यू.जी.सी. NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020 जून 2021 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY) (Shift – II)

Total Questions: 100

1. वैदिक परंपरा में यज्ञ अनुष्ठान के द्वारा कोई भी किस से मुक्त हो सकता है?

Correct Answer: (b) केवल देवऋण से
Solution:

वैदिक परम्परा के अनुसार मनुष्य यज्ञ अनुष्ठान के द्वारा केवल देवऋण से मुक्त हो सकता है। वैदिक वाङ्मय में ऋणत्रय की चर्चा मिलती है। मनुष्य जन्म से ही तीन प्रकार के ऋण यथा देव, पितृ और ऋषि का ऋणी हो जाता है। गृहस्थ का यह कर्तव्य है कि वह इस ऋणत्रय से मुक्त हो। मनुष्य को ईश्वर और देवों के प्रति ऋणी होना चाहिए तथा यज्ञों और देवस्तुतियों द्वारा देवऋण से मुक्त होना चाहिए। पितृऋण से तात्पर्य माता-पिता और पूर्वजों के प्रति ऋण से है। श्राद्ध द्वारा पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कर तथा सन्तानोत्पत्ति द्वारा श्रृष्टि प्रक्रिया में सहयोग कर पितृऋण से मुक्त हुआ जा सकता है।

2. उत्पत्ति स्थिति और विनाश किस प्रथा में सतद्रव्य के रूप में निहित है।

Correct Answer: (d) जैन
Solution:

जैन दर्शन के अनुसार, जो सत है, वह द्रव्य है। सत् वह है जिसमें उत्पत्ति, विनाश और श्रौव्य (स्थिति) तीनों हों। जगत् की सारी वस्तुएं इन रूपों में हैं। वैशेषिक दर्शन में, द्रव्य, गुण और कर्म का अधिष्ठान है और अपने कार्यों का उपादान कारण माना जाता है। सांख्य दर्शन में गुण का अर्थ तत्त्व अथवा द्रव्य किया गया है।

3. निम्नलिखित पर विचार करें और उस कट का चयन करें जो चार्बाक दर्शन की स्थिति को सही तरीके से प्रस्तुत करता है

Correct Answer: (c) सुखवाद और देहात्मवाद दोनों
Solution:

चाक दर्शन एक भौतिकवादी दर्शन है। यह एक प्रकार से सुखवादी दर्शन भी है क्योंकि इसका ध्येय वाक्य है- “यावत जीवत् सुखं जीवेत्।” चार्याक दर्शन में चैतन्य की सत्ता को स्वीकार किया गया है। किन्तु चेतना को शरीर का गुण माना गया है। चाकी चेतन शरीर को ही आत्मा मानते हैं। आत्मा एवं देह (शरीर) अलग नहीं है। शरीर का अन्त आत्मा का अन्त है। यह मत देहात्मवाद कहलाता है।

4. चार्याक दर्शन के अनुसार अनुमान एक प्रमाण नहीं हो सकता क्योंकि :

Correct Answer: (c) अनुमान के व्याप्ति समबन्ध को स्थापित नहीं किया जा सकता है
Solution:

चावक दर्शन में प्रत्यक्ष को एकमात्र प्रमाण के रूप में माना गया है। चार्वाकों के अनुसार अनुमान को प्रमाण नहीं माना जा सकता है। चूंकि अनुमान व्याप्ति पर आधारित है। परन्तु इसकी स्थापना सम्भव नहीं है।

5. वैदिक परम्परा में ब्रह्म इनमें किसका ऋत्विक हो सकता है?

Correct Answer: (d) ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद
Solution:

वैदिक परम्परा में ब्रह्म ऋग्वेद, सामवेद, और यजुर्वेद का ऋत्विक हो सकता है। ध्यातव्य हो कि वेदों का विभाजन वैदिक यज्ञों में कार्य करने वाले ऋत्विजों ऋत्विकों के आधार पर हुआ था। यज्ञ को सम्पन्न कराने के लिए चार प्रकार के ऋत्विक होते थे- होता, अध्वर्यु, उद्गाता तथा ब्रह्मा। इनमें ब्रह्मा नामक ऋत्विक यज्ञ का निरीक्षण करता है। यद्यपि वह सभी वेदों का ज्ञाता होता है परन्तु उसका अपना विशिष्ट वेद अथर्ववेद है। ऋत्विक या ऋत्विज से तात्पर्य यज्ञ कराने वालों से है।

6. किस दार्शनिक मत के अनुसार बहुयीय वस्तुएं होती तो हैं किन्तु हम उनका अनुभव नहीं कर सकते हैं?

