यू.जी.सी. NTA नेट /जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020 जून-2021 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY) (Shift – 1)

Total Questions: 100

41. "नैतिक शब्द जैसे अच्छा" और "गलत" सामान्य वर्णनात्मक शब्दों जैसे "लाल' और "आयताकार" से मिलते-जुलते हैं। उनके अर्थ और उनके अनुप्रयोग की स्थितियां बिलकुल जुड़े हुए हैं जिससे एक में परिवर्तन का अर्थ दूसरे में परिवर्तन करना है. "निम्नलिखित में से किस अधिनैतिक सिद्धांत का निरूपण इस कथन द्वारा सर्वोत्तम तरीके से होता है?

Correct Answer: (b) वर्णनवादिता
Solution:

"नैतिक शब्द जैसे 'अच्छा' और गलत सामान्य वर्णनात्मक शब्दों जैसे लाल और आयताकार से मिलते-जुलते हैं उनके अर्थ और उनके अनुप्रयोग की स्थितियाँ बिल्कुल जुड़े हुए हैं जिससे एक में परिवर्तन का अर्थ दूसरे में परिवर्तन करना है।" इस कथन द्वारा 'वर्णनवादिता' सिद्धांत का निरूपण होता है।
अधिनीतिशास्त्र के सिद्धांत प्रमुख रूप से वर्णनात्मक तथा अवर्णनात्मक प्रकृति के होते हैं वर्णनात्मक सिद्धांत में नैतिक निर्णयों  को तथ्यात्मक निर्णयों की भांति सत्य या असत्य माना जाता है। जो किसी विषय, वस्तु या गुण का वर्णन करते हैं।
प्रमुख वर्णनात्मक सिद्धांत प्रकृतिवाद, व्यक्तिनिष्ठवाद तथा वस्तुनिष्ठवाद हैं। अवर्णनात्मक सिद्धांत तथ्यात्मक निर्णयों से अलग, निर्णयकर्ता की भावनाओं को अभिव्यक्त करता है। संवेगावाद एवं परामर्शवाद अवर्णनात्मक सिद्धांत हैं। उपर्युक्त कथन द्वारा वर्णनवादिता सिद्धांत का निरूपण होता है।

42. जैन दर्शन में अंतः प्रज्ञाजन्य, पूर्ण और निरपेक्ष ज्ञान क्या कहा जाता है:

Correct Answer: (a) केवल
Solution:

जैन दर्शन के अनुसार केवल ज्ञान की प्राप्ति के क्रम में सर्वप्रथम मोहनीय कर्म का क्षय होता है। तदन्तर पाँच ज्ञानावरण कर्म, चार दर्शनावरण कर्म तथा पांच अन्तराय कर्मों का क्षय करने के बाद अंततः तिरसठ प्रवृत्तियों का नाश होकर केवल ज्ञान प्राप्त होता है। आत्मा की ज्ञान शक्ति का पूर्ण विकास या आविर्भाव ही केवल ज्ञान है। केवल ज्ञान, शुद्ध निर्मल, सकल परिपूर्ण असाधारण और अनंत है। केवल ज्ञान अन्तः प्रज्ञाजन्य पूर्ण और निरपेक्ष ज्ञान है। केवल ज्ञान में समस्त द्रव्यों की तीनों कालों की पर्याएँ एक साथ ज्ञात होने पर भी प्रत्येक पर्याय का विशिष्ट स्वरूप प्रदेश काल, आकारादि विशेषताएँ स्पष्ट ज्ञात होती है। संपूर्ण प्रदेशों की अविकल सत्ता केवली के ज्ञान का स्पष्ट विषय होती है।

43. निम्नलिखित में से कौन सा नारीवाद सिद्धांत महिलाओं को समाज की मुख्यधारा के ढांचे से समेकित करने हेतु इसी संरचना के भीतर कार्य करने की वकालत करता है?

Correct Answer: (b) उदारवादी नारीवाद
Solution:

उदारवादी नारीवाद फ्रांस की क्रांति द्वारा प्रेरित और आत्मज्ञान के विज्ञान पर आधारित था। इस नारीवाद का मुख्य विचार यह है कि सब मनुष्य ईश्वर द्वारा बनाए गए हैं उदारवादी नारीवादियों ने महिलाओं और पुरुषों की समानता और अधिकार पर जोर दिया। उदारनारीवाद, राजनैतिक आंदोलनों विचारधाराओं और सामाजिक आंदोलनों की एक श्रेणी है, जो राजनैतिक, आर्थिक, व्यक्तिगत, सामाजिक और लैंगिक समानताओं को परिभाषित करने और प्राप्त करने के एक लक्ष्य को साझा करते हैं। इसमें महिलाओं के लिए पुरुषों के समान शैक्षिक और पेशेवर अवसर स्थापित करना शामिल है।

44. निम्नलिखित में से कौन सा आचारवादी यह तर्क देता है कि सुखवाद की परिभाषा का निहितार्थ है कि इस प्रश्न "क्या कुछ भी जो आनंददायक है, अच्छा है" का अभिप्राय वही है जो इस प्रश्न का कि "क्या कुछ भी जो आनंद दायक है, आनंद दायक है?"

