यू.जी.सी. NTA नेट /जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020 जून-2021 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY) (Shift – 1)

Total Questions: 100

31. वैशेषिकों के अनुसार बंधन मुक्त आत्मा में दुःख का अभाव किस सम्बन्ध से रहता है:

Correct Answer: (d) स्वरूप
Solution:

वैशेषिक दर्शन के अनुसार बंधन मुक्त आत्मा में दुःख का अभाव स्वरूप संबंध से रहता है। वैशेषिक दर्शन का मोक्ष (बंधन मुक्त आत्मा) संबंधी विचार भी अभाव को प्रमाणिकता प्रदान करता है मोक्ष का अर्थ दुःखों का पूर्ण अभाव कहा जाता है। मोक्ष को जीवन का चरम लक्ष्य माना जाता है। यदि अभाव को नहीं माना जाए तो वैशेषिक का मोक्ष विचार काल्पनिक होगा।

32. कौटिल्य के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

A. राजनीति का लक्ष्य प्रजाओं का योगक्षेम है।
B. राज्य के भीतर मत्स्यन्याय पर अंकुश लगाने का समर्थन किया गया है।
C. योगक्षम का दायित्व राज्य का नहीं है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (a) केवल A और B
Solution:

कौटिल्यीय नीतिशास्त्र में बताया गया है कि राजनीति का लक्ष्य प्रजा का योगक्षेम है और यह योग क्षेम का दायित्व राज्य पर है। कौटिल्य नीतिशास्त्र में राज्य के भीतर मत्स्यन्याय पर अंकुश लगाने का कार्य किया गया है। ताकि शक्तिशाली व्यक्ति कमजोरों का शोषण न करें और अराजकता की स्थिति से बचा जा सके।

33. निम्नलिखित में से कौन सा कांट का नैतिकता का अभ्युपगम है?

A. इच्छा की स्वतंत्रता
B. आत्मा की अमरता
C. ईश्वर का अस्तित्व
D. सांध्यजगत
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनैः

Correct Answer: (a) केवल A, B और C
Solution:

काण्ट के अनुसार-
(1) इच्छा की स्वतंत्रता
(2) आत्मा की अमरता
(3) ईश्वर का अस्तित्व
काण्ट की नैतिकता के अभ्युपगम है। काण्ट अपने इन पूर्वमान्यताओं को आस्था पर आधारित मानता है। यह तर्कबुद्धि का विषय नहीं है। काण्ट ने इन तीनों मान्यताओं को नैतिकता के लिए अनिवार्य माना है।

34. निम्नलिखित में से कौन तृतीय आकृति की मनोदशाओं का सही सम्मिश्रण है?

Correct Answer: (c) दरप्ति, दातिसी, फेलाप्टोन, फेरिसन, डिसमिस और बोकार्दो
Solution:

35. निम्नलिखित में से कांट को क्या स्वीकार्य नहीं है:

Correct Answer: (a) ज्ञान अनुभूतियों से स्वतंत्र पैदा होता है
Solution:

काण्ट के अनुसार अनुभववादियों का यह कथन कि "इन्द्रियानुभाव के बिना सत्य ज्ञान नहीं हो सकता सत्य है। हमारे ज्ञान के एक मात्र विषय हमारी संवेदना का विज्ञान ही है। काण्ट के अनुसार हमारा ज्ञान इन्द्रियानुभव से प्रारम्भ होता है। किन्तु उत्पत्ति अनुभव से नहीं होती है। इस विश्लेषण के आधार पर काण्ट को स्वीकार्य है-
(1) ज्ञान की शुरुआत अनुभूति से होती है।
(2) ज्ञान अनुभूति क्षेत्र, प्रत्यक्षीकरण के रूप और बोध की श्रेणियों से सीमित होता है।
(3) वस्तु स्वयं अनुभूतियों का कारण होता है।

36. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए:

सूची-Iसूची-II
A. विपरीताख्यातिI. प्रभाकर
B. अख्यातिII. कुमारिल
C. अन्यथाख्यातिIII. माध्व
D. अभिनवअन्यथाख्यातिIV. गौतम