Correct Answer: (a) सौत्रान्तिक
Solution:

सौत्रान्तिकों का बाह्य वस्तुओं का ज्ञान सम्बन्धी मत बाह्य-अनुमेयवाद कहलाता है। सौत्रान्तिक सम्प्रदाय यह मानता है कि चित्त तथा बाह्य वस्तुएं हैं। किन्तु इन वस्तुओं का ज्ञान प्रत्यक्ष अनुभव द्वारा न होकर अनुमान के द्वारा होता है। अतः यहां सौत्रान्तिक सही विकल्प होगा।

7. वैशेषिक के अनुसार एक ऋसरेणु (trasarenu) का असमवायी कारण है

Correct Answer: (c) द्वय-अणु संयोग
Solution:

असमवायिकारण वह है जो समवायिकारण से सम्बन्ध रखता है। एक सरेणु के निर्माण में द्वय अणु संयोग असमवायिकारण है। संयोग में जो द्रव्य की असमवायि कारणता रहती है वह हमेशा साक्षात् सम्बन्ध समवाय से ही है।

8. न्याय दर्शन के अनुसार किस सन्निकर्ष के कारण बर्तन और इसके रंग के बीच सम्बन्ध का हम अनुभव करते हैं?

Correct Answer: (c) विशेषणता
Solution:

न्याय वैशेषिक निकाय में छः प्रकार के सन्निकर्ष माने गये हैं, यथा- (1) संयोग, (2) समवाय, (3) संयुक्त समवाय, (4) संयुक्त समवेत समवाय, (5) समवेत समवाय, (6) विशेष्यविशेषण-भाव। वस्तुतः विशेष्य विशेषण भाव सन्निकर्ष दो प्रकार से होता है- विशेषण भाव तथा विशेष्य भाव। प्रस्तुत प्रश्न में विशेषणता सन्निकर्ष सत्य होगा जिसे विशेषण भाव सन्निकर्ष भी कहते हैं।

9. न्याय दर्शन के अनुसार निम्नलिखित में कौन-सा एक शक्तिग्रह का साधन नहीं है।

Correct Answer: (a) आप्तवाक्य
Solution:

संज्ञा-संज्ञी-सम्बन्ध को ही शक्ति (संकेत) कहते हैं। प्रसिद्ध वस्तु के साधय के आधार पर नहीं देखी गयी वस्तु का ज्ञान प्राप्त करना उपमिति है। संज्ञा-संज्ञी सम्बन्ध उपमिति से सम्बन्धित है और इस सम्बन्ध के विषय को 'शक्तिग्रह' (संकेतज्ञान) कहते हैं। 'शक्तिग्रह' के लिए व्याकरण, तर्क और उपमान साधन रुप है।

10. न्याय दर्शन के अनुसार पानी में कड़वाहट के अभाव का हम किस ज्ञानेन्द्रिय द्वारा अनुभव करते हैं?

Correct Answer: (c) स्वाद इन्द्रियों द्वारा
Solution:

न्याय दर्शन के अनुसार, प्रत्यक्ष प्रमा का मुख्य साधन इन्द्रियाँ हैं। प्राण (नाक), रसना (जीभ), चक्षु, त्वक, और श्रोत पंच बाह्येन्द्रियां हैं जो बाह्य पदार्थों के ज्ञान का साधन है। स्वाद लेने का कार्य जिह्वा (रसना) इन्द्रिय द्वारा होता है। अतः पानी में कड़वाहट के आभाव का ज्ञान स्वादेन्द्रिय (रसनेन्द्रिय) द्वारा होता है।