यू.जी.सी. NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020 जून 2021 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY) (Shift – II)

Total Questions: 100

51. "अस्तित्व ज्ञान और सम्प्रेषण सभी असम्भव है" - यह उक्ति किसकी है।

Correct Answer: (c) गार्जियस
Solution:

"अस्तित्व, ज्ञान और सम्प्रेषण सभी असंभव है" यह कथन गार्जियस (Gorgias) का है। जो एक सोफिस्ट विचारक हैं। ऐसा माना जाता है, इनका चिंतन संशयवादी चिंतन था। जॉर्जियस की तीन बातें निम्न हैं-
(1) किसी भी वस्तु का अस्तित्व नहीं है।
(2) यदि कोई वस्तु है, तो वह अज्ञेय है। और
(3) अगर उस वस्तु का ज्ञान हो भी जाये तो किसी और को संप्रेषित नहीं किया जा सकता।

52. "ओक का पेड़, ओक के बीज में पूर्व से ही निहित होता है यद्यपि यह अव्यक्त स्वरूप में होता है" यह विचार किसका है?

Correct Answer: (c) अरस्तू
Solution:

'ओक का पेड़ ओक के बीज में अव्यक्त स्वरुप में निहित होता है। यह कथन अरस्तु का है। अरस्तु के अनुसार सभी प्रकार का परिवर्तन संभाव्यता से वास्तविकता की ओर अग्रसर होता है। अर्थात् अरस्तू के अनुसार, 'प्रारम्भ अन्त में ही विद्यमान है।'

53. प्लेटो के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा सही है? सही कूट को चिन्हित करें:

A. प्लेटो ने इस विचार का खंडन किया कि ज्ञान अभिमत है।
B. प्लेटो ने बताया है कि कलाकारों को देश से निर्वासित कर देना चाहिए।
C. प्लेटो ने बताया कि सभी चीजें विषयनिष्ट हैं

Correct Answer: (a) A और B सही है।
Solution:

प्लेटो ने 'ज्ञान मत है' का खण्डन किया है। मत चाहे सही हो अथवा गलत वह ज्ञान नहीं हैं। इसके अतिरिक्त वह प्रवृत्तिगत विश्वास को भी ज्ञान नहीं मानते। इसके अतिरिक्त उनके अनुसार कलाकारों को देश से निस्काषित कर देना चाहिए। प्लेटो के अनुसार कवि या चित्रकार का महत्त्व मोची या बढ़ई से भी कम है, क्योंकि वह अनुकृति मात्र प्रस्तुत करता है, जो सत्य से बहुत दूर होता है। यही प्लेटो का अनुकरण सिद्धान्त है। प्लेटो का ज्ञान से सम्बन्धित सिद्धान्त शुद्ध प्रत्ययवाद कहलाता है। प्रत्यय स्वतंत्र, निरपेक्ष होते हैं। अतः आत्मनिष्ठता का प्रश्न ही नहीं उठता है।

54. हेराक्लिटस के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों में कौन से कथन सही हैं?

(A) वायु ब्रह्माण्ड की मौलिक सामग्री है।
(B) वास्तविक अवशेष हमेशा के लिए समान होता है।
(C) संघर्ष सभी वस्तुओं का जनक है।
(D) एक वस्तु विरोधों की पहचान हैं।

Correct Answer: (c) C और D सही हैं
Solution:

हेराक्लाइट्स के अनुसार, कोई भी वस्तु उसी क्षण है भी और नहीं भी। यह संभूति का सिद्धान्त है। उनके अनुसार सत् में ही नहीं, संसार की सभी वस्तुओं में उसका विरोधी तत्त्व मौजूद है। हेराक्लाट्स अग्नि को जगत् का मूल तत्त्व मानते हैं। वायु को एनेक्जिमेनीज ने मौलिक तत्व माना है। हेराक्लाट्स परिवर्तन को सत् मानते हैं और संघर्ष को सभी वस्तुओं का जनक मानते हैं।

55. "पारंपरिक नैतिकता मानव निर्मित है: यह निर्बलों द्वारा बनाया गया है। जिसकी लाठी उसकी भैंस (माईट इज राइट)" यह उक्ति किसकी है?

Correct Answer: (c) सोफिस्ट
Solution:

साफिस्टों का नैतिक दर्शन मानवकेन्द्रित तथा भौतिकवादी था। इनके अनुसार, शुभ-अशुभ, उचित अनुचित आदि व्यक्ति सापेक्ष होते हैं और वस्तुओं के सभी गुण वस्तुपरक न होकरव्यक्तिनिष्ठ होते हैं। अर्थात व्यक्ति विशेष की इच्छाओं या भावनाओं के अनुकूल कर्म ही शुभ या उचित है। उपर्युक्त कथन सोफिस्टों का है।

56. निम्नलिखित कथनों में से कौन से सही है?

