यू.जी.सी. NTA नेट /जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020 जून-2021 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY) (Shift – 1)

Total Questions: 100

71. निम्नलिखित में से कौन सा नीचे दिए गए तर्कवाक्यों के बीच सम्बन्ध को दर्शाता है?

सभी विद्यार्थी युवा हैं।
कुछ विद्यार्थी युवा नहीं है।

Correct Answer: (a) विरोधाभासी
Solution:

(A) सभी विद्यार्थी युवा हैं। (O) कुछ विद्यार्थी युवा नहीं है। यह तर्क वाक्य परस्पर विरोधाभासी हैं। जब दो तर्क वाक्य न तो एक साथ सत्य हो और न तो एक साथ असत्य हो, उन्हें विरोधाभासी तर्क वार्क्स कहते हैं।
जब दो तर्क वाक्यों के उद्देश्य और विधेय पद समान हो किन्त परिमाण और गुण दोनों भिन्न हों तो ऐसी स्थिति में उन दोनों तर्क वाक्यों में विरोधाभासी सम्बन्ध होता है। (A) और (O) तथा (E) और (I) तर्कवाक्यों में विरोधाभासी सम्बन्ध होता है।

72. हेराक्लिटस के अनुसार ब्रह्माण्ड का आधारभूत तत्त्व क्या है?

Correct Answer: (c) अग्नि
Solution:

हेराक्लाइट्स ने ब्रह्माण्ड के आधारभूत तत्व के रूप में अग्नि को माना है। इन्होंने कहा कि अग्नि या तेजसतत्व परम तत्व है। इसी से जल और पृथ्वी की उत्पत्ति होती है। यह तत्व ज्वलन्त और गतिशील है। संसार में कुछ भी नित्य नहीं है, सब अनित्य और क्षणिक है। अग्नि या परिवर्तन ही एक मात्र तत्व है।

73. वैदिक परंपरा में आग जलती है क्योंकिः

Correct Answer: (a) यह सृष्टि की व्यवस्था है
Solution:

वैदिक परंपरा के अनुसार सृष्टि की व्यवस्था के रूप में आग जलती है। वैदिक परंपरा में अग्नि को एक लोकप्रिय देवता के रूप में स्वीकार किया गया है।
अग्नि को सृष्टि और देवताओं के बीच एक कड़ी के रूप में स्वीकार किया गया है। वैदिक परंपरा में अग्नि को सूर्य के तुल्य माना गया है, वे सूर्य की तरह चमकते हैं और अन्धकार का नाश करते हैं और प्रकाश फैलाते हैं। अग्नि उपासकों के हितैसी हैं वे उन्हें विपदाओं से बचाते हैं। समृद्धि के देव के रूप में अग्नि को माना गया है।

74. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए :

 सूची–I सूची–II
A. वेदI. ऋत सृष्टि का क्रम है
B. चार्वाकII. अग्नि अपनी प्रकृति के अनुसार जलती है
C.वैशेषिकIII. शब्द पृथक प्रमाण नहीं है
D. मीमांसाIV.अनुपलब्धि पृथक प्रमाण है

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिएः

Correct Answer: (a) A- I, B - II, C - III, D - IV
Solution:

सही सुमेल इस प्रकार है-

सूची–Iसूची–II
वेदऋत सृष्टि का क्रम है।
चार्वाकआग अपनी प्रकृति के अनुसार जलती है।
वैशेषिकशब्द पृथक प्रमाण नहीं है।
मीमांसाअनुपलब्धि पृथक प्रमाण है।

75. "दूसरे के लिए हमारा दायित्व हमारी व्यक्तिपरकता से व्युत्पन्न विशेषता नहीं है, बल्कि यह संसार में हमारी व्यक्तिपरकता को अर्थपूर्ण दिशा और उन्मुखता प्रदान कर आधार प्रदान करता है।

Correct Answer: (a) इमैनुअल लेविनास
Solution:

दूसरों के लिए हमारा दायित्व हमारी व्यक्ति परकता से उत्पन्न विशेषता नहीं है, बल्कि यह संसार में हमारी व्यक्ति परकता को अर्थपूर्ण दिशा और उन्मुखता प्रदान कर आधार प्रदान करता है। यह विचार इमैनुअल लेविनास का है। यह एक फ्रांसीसी दार्शनिक थे। लेविनास यहूदी दर्शन, अस्तित्ववाद और घटना विज्ञान के लिए जाने जाते हैं। इन्होंने अपने दर्शन के केन्द्र बिन्दु में नैतिकता और तत्व मीमांसा को रखा है।

76. "इस ब्रह्माण्ड में कोई सीधी रेखा वास्तव में सीधी नहीं है, कोई वृत्त वास्तव में वृत्ताकार नहीं है। फिर भी पूर्ण सीधी रेखा या वृत्त उनके अपने संसार में रहते हैं- "यह विचार किसे स्वीकार है?

