यू.जी.सी. NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020 जून 2021 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY) (Shift – II)

Total Questions: 100

81. वैशेषिक दर्शन के सन्दर्भ में निम्नलिखित को कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए ?

(A) प्रयत्न
(B) बुधि (विद्या)
(C) संस्कार
(D) धर्म (क्षमता)
कूट :

Correct Answer: (c) B, A, D, C
Solution:

वैशेषिक दर्शन में सात पदार्थ माने गये हैं। दिया गया प्रश्न 'गुण' पदार्थ के कालाक्रम से सम्बन्धित है। 'गुण' 'द्रव्य' में रहता है और गुण का कोई गुण नहीं होता है। 'गुण' संख्या में 24 हैं, जो क्रमशः- रूप, रस, गन्ध, स्पर्श, संख्या, परिमाण, संयोग, विभाग, परत्व और अपरत्व, बुद्धि, सुख, दुःख, इच्छा, द्वेष, प्रयत्न, गुरूत्व, द्रवत्व, स्नेह, संस्कार, धर्म और अधर्म, शब्द हैं।
अतः बुद्धि → प्रयत्न → संस्कार → धर्म ।

82. "मिथ्याज्ञान के लोप का दोष के लोप द्वारा, यह अपने प्रयोग के समय पर प्रवृत्ति के लोप द्वारा, यह जन्म के लोप द्वारा, यह फिर कष्ट के लोप द्वारा अनुगमन किया जाता है" यह कथन भारतीय दर्शन की निम्नलिखित शाखा के किस विषय से सम्बन्धित है।

Correct Answer: (a) न्याय
Solution:

सभी दर्शनों की भांति न्याय दर्शन में भी बन्धन का कारण गलत ज्ञान (अविद्या) मिथ्या ज्ञान माना गया है। उपयुक्त कथन न्याय दर्शन से सम्बन्धित है।

83. निम्नलिखित में से किस नीतिशास्त्री ने तर्क किया कि सुखवादी परिभाषा का निहितार्थ यह है कि प्रश्न "क्या कोई वस्तु जो कि सुखद शुभ है?" का अर्थ इस प्रश्न के जैसे हैकि "क्या कोई वस्तु जो कि सुखद सुखद है?"

Correct Answer: (b) जी ई. मूर
Solution:

जी.ई. मूर का नैतिक दर्शन नव्य अन्तः प्रज्ञावाद के नाम से जाना जाता है। मूर के अनुसार, 'शुभ' अपरिभाष्य एवं अविश्लेष्य है। उनके अनुसार 'शुभ वस्तु' को परिभाषित किया जा सकता है। मूर ने सुखवाद, विकासवाद, आत्मपूर्णतावाद, आदि सभी सिद्धान्तों का खण्डन किया है। उनके अनुसार, सुखवादियों का यह कथन कि 'कोई वस्तु सुखद है, शुभ हैं अर्थात यहाँ 'शुभ' की प्रकृतिवादी व्याख्या की जा रही है। जो एक तरह का प्रकृतिवादी दोष है।

84. निम्नलिखित कथनों को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा सबसे उपयुक्त विकल्प को चुनेंः

कथन-I: नियम-उपयोगितावाद के अनुसार एक कृत्य तभी और केवल तभी उचित होगा जब वह एक ऐसे नियम समूह का अनुगमन करता हो जिससे अधिकतम लोगों के लिए दुःख पर सुख का अधिकतम संतुलन उत्पन्न होता हो,
कथन-II : कृत्य उपयोगितावाद के अनुसार एक कृत्य तभी और केवल तभी उचित होगा जब वह एक ऐसे नियम समूह का अनुगमन करता हो जिससे अधिकतम लोगों के लिए दुःख पर सुख का अधिकतम संतुलन उत्पन्न होता हो,
उपर्युक्त कथनों के अलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चुनाव कीजिए:

Correct Answer: (a) कथन I और II दोनों सही हैं।
Solution:

