct Answer: (d) केवल पृथ्वी, जल, अग्नि और वायु
Solution:

द्रव्य वैशेषिक दर्शन का प्रथम पदार्थ है। द्रव्य की परिभाषा इस प्रकार दी गई है "क्रियागुणवतसमवायिकारणमिति द्रव्य लक्षणम्।" द्रव्य की परिभाषा से यह सूचित होता है कि द्रव्यगुण और कर्म का आधार होने के अतिरिक्त अपने कार्यों का समवायि कारण है। द्रव्य में सामान्य निहित होता है। द्रव्य के सामान्य को 'द्रव्यत्व' कहा जाता है द्रव्य नौ प्रकार के होते हैं- (1) पृथ्वी, (2) अग्नि, (3) वायु, (4) जल, (5) आकाश, (6) दिक, (7) काल, (8) आत्मा, (9) मन । इनमें प्रथम पांच को पंचभूत कहा जाता है। प्रतयेक का एक विशिष्ट गुण होता है।
पृथ्वी, जल, अग्नि और वायु अपने कारणरूप में नित्य तथा कार्यरूप में अनित्य होते हैं। ये अपने परमाण रूप में नित्य हैं इनके परमाणु अविभाज्य, निरवयव नित्य, परिमण्डलाकार गतिहीन, गुण एवं परिमाण की दृष्टि से परस्पर भिन्न तथा भौतिक जगत के उपादान कारण हैं। पृथ्वी शाश्वत और अशाश्वत दोनों है। पृथ्वी के परमाणु शाश्वत हैं परन्तु उससे बने पदार्थ अनित्य है।
इसी प्रकार जल के भी परमाणु शाश्वत हैं तथा जल से निर्मित पदार्थ अनित्य हैं। अग्नि के परमाणु नित्य हैं जबकी अग्नि से बने पदार्थ अनित्य हैं। वायु के परमाणु नित्य हैं परन्तु इससे बनी वस्तुएँ अनित्य हैं। इस प्रकार स्पष्ट है कि वैशेषिक दर्शन के अनुसार पृथ्वी, जल, अग्नि, और वायु नामक द्रव्य कभी नित्य होते हैं, कभी अनित्य ।

30. कामंदक के अनुसार उपेक्षा क्या है:

Correct Answer: (d) कूटनीतिक उदासीनता
Solution:

कामंदकीय नीतिसार के अनुसार उपेक्षा एक कूटनीतिक उदासीनता है। कामंदक नीतिसार अहिंसक है वह सह अस्तित्व पर बल देती है। कामंदक, कौटिल्य के साम, दाम, दण्ड, भेद, उपेक्षा में विश्वास नहीं रखते हैं। वे मंत्रणा शक्ति, प्रभु शक्ति और उत्साह शक्ति की बात करते हैं। कामंदक, कौटिल्य के 'उपेक्षा' नीति की तुलना कूटनीतिक उदासीनता से करते हैं।