यू.जी.सी. NTA नेट /जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020 जून-2021 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY) (Shift – 1)

Total Questions: 100

81. निम्नलिखित में से किसने विरलन और संघनन को ब्रह्माण्ड के सृजन की दी भिन्न प्रक्रियाओं के रूप में बताया?

Correct Answer: (b) एनेक्जिमेनीज
Solution:

एनेक्जिमेनीज ने विरलन और संघनन को ब्रह्मांड के सृजन की दो भिन्न प्रक्रियाओं के रूप में बताया। इन्होंने वायु को परम तत्व माना और उसे ही असीम और अनन्त माना। इनके अनुसार वायु ही अग्नि का रूप लेती है और तरल होकर जल बन जाती है और जमकर पृथ्वी के रूप में परिणित हो जाती है। समस्त ब्रह्माण्ड वायु के आधार पर ही टिका हुआ है।

82. वैशेषिक दर्शन के सन्दर्भ में नीचे दिए गए कथनों को पढ़िए:

कथन- I : सम्यक ज्ञान लोगों को यह समझने योग्य बनाता है कि सभी कर्मों की परिणति दुःख में होती है।
कथन-II : किसी व्यक्ति को सभी कर्मों से विमुख होकर मोक्ष प्राप्त करना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:

Correct Answer: (b) कथन I और II दोनों गलत हैं
Solution:

चूंकि कर्म बन्धन का कारण है, अतः कर्म से विरति मोक्ष का साधन है। लेकिन यहां सभी कर्मों से विरति की स्थिति नहीं हो सकती है। अतः कुछ कर्म जो वेदविहित नित्य है का सम्पादन मोक्ष का साधन हैं अर्थात काम्य और प्रतिषिद्ध कर्मों से दूर रहने की बात न्याय वैशेषिक में की जाती है। न्याय वैशेषिक मोक्ष को अपवर्ग कहता है।
मिथ्या ज्ञान के कारण आत्मा में राग द्वेष एवं बंधन उत्पन्न होते हैं। आत्मा कर्मों में प्रवृत्त होकर तरह-तरह के दुःखो को भोगती है। काम्य और प्रतिसिद्ध कर्म जो सुख-दुःख का कारण है विरति से मनुष्य आत्मा को शरीर से अलग समझने लगता है।
कर्मों से विमुख हो जाने पर मनुष्य आत्मा को शरीर से भिन्न समझने लगता है मनुष्य के इस मिथ्या ज्ञान "मैं शरीर और मन हूँ" का अन्त हो जाता है। यह आत्मज्ञान की स्थिति है। इसमें आत्मा दुःखों से मुक्त हो जाती है। यह मोक्षावस्था है। ध्यातव्य है कि न्याय वैशेषिक दर्शन में केवल विदेह मुक्ति को ही प्रामाणिकता मिली है।

83. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक को अभिकथन (A) और दूसरे को तर्क (R) कहा गया है। इकबाल के दर्शन के सन्दर्भ में विचार कीजिए।

अभिकथन (A): अंतः प्रज्ञा एक अविश्लेषणीय ऐक्य है।
तर्क (R) : अंतः प्रज्ञा में ज्ञाता ज्ञात के साथ एक हो जाता है और इसके द्वारा अनुभव करता है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नांकित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (b) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
Solution:

इकबाल ने कहा कि "अन्तःप्रज्ञा एक ऐसा एक्य है जो अविश्लेषणीय है। इसके पीछे उनका तर्क है कि "अंतः प्रज्ञा में ज्ञाता और ज्ञात तादात्म्यक हो जाते हैं और ज्ञाता, ज्ञात के द्वारा अनुभव करता है। अतः कथन और तर्क दोनों सही है तथा तर्क द्वारा कथन की पुष्टि हो रही है।

84. "विद्यार्थी मूर्ख कभी नहीं होते हैं" किस प्रकार का तर्क वाक्य है :

Correct Answer: (b) E तर्क वाक्य
Solution:

गुण और परिमाण को दृष्टिगत रखते हुए निरूपाधिक तर्कवाक्य चार प्रकार के होते हैं। सर्वव्यापी सकारात्मक (A), सर्वव्यापी नकारात्मक (E), अंशव्यापी सकारात्मक (I), अंशव्यापी नकारात्मक(O). प्रश्नगत तर्क वाक्य 'सर्वव्यापी निषेधात्मक तर्क वाक्य' है। जब किसी तर्क वाक्य का उद्देश्य पद का वर्ग विधेय पद के वर्ग में पूर्णतया समाहित न हो तो उसे सर्वव्यापी निषेधात्मक तर्क वाक्य (E) कहते हैं।

85. वैशैषिकों के अनुसार घट का असमवायिकारण कौन सा है?