Correct Answer: (b) प्लेटो
Solution:

“इस ब्रह्माण्ड में कोई सीधी रेखा वास्तव में सीधी नहीं है, कोई वृत्त वास्तव में वृत्ताकार नहीं है। फिर भी पूर्ण सीधी रेखा या वृत्त उनके अपने संसार में रहते हैं।” यह कथन ग्रीक दार्शनिक प्लेटो का है। प्लेटो ने ग्रीक दर्शन को चरम उत्कर्ष पर पहुँचाया। अतः उनको पूर्ण ग्रीक की उपाधि दी गई। प्लेटों का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धान्त उनका विज्ञानवाद या प्रत्ययवाद है। इस संसार की सभी वस्तुएं अपूर्ण हैं और वह प्रत्ययों के जगत में पूर्ण होती हैं। पूर्ण वस्तुएं प्रत्ययों के जगत में निवास करती हैं।

77. न्याय दर्शन के अनुसार किस सन्निकर्ष द्वारा भूमि पर घट के अभाव का बोध होता है?

Correct Answer: (a) विशेषणता
Solution:

न्याय दर्शन के अनुसार भूमि पर घट के अभाव का बोध विशेषणता सन्निकर्ष द्वारा होता है। इस प्रकार के सन्निकर्ष में अभाव का प्रत्यक्ष होता है। जैसे हम कहते हैं की 'घटाभाववत भूतलम्' तो यहाँ घटाभाव विषय है जिसमें चक्षु का सन्निकर्ष होता है। यहाँ घटाभाव चक्षु से संयुक्त भूतल का विशेषण है।

78. निम्नलिखित कथनों पर निरूपाधिक तर्क वाक्य के पदों के वितरण के सन्दर्भ में विचार कीजिए?

A. नकारात्मक तर्क वाक्य के विधेय पद वितरित होते हैं
B. सकारात्मक तर्क वाक्य के विधेय पद अवितरित होते हैं।
C. सार्वभौम तर्क वाक्य के उद्देश्य पद वितरित होते हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (c) केवल A, B और C
Solution:

निरूपाधिक तर्कवाक्य चार प्रकार के होते हैं। प्रत्येक तर्कवाक्य के मानक आकार में 'उद्देश्य' एवं 'विधेय' दो पद होते हैं। 'परिमाणक' से वाक्य का प्रारम्भ (सभी, कोई, कुछ) होता है। 'है', 'नहीं है' को संयोजक कहते हैं। तर्कवाक्य का 'गुण' उसके 'सकारात्मक' या 'नकारात्मक' होने को कहते हैं। निरूपाधिक तर्क वाक्यों के संदर्भ में निम्नलिखित बातें सत्य हैं-
(i) निरूपाधिक तर्क वाक्यों में, नकारात्मक तर्क वाक्य के विधेय पद वितरित होते हैं।
(ii) निरूपाधिक सकारात्मक तर्क वाक्य के विधेय पद अवितरित होते हैं।
(iii) सार्वभौम तर्क वाक्य के उद्देश्य पद वितरित होते हैं।

79. किसके अनुसार पूर्ण/सत विलोमों का अभिज्ञान है?

Correct Answer: (b) हीगेल
Solution:

'पूर्ण विलोमों का अभिज्ञान हीगेल मानते हैं।' आधुनिक युग के दर्शन में हीगेल का महत्वपूर्ण योगदान है। इनके अनुसार दर्शन का कार्य भूत, वर्तमान और भविष्य एवं व्यापक तथा प्रगतिशील सत्ता का निरूपण करना है। हेगल के अनुसार दर्शनशास्त्र का लक्ष्य परमतत्व के विकास की समुचित व्याख्या करना है। इनके अनुसार एक मात्र तत्व निरपेक्ष या पूर्ण विज्ञान है। सम्पूर्ण विश्व इसी का परिणाम है।

80. अरस्तु के अनुसार 'वस्तु' क्या है?

Correct Answer: (a) पदार्थ और रूप का यौगिक
Solution:

अरस्तू के अनुसार पदार्थ (Matter) और रूप (Form) का यौगिक ही वस्तु है। अरस्तू कहते हैं कि संसार में दो ही वस्तुएँ हैं- एक तो द्रव्य और दूसरे उनके परिणाम। अरस्तू कहते हैं कि संसार के विविध पदार्थ अपनी जड़ता (Matter) के कारण अनित्य, परिणामी और विनाशशील हैं। इनका सामान्य जो इनका रूप (Form) है, नित्य, अपरिणामी और अविनाशी है। यह भी इनमें अभिव्यक्त होने के कारण इनकी जड़ता से परिच्छिन्न हो जाता है। अरस्तू कहते हैं कि शुद्ध स्वरूप (Pure Form) जो जड़ता (Matter) से नितान्त रहित हो, केवल ईश्वर और आत्मा ही है अतः ये ही वस्तुतः तत्व है।