Solution:सृष्टि प्रक्रिया को समझाने के लिए श्री अरविन्द सत् (Reality-यथार्थ) के आठ स्तरों की बात करते हैं। जो क्रमशः सत्, चित्-शक्ति, आनन्द, अतिमन, मनस्, आत्मा, जीवन, भौतिक वस्तु (जड़ पदार्थ) हैं। श्री अरविन्द के अनुसार, विकास प्रक्रिया में 'मनस्' मानव मन से सम्बन्धित है जो अपने निचले स्तरों से तो ऊपर है लेकिन अभी भी वह सत् (यथार्थ) को भेद दृष्टि से ही देखता है। जबकि परम मनस् (अतिमन) सत् को एकात्म रुप में प्रस्तुत करता है। सत् या यथार्थ को समझने की दृष्टि से मनस् और परम मनस में अन्तर है।