Correct Answer: (d) कपालसंयोग
Solution:

वैशेषिकों के अनुसार घट का असमवायिकारण 'कपालसंयोग' है।
असमवायिकारण उस गुण या कर्म को कहते हैं जो उपादान कारण में समवेत रहकर कार्य की उत्पत्ति में सहायक होता है। जैसे कपड़े का निर्माण सूतों के संयोग से होता है। इसी प्रकार घट का निर्माण कपाल के संयोग से होता है।

86. चार्वाक दर्शन को स्वीकार्य कूट का चयन करें:

A. कर्मवाद
B. भूत चैतन्य वाद
C. देहात्मवाद
D. सुखवाद
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें :

Correct Answer: (d) केवल B, C और D
Solution:

चार्वाक दर्शन 'कर्मवाद' को स्वीकार नहीं करता है। परन्तु भूत चैतन्यवाद्, देहात्मवाद तथा सुखवाद को स्वीकार करता है। प्राण और चेतना का विकास भूत से ही हुआ है। ज्ञात हो चाक दर्शन, चार भूतों से सृष्टि की उत्पत्ति मानते हैं। चाक आत्मा को शरीर से भिन्न नहीं मानते हैं। वे कहते हैं कि 'चेतन शरीर ही आत्मा है।' आत्मा और शरीर के बीच अभेद मानने के फलस्वरूप चार्वाक के आत्मा संबंधी विचारों को देहात्मवाद कहा जाता है। इसी प्रकार चार्वाक सुखवादी भी है। वह कहते हैं कि मनुष्य को सुखपूर्वक रहने के लिए सभी आवश्यक उपायों को अपनाना चाहिए।

87. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिएः

सूची–I सूची–II
A. वेदांतI. ज्ञान आत्मा का गुण है
B. जैनII. ज्ञान आत्मा का सार है
C. मीमांसाIII. ज्ञान आत्मा का कृत्य है
D. न्यायIV. ज्ञान स्वयं आत्मा है

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिएः

Correct Answer: (d) A-IV, B - II, C - III, D - I
Solution:

सही सुमेल इस प्रकार है-

सूची–Iसूची–II
वेदांतज्ञान स्वयं आत्मा है
जैनज्ञान आत्मा का सार है
मीमांसाज्ञान आत्मा का कृत्य है
न्यायज्ञान आत्मा का गुण है

88. "अच्छाई को जानना अच्छा करना है; नैतिक जीवन में सुख के लिए कोई स्थान नहीं है" - यह किसका विचार है?

Correct Answer: (d) सुकरात
Solution:

"अच्छाई को जानना अच्छा करना है; नैतिक जीवन में सुख के लिए कोई स्थान नहीं है" यह विचार प्रसिद्ध ग्रीक दार्शनिक सुकरात का है। सुकरात की नैतिकता में सुःख का कोई मूल्य नहीं है। सुःख व्यक्ति के नैतिक बनने के मार्ग में बाधा है। अतः सुकरात कहते हैं कि नैतिकतापूर्ण जीवन में सुःख का कोई स्थन नहीं होना चाहिए। सोफिस्टों का 'मनुष्य सभी वस्तुओं का मापदण्ड है।' प्लेटो ने 'बौद्धिक आनन्द' को 'विशुद्ध आनन्द' कहा है। अरस्तू ने 'मध्यमार्ग' का सिद्धांत दिया है।

89. निम्नलिखित में नैतिकता का कौन सा सिद्धांत इस विचार का समर्थन करता है कि मूल नैतिक आधारवाक्य स्वतः सिद्ध हैं और नैतिक गुण गैरस्वाभाविक गुण हैं?

Correct Answer: (b) अन्तः प्रज्ञावाद
Solution:

अन्तः प्रज्ञावाद का सिद्धांत इस विचार का समर्थन करता है कि मूल नैतिक आधार वाक्य स्वतः सिद्ध है और नैतिक गुण गैर-स्वाभाविक गुण है। अन्तः प्रज्ञावाद के अनुसार "मनुष्य की अन्तःप्रज्ञा में ही शुभत्व का प्रत्यय निहित है अर्थात् मनुष्य मूलतः नैतिक प्राणी है। मनुष्य सदैव शुभ कार्य करना चाहता है। वह अशुभ का चयन या तो अज्ञानता में करता है या विकल्प हीनता की स्थिति में।

90. वैदिक परंपरा में सामवेद का ऋत्विक क्या कहा जाता है।

Correct Answer: (d) उद्गाता
Solution:

वैदिक पंरपरा में ऋत्विकों के माध्यम से मंत्रोच्चार तथा यज्ञीय विधियों का निर्वहन किया जाता था।

वेदसंबंधित पुरोहित
वेदऋत्विक
ऋग्वेदहोता
यजुर्वेदअध्वर्यु
सामवेदउद्गाता
अथर्ववेदब्रह्मा