Correct Answer: (b) जी ई मूर
Solution:

जी ई मूर यह तर्क देते हैं कि “सुखवाद की परिभाषा का निहितार्थ है कि इस प्रश्न "क्या कुछ भी जो आनंददायक है, अच्छा है" का अभिप्राय वही है जो इस प्रश्न का की 'क्या कुछ भी जो आनंददायक है, आनंददायक है।" इस तरह की परिभाषा में मूर के अनुसार एक तरह का 'प्रकृतिवाद दोष' है।
मूर सुखवाद के इस विचार से तो सहमत हैं कि आनंद अपने आप में अच्छा है लेकिन वह केवल आंतरिक रूप से मूल्यवान चीज नहीं है। एक और महत्वपूर्ण अच्छाई जो अपने आप में मूल्यवान है वह है- सुंदरता, उदाहरण के लिए प्राकृतिक सुंदरता। मूर का तर्क है कि इस तरह की दुनिया एक बदसूरत दुनिया से बेहतर होगी, भले ही किसी मामले में इसका आनंद लेने के लिए, कोई नहीं है जो यह दर्शाता है की आनंद ही अपने आप में अच्छा नहीं है।

45. निम्नलिखित में से कौन प्लेटो के सन्दर्भ में सही है? सही कूट का चयन कीजिए।

A. विचारों की अपनी दुनिया होती है।
B. विचार कालिक होते हैं।
C. आकार के रूप में विचार वास्तविक होते हैं।
D. विचार बाह्याकृति होते हैं।

Correct Answer: (b) A और C
Solution:

प्लेटो के अनुसार विचारों की अपनी दुनिया होती है। विचार या प्रत्यय ही चरम सत्य है, वह शाश्वत और अखण्ड है तथा ईश्वर उसका सर्जक है। इसके अनुसार यह वस्तु जगत प्रत्यय जगत का अनुसरण है। प्रत्यय स्वाश्रित, सामान्य और बौद्धिक हैं। प्लेटों के अनुसार वास्तविक संसार अनंत तथा परिवर्तनशील विचारों का अमूर्त क्षेत्र है भौतिक संसार के पदार्थ व वस्तुएँ केवल आभास है, जो विचारों के संसार के आकार मात्र हैं।
अतः उपरोक्त विश्लेषण के अनुसार-
(1) विचारों की अपनी दुनिया होती है।
(2) आकार रूप में विचार वास्तविक होते हैं। सत्य है।

46. यह किसका विचार है कि "हमारे कुछ विचार गुणे से मिलते-जुलते हैं और दूसरे विचार गुणों से मिलते- जुलते नहीं हैं?"

Correct Answer: (d) लॉक
Solution:

"हमारे कुछ विचार गुणों से मिलते-जुलते हैं और दूसरे विचार गुणों से मिलते-जुलते नहीं हैं।" यह कथन अनुभववादी लॉक का है। "हम वाह्य जड़ पदार्थ का प्रत्यक्ष नहीं कर सकते, क्योंकि प्रत्यक्ष होता है केवल गुणों का वाह्य पदार्थ का नहीं।" - बर्कले। "विज्ञानों में तीन प्रकार के सम्बन्ध है- सादृश्य, कालगत तथा कार्यकारण सम्बन्ध" - ह्यूम ।

47. पतंजलि योग के अनुसार निम्नलिखित में से कौन चित्तवृत्ति नहीं है?

Correct Answer: (a) अविद्या
Solution:

पतंजलि योग दर्शन के अनुसार "चित्तवृत्तियाँ पाँच प्रकार की होती हैं-
(1) प्रमाण, (2) विपर्यय, (3) विकल्प, (4) निद्रा, (5) स्मृति। चित्तभूमियाँ भी पाँच प्रकार की होती हैं- (1) क्षिप्त, (2) मूढ़, (3) विक्षिप्त, (4) एकाग्र, (5) निरुद्ध।
योग के अष्टांग साधन- (1) यम, (2) नियम, (3) आसन, (4) प्राणायाम, (5) प्रत्याहार, (6) धारणा, (7) ध्यान, (8) समाधि ।

48. "संवेद शक्ति के रूप अन्तः प्राजिक और बोध अवधारणात्मक होते हैं" यह किसे मान्य है?

Correct Answer: (c) कांट
Solution:

"संवेद शक्ति के रूप अन्तः प्राज्ञिक और बोध अवधारणात्मक होते हैं" - यह कथन काण्ट का है।" "संवेदन या विज्ञान के अतिरिक्त हमें किसी सत्य का ज्ञान नहीं हो सकता ह्यूम।" इन्द्रिय संवेदन, भावना, इच्छा संकल्प आदि सब विज्ञान के विविध रूप है।"- हेगल ।

49. सात्र के अनुसार प्रामाणिक रूप से जीने का अभिप्राय है :

Correct Answer: (b) किसी के जीवन और किसी के भविष्य के बारे में सोद्देश्य विकल्प चुनना
Solution:

"प्रामाणिक रूप से जीने का अभिप्राय है- किसी के जीवन और किसी के भविष्य के बारे में सोद्देश्य विकल्प चुनना।" सा । सात्र एक 'अस्तित्ववादी, मानववादी दार्शनिक थे। वे कहते थे कि "मनुष्य स्वयं का निर्माता है, वह जैसे स्वयं को बनाता है, उसके अतिरिक्त वह कुछ नहीं है। मनुष्य अपने बारे में जैसा सोचता है, वैसा नहीं होता बल्कि वैसा होता है जैसा वह संकल्प करता है।

50. किसने गति के तर्क द्वारा ईश्वर के अस्तित्व का प्रतिपादन किया?

Correct Answer: (c) सेंट एक्विनास
Solution:

गति के तर्क द्वारा ईश्वर के अस्तित्व का प्रतिपादन सेंट एक्विनास ने किया। एक्विनास ने कहा कि जगत की गति के लिए एक स्वयंभू और अपरिणामी चेतन कारण आवश्यक है। ईश्वर सिद्ध स्वरूप है। वह जगत के गति का कारण है। समस्त जगत गतिमान होकर विकसित हो रहा है। विश्व जड़ है, अतः जड़ता के अभाव और विशुद्ध चैतन्य के भाव रूप में ईश्वर की सत्ता सिद्ध है।