यू.जी.सी. NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020 जून 2021 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY) (Shift – II)Total Questions: 10061. सूची - I को सूची -II से सुमेलित कीजिएसूची-I सूची-IIसिद्धान्तदर्शनशास्त्रीA. विषयनिष्ठ प्रत्ययवादI. स्पिनोजाB. मन-शरीर द्वैतवादII. लाइबनिट्जC. सर्वेश्वरवादIII. देकार्तD. चिणुवादIV. बर्कलेनीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिएः(a) A-III, B-IV, C-II-D-I(b) A-IV, B-III, C-I, D-II(c) A-II, B-I, C-IV, D-III(d) A-I, B-II, C-III, D-IVCorrect Answer: (b) A-IV, B-III, C-I, D-IISolution:सूची-Iसूची-II(A) विषयनिष्ठ प्रत्ययवादIV बर्कले(B) मन-शरीर द्वैतवादIII देकार्त(C) सर्वेश्वरवादI स्पिनोजा(D) चिदणुवादII लाइबनिज62. "विश्व के बारे में सभी महत्वपूर्ण सत्य युक्ति तर्कबुद्धि द्वारा पता लगाने योग्य है" यह विवाद किसका है?(a) कांटवाद(b) तर्कबुद्धिवाद(c) इन्द्रियानुभाविक(d) रहस्यवादCorrect Answer: (b) तर्कबुद्धिवादSolution:तर्क-बुद्धिवाद अथवा बुद्धिवाद के अनुसार समस्त ज्ञान जन्म से ही बुद्धि में ही है। विश्व के बारे में समस्त सत्यों का उद्घाटन हम बुद्धि (Reason) के द्वारा कर सकते हैं। कांटवाद एक तरह का समन्वयवाद है और यह इन्द्रियानुभव और बुद्धिवाद का समन्वय करता है। इन्द्रियानुभविक समस्त सत्य ज्ञान को इन्द्रियों के माध्यम से मानता है। और रहस्यवादी ज्ञान को रहस्य के रूप में देखता है।63. किसने ज्ञानमीमांसीय द्वैतवाद का प्रतिपादन किया?(a) बर्कले(b) लॉक(c) देकार्त(d) डेमोक्रिटसCorrect Answer: (b) लॉकSolution:लॉक का दर्शन ज्ञानमीमांसीय द्वैतवाद है। डेकार्ट भी द्वैतवादी दार्शनिक है, किन्तु तत्वमीमांसीय रूप में। बर्कले आत्मनिष्ठ प्रत्ययवादी हैं। बर्कले ने लॉक के द्वैतवाद की आलोचना की है और बाह्य जड़ पदार्थों की सत्ता को आत्मा पर निर्भर माना है। डेमोक्रिटस का सिद्धान्त परमाणुवाद है।64. निम्नलिखित में से किसने नाममात्रवाद के सिद्धांत का प्रतिपादन किया?(a) बर्कले(b) कांट(c) देकार्त(d) लाइबनिजCorrect Answer: (a) बर्कलेSolution:बर्कले के अनुसार, 'अमूर्त काल्पनिक विज्ञान' असंभव है। बर्कले के अनुसार हमारा ज्ञान विशेषों का है न कि सामान्यों का। बर्कले के अनुसार, सार्वभौमिक (सामान्य) और अमूर्त वस्तुएं काल्पनिक हैं, नाममात्र हैं। उनका कोई अस्तित्व नहीं हैं। अर्थात् काल्पनिक विज्ञान वदतोव्याघात है।65. कान्ट के सन्दर्भ में निम्नलिखित में कौन से सही है? सही उत्तर को चिन्हित करेंA. दिक और काल अवबोध के प्रागनुभविक स्वरूप हैं। B. प्रत्यय सत्ता युक्ति द्वारा ईश्वर के अस्तित्व को प्रमाणित किया जा सकता है। C. प्रत्यय-निरपेक्ष-सत को जाना नहीं जा सकता नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः(a) केवल A सही हैं।(b) केवल A और B सही हैं।(c) केवल A और C सही हैं।(d) केवल B और C सही हैं।Correct Answer: (c) केवल A और C सही हैं।Solution:काण्ट के अनुसार, देश काल अवबोध (Perception) के प्रागनुभविक आकार हैं। यह विशुद्ध प्रत्यक्ष हैं। देश काल का विभाजन सम्भव नहीं है। काण्ट के अनुसार प्रत्यय-निरपेक्ष सत (Noumenon) / परमार्थ को जाना नहीं जा सकता है। हमारे ज्ञान का विषय 'संवृत्ति' (Phenomenon) है। इसके अतिरिक्त काण्ट ईश्वर के अस्तित्व के सम्बन्ध में दिये गये प्रमाणों का खण्डन करते हैं, यथा-प्रत्यय-सत्तामूलक, विश्व कारण मूलक, भौतिक धार्मिक युक्तियाँ ।