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए

Correct Answer: (a) A- II, В - I, С - IV, D - III
Solution:

भारतीय दर्शन के अनुसार ख्याति का अर्थ है त्रुटि और वाद का अर्थ है प्रवचन या सिद्धांत । अतः स्पष्ट है ख्यातिवाद का अर्थ है- त्रुटि का सिद्धान्त। इसे भ्रम सिद्धांत भी कहते हैं। सही सुमेल इस प्रकार है-

सूची–Iसूची–II
विपरीताख्यातिकुमारिल
अख्यातिप्रभाकर
अन्यथाख्यातिगौतम
अभिनवअन्यथाख्यातिमाध्व

37. देकार्ते के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं? सही कूट का चयन कीजिए:

A. द्रव्य वह है जिसका अस्तित्व नहीं है।
B. मैं सोचता हूँ, इसलिए मैं हूँ।
C. मैं हूँ, तो मैं सोचता हूँ।

Correct Answer: (d) केवल B सही है
Solution:

देकार्ते कहते हैं कि इस जगत में एक बात में तनिक भी अवकाश नहीं है और वह है मेरी सत्ता। ज्यों ही मैं कोई विचार करता हूँ, त्यौं ही मेरी सत्ता सामने आ जाती है। मैं कुछ भी कहूँ, विचार करूँ उन सब में मेरा अस्तित्व अन्तर्निहित है। अतः भलीभांति सोच लेने के बाद और प्रत्येक बात की सावधानी से परीक्षा कर लेने के बाद में इस परिणाम पर पहुँचने के लिए बाध्य हूँ कि "मैं सोचता हूँ, इसलिए मेरा अस्तित्व है।"

38. 'अहं प्रत्यय की संश्लेषी एकता' के सिद्धात का समर्थन किसने किया?

Correct Answer: (c) कांट
Solution:

अहं प्रत्यय की संश्लेषी एकता - काण्ट
विज्ञानों में सादृश्य, कालगत तथा कार्य कारण सम्बन्ध का खण्डन - ह्यूम
निरपेक्ष विज्ञानवाद - हेगल
अनुभववाद - लॉक

39. सही क्रम का चयन करेः

A. उपादान
B. तृष्णा
C. भव
D. जाति
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुने

Correct Answer: (b) B, A, C, D
Solution:

प्रश्नगत विकल्पों का सम्बन्ध बौद्ध दर्शन के प्रतीत्य समुत्पाद सिद्धान्त से है। भूत, वर्तमान और भविष्य की दृष्टि से प्रतीतत्य समुत्पाद के जो भेद किए गए हैं, उन्हें इस प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है-
अतीत जीवन से - (1) अविद्या, (2) संस्कार, (3) विज्ञान, (4) नामरूप, (5) षडायतन
वर्तमान जीवन से - (1) स्पर्श, (2) वेदना, (3) तृष्णा, (4) उपादान, (5) भव
भावी जीवन से- (1) जाति, (2) जरामरण
उपर्युक्त व्याख्या से स्पष्ट है कि सही विकल्प BACD होगा।

40. "यद्यपि हम ऐसे अधिष्ठान का अनुभव नहीं करते हैं जिसमें रंग, रूप आदि का आश्रय हो, फिर भी हमें अबोधगम्य अधिष्ठान के अस्तित्त्व को मानना पड़ता है" - यह किसका विचार है?

Correct Answer: (d) लॉक
Solution:

"यद्यपि हम ऐसे अधिष्ठान का अनुभव नहीं करते जिसमें रंग, रूप आदि का आश्रय हो, फिर भी हमें अबोधगम्य अधिष्ठान के अस्तित्व को मानना पड़ेगा।" यह विचार अनुभववादी दार्शनिक लॉक का है। लॉक कहते हैं कि हमारी आत्मा में कोई जन्मजात प्रत्यय नहीं है। समस्त ज्ञान की जननी इन्द्रियानुभूति है। हमारे ज्ञान का आदि और अंत इन्द्रियानुभव में होता है।