(A) सेंट आगस्टाइन आस्तिक थे
(B) सेंट आगस्टाइन ने प्लेटो का गहन अनुसरण किया
(C) सेंट आगस्टाइन संदेहवादी थे
(D) सेंट आगस्टाइन अज्ञेयवादी थे

Correct Answer: (a) A और B सही है।
Solution:

सेंट आगस्टाइन एक ईश्वरवादी दार्शनिक थे। इनको 'ईसाई धर्म का प्लेटो' कहा जाता है। ये प्लेटो के दर्शन से प्रभावित थे। ये न तो संदेहवादी थे और न ही अज्ञेयवादी थे। आगस्टाइन के अनुसार ईश्वर के अस्तित्व को प्रमाणों द्वारा जाना जा सकता है। इसके अतिरिक्त ईश्वर को श्रद्धा तथा धर्मग्रन्थों के आधार पर भी जाना जा सकता है।

57. "केवल ईश्वर में ही कोई भी निर्मात्री तत्त्व नहीं है, उसका सार विशुद्ध रूप और अस्तित्व का केवल उसका कृत्य है" इसे किसने स्वीकार किया है?

Correct Answer: (b) सेंट थॉमस एक्विनास
Solution:

सन्त एन्सेलम अपने दर्शन में ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करने के लिए कई प्रमाण देते हैं। उनके अनुसार ईश्वर पूर्ण सत् है तथा वही परम् सत्ता है। एन्सेलम ने ईश्वर को 'पूर्ण द्रव्य माना जिसके अन्दर गुणों का आभाव पाया जाता है।
लेकिन यह कथन कि, 'ईश्वर ही है जिसमें कोई निर्मात्री तत्व नहीं है, उसका सार विशुद्ध रुप और अस्तित्व का केवल उसका कृत्य है' टॉमस एक्वीनास का है। एक्वीनास ने ईश्वर की सत्ता को प्रमाणित करने के लिए पांच तर्क दिये हैं। एक्वीनास अज्ञेयवाद और सर्वेश्वरवाद के मध्य का मार्ग चुनते हैं।

58. लाइबनिज के सन्दर्भ में सही उत्तर को चिन्हित करें

A. लेबनिज में एकत्ववाद और बहुवाद में संगति है।
B. लेबनिज में प्रत्ययवाद और यथार्थवाद पाया जाता है।
C. लेबनिज में परम भौतिकवाद स्वीकार है।
D. पर्याप्त कारण का नियम “लेबनिज के सिद्धान्त की रक्षा करना है”

Correct Answer: (d) A, B और D सही है।
Solution:

लाइबनित्ज जो एक बुद्धिवादी दार्शनिक थे का दर्शन 'चिदणुवाद के रूप में जाना जाता हैं। उनके अनुसार द्रव्य एक नहीं है बल्कि अनन्त, असंख्य तथा ब्रह्माण्ड में सब जगह है। चिद परमाणुओं की तरह भौतिक कण नहीं हैं, इनकी प्रकृति 'चेतन' है। चिदणु ही विश्व के मूल द्रव्य हैं अतः लाइबनित्ज किसी भी तरह से भौतिकवादी नहीं हैं।
लाइबनित्ज चार प्रकार के नियम मानता है जो चिदणु मे पाये जाते हैं। सातत्य का नियम, समानता का नियम, असमानता का नियम, शक्ति के संरक्षण का नियम ।

59. ईश्वर द्वारा सृजित यह विश्व सभी संभव हो पाने वाले विश्व का सर्वश्रेष्ठ है" इस विचार का प्रतिपादन किसने किया?

Correct Answer: (c) लाइबनिज
Solution:

लाइबनित्ज के अनुसार, 'ईश्वर पूर्णतम चिदण है' वह सभी चिदणुओं का भी चिदणु है। लाइबनिज जगत को ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति मानता है।

60. "इस ब्रह्माण्ड में घटनाएँ इतनी व्यवस्थित हैं कि यहाँ संयोग के लिए भी स्थान नहीं है।" इसका पक्ष किसने लिया है?

Correct Answer: (b) स्पिनोजा
Solution:

स्पिनोजा ने डेकार्ट के संयोगवाद की आलोचना की है। डेकार्ट ने मन शरीर सम्बन्ध की क्रिया प्रतिक्रिया चिदाचित संयोग के आधार पर व्याख्या की है। स्पिनोजा का मत समानांतरवाद कहलाता है। स्पिनोजा के अनुसार, "इस ब्रह्माण्ड में घटनाएं इतनी व्यवस्थित हैं कि जहां संयोग के लिए कोई भी स्थान नहीं है।" स्पिनोजा का दर्शन सर्वेश्वरवाद, अद्वैतवाद के नाम से जाना जाता है। उनके अनुसार ईश्वर जगत् का निमित्त और उपादान दोनों कारण है।