यू.जी.सी. NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020 जून 2021 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY) (Shift – II)

Total Questions: 100

11. शब्द गुणाः चाक्षुसात्वत हेत्वाभास का कौन सा प्रकार उपरोक्त अनुमान द्वारा प्रतिबद्ध है?

Correct Answer: (b) स्वरूपासिद्ध
Solution:

हत्वाभास दुष्ट हेतु को कहते हैं। सही हेतु की पहचान के लिए हेत्वाभास का ज्ञान होना चाहिए। ध्यातव्य हो कि हेत्वाभास के पांच प्रकार यथा- (1) सव्यभिचार (2) विरुद्ध (3) सत्प्रतिपक्ष (4) असिद्ध (5) बाधित विषय । प्रस्तुत प्रश्न में स्वरूपासिद्ध हेत्वाभास है। स्वरूपासिद्ध वह हेत्वाभास है जिसका स्वरुप प्रमाण सिद्ध न हो। यहां शब्द गुण चक्षु का स्वरुप नहीं है बल्कि श्रोत का है।

12. निम्नलिखित में से किसने यह विचार दिया है कि प्रमाण (ईश्वरसिद्धि प्रमाणाभावात) के अभाव में ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध नहीं किया जा सकता है?

Correct Answer: (d) कपिल
Solution:

सांख्य दर्शन में दो मत है सेश्वर और निरीश्वर। विज्ञानभिक्षु ने, जो सांख्यवादी हैं अपने सूत्र “ईश्वरासिद्धेः” में "प्रमाणाभावात्" इस पद का उल्लेख कर ईश्वर को स्वीकार किया है। यहां कपिल मुनि, जो सांख्य के प्रणेता है, का भी मानना है कि प्रमाण के आभाव में ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध नहीं किया जा सकता।

13. सांख्य के क्रम विकास वाद में प्रकृति का प्रथम विकासज है :

Correct Answer: (c) बुद्धि
Solution:

सांख्य दर्शन के अनुसार पुरुष और प्रकृति के संयोग से शृष्टि का विकास होता है। यह श्रृष्टि के सम्बन्ध में विकासवाद का प्रतिपादन करता है। प्रकृति के क्रम विकासवाद से सर्वप्रथम महत् (बुद्धि) की उत्पत्ति होती है। क्रमशः बुद्धि से अहंकार की, अहंकार से पंच ज्ञानेन्द्रिय, पंच कर्मेन्द्रिय तथा मन की उत्पत्ति होती है। तामस् अहंकार से पंचतन्मात्राओं और उसके बाद पंचमहाभूतों की उत्पत्ति होती है। सांख्य का विकासवाद अचेतन प्रयोजनवाद का उदाहरण है।

14. "जब रजत का सीप में अनुभव किया जाता है, वास्तव में रजत स्मरण में ही आता है यद्यपि यह स्मरण में लाये गये रजत के रूप में प्रत्यक्ष ज्ञान में विद्यमान नहीं होता है" यह विचार किसने दिया है?

Correct Answer: (c) प्रभाकर
Solution:

प्रस्तुत कथन भ्रम के सिद्धान्त से सम्बन्धित है। जो प्रभाकर के 'अख्यातिवाद' से सम्बन्धित है। अख्यतिवाद के अनुसार, प्रत्यक्ष और स्मृति के भेदज्ञान के आभाव के कारण भ्रम उत्पन्न होता है। अतः स्मरण न होने के कारण भ्रमवश हम शुक्ति (सीप) को रजत समझ बैठते हैं।

15. निम्नलिखित में से कौन सा मत जीवनमुक्ति की अवधारणा को मान्यता देता है? सही कूट का चयन कीजिए।

Correct Answer: (d) केवल अद्वैत और सांख्य द्वारा
Solution:

अद्वैत वेदान्त और सांख्य मत जीवन के रहते हुए मुक्ति की सम्भावना को मानते हैं। अर्थात् ये दर्शन जीवन मुक्ति को मानते हैं। चार्वाक दर्शन मोक्ष मृत्यु को ही मानते हैं (मरणं एव अपवर्गः)।

16. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक को अभिकथन (A) और दूसरे को तर्क (R) कहा गया है। चार्वाक दर्शन के सन्दर्भ में इस पर विचार करें और सही कूट का चयन करें:

अभिकथन (A): पानी नीचे की ओर बहता है।
तर्क (R) : पृथ्वी गोल है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

Correct Answer: (b) (A) और (R) दोनों सही है परन्तु (R),(A) की सही व्याख्या नहीं है।
Solution:

चार्वाक दर्शन स्वभाववाद को मानता है। अतः जल का ऊपर से नीचे की ओर बहना उसका स्वभाव है। पृथ्वी गोल है यह भी एक तथ्य है। यहां दोनों कथन सत्य हैं परन्तु (R) (A) की सही व्याख्या नहीं है।

17. नीचे दो कथन दिए गए है: एक को अभिकथन (A) और दूसरे को तर्क (R) कहा गया है।

इस पर विचार करें और सही कूट का चयन करें।
अभिकथन (A) : यहाँ तक कि निर्वाण की अवस्था भी दुख से पूर्णतया मुक्त नहीं हो सकती है।
तर्क (R) : सर्वम दुःखम दुःखम ।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नांकित विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।

Correct Answer: (d) (A) सही नहीं है परन्तु (R) सही है।
Solution:

बौद्ध दर्शन में निर्वाण की अवस्था को दुःखों से पूर्ण निवृत्ति की अवस्था माना गया है। अतः अभिकथन (A) सही नहीं है। बौद्ध दर्शन के चार आर्य सत्यों में से एक 'सर्वम् दुःखम् दुःखम् है। अतः तर्क (R) सही है।

18. निम्नलिखित के सही क्रम का चयन करें:

(A) अवग्रह
(B) इहा
(C) अवाय
(D) धारणा
नीचे दिए गए विकल्पों में सही क्रम का चयन करें।

Correct Answer: (b) A, B, C, D
Solution:

जैन दर्शन में मति ज्ञान एवं श्रुत ज्ञान दो तरह के लौकिक ज्ञान हैं। मति ज्ञान इन्द्रिय और मन से उत्पन्न होने वाला ज्ञान है। मति ज्ञान के चार प्रमुख भेद क्रमशः अवग्रह, ईहा, अवाय एवं धारणा है। इन्द्रिय और अर्थ के सम्बन्ध से जो ज्ञान होता है वह क्रमशः है।

19. निम्नलिखित के सही क्रम का चयन करें:

(A) सम्यक व्यायाम
(B) सम्यक आजीव
(C) सम्यक समाधि
(D) सम्यक स्मृति
नीचे दिए गए विकल्पों में सही उत्त चुनें :

Correct Answer: (c) B, A, D, C
Solution:

बौद्ध दर्शन में चतुर्थ आर्य सत्य में निर्वाण प्राप्ति के उपाय बताये गये हैं, जिन्हें अष्टांगिक मार्ग के रुप में जाना जाता है। ये मार्ग हैं, क्रमशः- (1) सम्यक् दृष्टि (2) सम्यक् संकल्प (3) सम्यक् वाक् (4) सम्यक् कर्मान्त (5) सम्यक् आजीव (6) सम्यक व्यायाम (7) सम्यक् स्मृति (8) सम्यक् समाधि । जो प्राणी इन मार्गों का पालन करता है वह दुःख से निवृत्ति प्राप्त करता है।

20. निम्नलिखित शाखाओं पर विचार करें और उस कूट का चयन करें जो ईश्वर के अस्तित्व को अदृष्ट की सहायता से सिद्ध करने वाली शाखा का प्रतिनिधित्व करती है।

(A) न्याय
(B) वैशेषिक
(C) 'मीमांसा
(D) सांख्य
नीचे दिए गए विकल्पों से सही को चुनिए :

Correct Answer: (b) केवल A और B
Solution:

न्याय-वैशेषिक दर्शन में ईश्वर की सत्ता को सिद्ध करने के लिए जो प्रमाण दिये गये हैं, उनमें एक प्रमाण अदृष्ट के आधार पर है। ज्ञात हो की नैयायिक ईश्वर की सत्ता की सिद्धि के लिए आगमन प्रमाण और अनुमान दोनों को आधार बनाते हैं। न्याय दर्शन में अनुमान के आधार पर जो प्रमाण दिये गये हैं वो हैं-
(1) कार्य (2) अदृष्ट (3) आयोजन (4) धृति (5) विनाश (6) पद (7) प्रत्यय (8) श्रुति (9) वाक्य (10) संख्या-विशेष । ये सब प्रमाण उदयनाचार्य ने अपने ग्रन्थ 'न्यायकुसुमांजलि' में दिया है। ईश्वर के स्वरुप और प्रमाण के सम्बन्ध में न्याय और वैशेषिक दर्शन के आचार्यों में कोई मतभेद नहीं है।