Solution:संवेगवाद के अनुसार नैतिकता मात्र मनुष्य के संवेगों, अभिवृत्तियों की अभिव्यक्ति है। नैतिक शब्दों में मनुष्य के अनुमोदन, अवश्य व्यक्त रहते हैं, पर उनमें वर्णनात्मक तत्व भी अवश्य रहता है। कथनों के संवेगात्मक अर्थ ही नैतिक निर्णय नहीं बनाते जैसा संवेगवादी मानते हैं। संवेगवाद यह मानता है कि नैतिक प्रेरक बल नैतिक निर्णय में 'मूल्यांकन अवयव' के रूप में प्रयुक्त हो सकते हैं। और निदेशवाद भी इसी तरह का विचार रखता है। अतः उपरोक्त विश्लेषण से स्पष्ट है कि कथन (1) और कथन (II) दोनों सत्य हैं।