यू.जी.सी. NTA नेट /जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020 जून-2021 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY) (Shift – 1)

Total Questions: 100

51. नीचे दो कथन दिए गए हैं:

कथन-1 : अधिनैतिक सिद्धांत के रूप में संवेगवाद यह मानता है कि नैतिकता के कार्य प्रेरक बल को नैतिक निर्णयन में विशेष 'मूल्यांकक अवयव' के सन्दर्भ में ही व्याख्यायित किया जा सकता है।
कथन-II : अधिनैतिक सिद्धांत के रूप में निर्देशवाद ने यह माना कि नैतिकता के कार्य प्रेरक बल को नैतिक निर्णयन में विशेष 'मूल्यांकक अवयव' के सन्दर्भ में ही व्याख्यायित किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनें :

Correct Answer: (a) कथन I और II दोनों सही हैं।
Solution:

संवेगवाद के अनुसार नैतिकता मात्र मनुष्य के संवेगों, अभिवृत्तियों की अभिव्यक्ति है। नैतिक शब्दों में मनुष्य के अनुमोदन, अवश्य व्यक्त रहते हैं, पर उनमें वर्णनात्मक तत्व भी अवश्य रहता है। कथनों के संवेगात्मक अर्थ ही नैतिक निर्णय नहीं बनाते जैसा संवेगवादी मानते हैं। संवेगवाद यह मानता है कि नैतिक प्रेरक बल नैतिक निर्णय में 'मूल्यांकन अवयव' के रूप में प्रयुक्त हो सकते हैं। और निदेशवाद भी इसी तरह का विचार रखता है। अतः उपरोक्त विश्लेषण से स्पष्ट है कि कथन (1) और कथन (II) दोनों सत्य हैं।

52. न्याय ज्ञान मीमांसा के अनुसार हम किस कारण से रस्सी को सर्प समझते हैं:

Correct Answer: (b) ज्ञान लक्षण सत्रिकर्ष
Solution:

न्याय दर्शन के अनुसार ज्ञान लक्षण सन्निकर्ष प्रत्यक्ष का वह भेद है जिसके द्वारा इन्द्रियाँ अपने विषय से भिन्न विषय का ज्ञान भी ग्रहण करती हैं, जैसे जाड़े के दिनों में बर्फ को देखते ही सिहरन होने लगती है। रस्सी को सर्प समझने का उदाहरण न्याय दर्शन के अनुसार ज्ञान लक्षण सन्निकर्ष का उदाहरण है। जब हम रस्सी को सर्प समझ लेते हैं, तो न्याय दर्शन के अनुसार हमारे पूर्व अनुभूत सर्प की स्मृति, वर्तमान अनुभूत रस्सी की अनुभूति से इस प्रकार मिल जाती है कि रस्सी को स्मृति की वस्तु सांप से हम पृथक नहीं कर पाते। इस को ज्ञान लक्षण प्रत्यक्ष का भ्रामक रूप कहा गया है।

53. निम्नलिखित में से किसने इस विचार का समर्थन किया कि “यदि आप धार्मिक विश्वासों को स्वीकार नहीं करते हैं, तो आप उन विश्वासों को स्वीकार नहीं करने से मिलने वाले लाभ गंवा देंगे और भूल करके संरक्षण प्राप्त करने की तुलना में लाभ गँवा देना बदतर है।

Correct Answer: (d) विलियम जेम्स
Solution:

यह विचार “यदि आप धार्मिक विश्वासों को स्वीकार नहीं करते हैं, तो आप उन विश्वासों को स्वीकार नहीं करने से मिलने वाले लाभ गंवा देंगे और भूल करके संरक्षण प्राप्त करने की तुलना में लाभ गँवा देना बदतर है। विलियम जेम्स का है। "हमारा जीवन हमेशा हमारे प्रमुख विचारों के परिणामों को व्यक्त करता हैं।" किर्क गाई।
"मानव व्यक्तित्व का विकास ही मानव की क्षमताओं को प्रकट करेगा- नीत्शे। सार्त्र एक अनीश्वरवादी अस्तित्ववादी है।

54. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए :

सूची–I (दार्शनिक)सूची–II (सिद्धांत)
A. स्पिनोजाI. सत्ताशास्त्रीय द्वैतवाद
B. देकार्तII. गुणों की समानान्तरता
C. बर्कलेIII. पूर्व स्थापित सामंजस्य
D. लाइबनिजIV. अभौतिकवाद

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए :

Correct Answer: (b) A- II, B - 1, C - IV, D - III
Solution:
सूची–Iसूची–II
स्पिनोजागुणों की समानान्तरता
देकार्तसत्ताशास्त्रीय द्वैतवाद
बर्कलेअभौतिकवाद
लाइबनिजपूर्व स्थापित सामंजस्य

55. ईश्वर के अस्तित्व की प्रत्यय सत्ता युक्ति की कांट की आलोचना का मुख्य आधार क्या है?