66. "कला अंतः प्रज्ञा का एक प्रकार है" यह किसे स्वीकार्य है?(a) कान्ट(b) हेगेल(c) स्पिनोजा(d) लाईबिनित्जCorrect Answer: (b) हेगेलSolution:हेगेल के दर्शन में, कला अंतः प्रज्ञा का एक प्रकार है। हेगेल अंतः - प्रज्ञा निरपेक्ष आत्मा को तीन प्रकार से परिभाषित करता है, क्रमशः - कला, धर्म, दर्शन। हेगेल, कला के ऊपर धर्म का स्थान तथा धर्म एवं कला से उत्कृष्ट दर्शन को मानता है।67. लाईबिनिज के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन से कथन स्वीकार्य है? सही उत्तर को चिन्हित करें।A. चिणु गवाक्षहीन है। B. चिणु भौतिक बिंदु हैं। C. चिणु गणितीय बिंदु है।(a) A और B सही है।(b) A और C सही है।(c) B और C सही है।(d) केवल A सही है।Correct Answer: (d) केवल A सही है।Solution:लाइबनिज अपने चिदणुवाद में चिदणुओं को चेतन मानते हैं। लाइबनित्ज ने चार प्रकार से चेतना को परिभाषित किया है- (1) स्वचेतन (2) चेतन (3) उपचेतन (4) अचेतन। यहां 'अचेतन' से तात्पर्य चेतना का आभाव नहीं है, बल्कि चेतना की कमी है। उपचेतन और अचेतन को लाइबनित्ज 'लघु चेतन' कहते हैं। चिदणुओं में कोई तात्विक भेद न होकर संख्यागत भेद हैं। प्रत्येक चिदणु को गवाक्षहीन (Windowless) माना गया है। फिर भी प्रत्येक चिदणु स्वयं को और पूरे ब्रह्माण्ड को प्रकाशित करने की क्षमता रखता है।68. किसने निश्चयवाद का प्रबल तरीके से पक्ष लिया?(a) बर्टेड रसेल(b) स्पिनोजा(c) डेविड ह्यूम(d) प्रोटागोरसCorrect Answer: (b) स्पिनोजाSolution:स्पिनोजा ने निश्चयवाद का समर्थन किया है। स्पिनोजा के अनुसार विश्व की प्रत्येक घटना में अनिवार्यता है। स्पिनोजा के अनुसार जगत ईश्वर की स्वभाविक अभिव्यक्ति है। ऐसे में व्यक्तिगत स्वतंत्रता का स्थान कम हो जाता है। स्पिनोजा किसी भी प्रकार का प्रयोजन नहीं मानते। ईश्वर में प्रयोजन मानना त्रुटिपूर्ण है। स्पिनोजा का दर्शन सर्वेश्वरवाद या रहस्यवाद कहलाता है।69. निम्नलिखित किस विचार से देका सहमत नहीं होते थे? सही कूट को चिन्हित करें(A) सहज प्रत्यय का सिद्धांत (B) उभयेत्तर वस्तु (C) ज्ञान का निरूपक सिद्धांत (D) अन्योन्यक्रियावाद(a) A और B(b) A और D(c) B और D(d) केवल CCorrect Answer: (d) केवल CSolution:डेकार्ट के अनुसार, हमारा समस्त ज्ञान जन्मजात है। सहज प्रत्ययों (Innate Ideas ) और निगमन के द्वारा यथार्थ ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। मन शरीर सम्बन्ध का अन्योंन्य क्रियावाद, सहज प्रत्यय ज्ञान, तथा उभयेत्तर वस्तु का सिद्धान्त डेकार्ट का है। ज्ञान का निरूपक सिद्धान्त डेकार्ट का न होकर प्लेटो का है।70. किसके अनुसार मानव बुद्धि केवल ग्राही है न कि सर्जनात्मक?(a) देकार्त(b) लाक(c) बर्कले(d) लाईबिनिजCorrect Answer: (b) लाकSolution:लॉक के अनुसार, मानव बुद्धि सर्जनात्मक न होकर ग्राही (Receptive) है। डेकार्ट के अनुसार, 'बुद्धि यथार्थ ज्ञान की जननी है। अर्थात् सर्जनात्मक है। लाइबनिन्ज भी बुद्धि को सर्जनात्मक मानते हैं। लेकिन लॉक के अनुसार हमारा समस्त ज्ञान इन्द्रियानुभव से आता है। बर्कले के अनुसार कुछ विषयों को हमारी बुद्धि स्वयं उत्पन्न करती है।Submit Quiz« Previous12345678910Next »