Correct Answer: (b) अस्तित्व पूर्णता नहीं है
Solution:

ईश्वर के अस्तित्व संबंधी प्रत्यय सत्ता युक्ति की कांट ने आलोचना की। प्रत्यय सत्ता युक्ति के अनुसार 'ईश्वरीय अस्तित्व पूर्ण है।' कांट इसी की आलोचना करते हैं और कहते हैं की "अस्तित्व पूर्णता नहीं है।" कांट ईश्वर के अस्तित्व के सम्बन्ध में अपने नैतिक अनुभवों को देखते हैं और नैतिक प्रमाण के साथ शुरू करते हैं कि, यह व्यावहारिक रूप से ईश्वर के अस्तित्व की मांग करता है और अनुभवजन्य चीजों का अस्तित्व है, जो भौतिक रूप से एक आध्यात्मिक प्रमाण है।

56. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक को अभिकथन (A) और दूसरे को तर्क (R) कहा गया है।

अभिकथन (A): पशु हत्या की वकालत करने वालों के अनुसार यह तर्क स्वीकार्य नहीं है कि किसी पशु की हत्या करना आपत्तिजनक है क्योंकि यह उसकी इच्छा के विरुद्ध है।
तर्क (R) : पशुओं में अपने भावी जीवन की संकल्पना करने, उस पर विचार करने और उसके लिए योजना बनाने के लिए आवश्यक आत्म चेतना की मात्र की कमी होती है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नांकित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (c) (A) और (R )सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
Solution:

चूंकि पशुओं में अपने भावी जीवन के बारे में संकल्पना करने की शक्ति नहीं होती है, उनमें भावी जीवन पर विचार करने उसके लिए योजना बनाने हेतु आवश्यक आत्म चेतना की कमी होती है। इसीलिए पशु हत्या करने वाले यह तर्क अस्वीकार करते हैं कि पशु हत्या उसकी (पशुओं की) इच्छा के विरुद्ध है। अतः स्पष्ट है कि कथन और तर्क दोनों सही है तथा तर्क द्वारा कथन की सही व्याख्या की जा रही है।

57. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक को अभिकथन (A) और दूसरे को तर्क (R) कहा गया है।

इन पर विचार कीजिये और चार्वाक दर्शन के सन्दर्भ में सही कूट का चयन कीजियेः
अभिकथन (A): मृत शरीर को ही उतना ही चेतन होना चाहिए जितना जीवित शरीर को
तर्क (R): चेतना शरीर का गुण है
उपयुक्त कथनों के आलोक में निम्नांकित विकल्पों में से सही उत्तर चुनें :

Correct Answer: (a) (A) सही नहीं है परन्तु (R) सही है
Solution:

भारतीय दार्शनिक परंपरा में चार्वाक दर्शन को नास्तिक दर्शन की श्रेणी में रखा जाता है। चार्वाक आत्मा के स्वतंत्र अस्तित्व को स्वीकार नहीं करते थे। उनका मानना था कि चेतनता शरीर का गुण है जैसे ही शरीर का नाश होता है वैसे ही चेतनता भी नष्ट हो जाती है। चार्वाक कहते हैं कि चेतना शरीर से पृथक नहीं है यदि शरीर से पृथक होती तो मृत्युपरांत दिखलाई पड़ती। चाक के अनुसार चेतन शरीर ही आत्मा है। आत्मा और शरीर के बीच अभेद के कारण चावक के आत्मा संबंधी विचारों को 'देहात्मवाद' कहा जाता है। कथन (A) गलत है जबकि तर्क (R) सत्य है।

58. "जब सीप को रजत समझा जाता है, तब वास्तव में उस सीप में कुछ यथार्थ रजत उपस्थित होता है।" यह किसका विचार है?

Correct Answer: (c) रामानुज
Solution:

रामानुज के अनुसार जब सीप को रजत समझा जाता है, तब वास्तव में उस सीप में कुछ यथार्थ रजत उपस्थित होता है।' रामानुज के भ्रम विचार को 'सतख्यातिवाद' के नाम से जाना जाता है। इनके अनुसार सभी ज्ञान यथार्थ है। जिस विषय का ज्ञान होता है। वह सत है। ज्ञान के विषय को मिथ्या मानना भ्रामक है। यदि सीप को रजत समझा जाता है तब सीप में रजत का अंश है दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि सीप में रजत इसलिए प्रतीत होता है कि सीप में रजत के कुछ लक्षण निहित है। रजत सर्वथा मिथ्या नहीं है।

59. निम्नलिखित न्याय वाक्य पर विचार कीजिए और सही उत्तर दीजिए :

कुछ सांप मैत्रीपूर्ण होते हैं
कोई मैत्रीपूर्ण प्राणी काटते नहीं है।
अतः कोई सांप काटते नहीं है

Correct Answer: (c) इसमें अव्याप्त पक्ष (अमुख्य पद)दोष है
Solution:

कुछ सांप मैत्रीपूर्ण होते हैं। कोई मैत्रीपूर्ण प्राणी काटते नहीं हैं। अतः कोई सांप काटते नहीं हैं इसमें अव्याप्त पक्ष दोष है। किसी भी वैध निरपेक्ष न्यायवाक्य की वैधता के लिए छः नियम माने गये हैं। अव्याप्त या अमुख्य पद दोष वहां होता है जब निरपेक्ष न्यायवाक्य के निष्कर्ष में अमुख्य पद व्याप्त हो और आधार वाक्यों में अव्याप्त हो ।
अर्थात् वैधता के नियमों में से एक के अनुसार, मानक निरपेक्ष न्यायवाक्य में जो पद निष्कर्ष वाक्य में व्याप्त हो इसे आधार वाक्यों में भी अवश्यक व्याप्त होना चाहिए।

60. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक को अभिकथन (A) और दूसरे को तर्क (R) कहा गया है। किर्केगार्ड के सन्दर्भ में विचार कीजिए।

अभिकथन (A): सत्य व्यक्तिपरक है
तर्क (R): सत्य वह नहीं है जो आप मानते हैं, बल्कि सत्य वह है जो आप जीते हैं
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नांकित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (d) (A) और (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
Solution:

कि गार्ड सत्य को व्यक्तिपरक मानते हैं। किर्केगार्ड अपने विश्लेषण में कहते हैं कि सत्य वह नहीं जो आप मानते हैं बल्कि सत्य वह है जिसे आप जीते हैं। इस प्रकार किर्केगार्ड के अनुसार कथन और तर्क दोनों सत्य है परन्तु तर्क द्वारा कथन की व्याख्या नहीं की जाती है।