नियम उपयोगितावाद और कृत्य कर्म उपयोगितावाद उपयोगितावाद का एक प्रकार है। नियम उपयोगितावादी किसी भी कृत्य को तभी उचित मानता है जब वह कुछ नैतिक नियमों के समूह से सम्बन्धित हो और अधिकतम व्यक्ति के अधिकतम सुख की बात करता हो। इसके अलावा कर्म कृत्य उपयोगितावादी किसी भी कार्य को तभी उचित कहता है जिसे करने पर अधिकतम व्यक्तियों को अधिकतम सुख प्राप्त हो।

85. कथन - "अपराधिक कृत्य एक निषेध है, और दण्ड एक निषेध का निषेध है" यह दण्ड के निम्नलिखित किस सिद्धांत की एक अभिव्यक्ति है?

Correct Answer: (a) प्रतिकारी सिद्धांत
Solution:

'दण्ड' शब्द एक कानूनी शब्द है। दण्ड के तीन सिद्धान्त (1) प्रतिरोधात्मक (2) सुधारात्मक तथा (3) प्रतिकारात्मक सिद्धान्त। प्रतिरोधात्मक सिद्धान्त के अनुसार, किसी अपराधी को दण्ड देने का उद्देश्य भविष्य में अन्य व्यक्तियों को अपराध करने से रोकना है। सुधारात्मक सिद्धान्त, अपराधी को दण्ड देने का उद्देश्य अपराधी के चरित्र में सुधार करना है। प्रतिकारात्मक सिद्धान्त में, दण्ड देने का उद्देश्य यह है कि अपराधी का यह अर्जित फल है अर्थात् यदि उसने किसी का सिर फोड़ा है तो उस व्यक्ति/अपराधी का भी सिर फोड़ दिया जाये। इस तरह, इस सिद्धान्त के अनुसार, 'अपराधी के कृत्य का एक तरह का निषेध है।' अतः इस निषेध का भी निषेध होना चाहिए।

86. लॉक और कान्ट के नीतिशास्त्रीय विचारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों में कौन से सही हैं?

(A) उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा कि "मानव के अधिकारों में सर्वप्रथम अधिकार जीवन का अधिकार है।
(B) उन्होंने तर्क दिया है कि इन अधिकारों का तब उल्लंघन होता है जब कोई किसी के जीवन को समाप्त करने का अपराध कर डालता है।
(C) वे विश्वास करते थे कि एक हत्यारा अपने स्वयं के जीवन जीने की पात्रता को खो देता है और इस प्रकार मृत्यु का पात्र हो जाता है।
(D) वे विश्वास करते थे कि चूँकि जीवन का अधिकार सर्वप्रथम है इसे अपराधी से भी कदापि नहीं छीना जा सकता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

Correct Answer: (a) केवल A, B और C
Solution:

मानवअधिकार ऐसे आधारभूत अधिकार हैं, जिन्हे प्रायः 'न छिने' जाने योग्य माना जाता है। लॉक ने अपने नैतिक और राजनैतिक दर्शन में मानवाधिकारों की व्याख्या की है, जिन्हें वह 'प्राकृतिक अधिकार' के रूप में कहता है। काण्ट ने भी अपने नैतिक दर्शन में मानव को नैतिक मापदण्ड का साध्य मानकर 'मानव अधिकारों' की बात कही है। 'द वेल्व आर्टिकल्स ऑफ द ब्लैक फॉरेस्ट' को यूरोप मे मानवाधिकारों का सर्वप्रथम दस्तावेज माना जाता है।

87. नीचे दो कथन दिए गए हैं:

कथन I - कांट का नैतिक सिद्धांत मृत्यु - दण्ड को समर्थन देता है,
कथन II- हत्या के लिए मृत्यु - दण्ड के समर्थक प्रतिकारात्मक न्याय तथा समाज के नैतिक रोष की उपयुक्तता पर अपने मत को आधारित करते हैं,
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चुनाव कीजिए:

Correct Answer: (a) कथन I और II दोनों सही है।
Solution:

कांट के अनुसार अपराधी को दण्ड इसलिए दिया जाना चाहिए कि उसने अपराध किया है। उसके अपराध का इनाम, उसके विनाशकारी मूल्य के बराबर दिया जाना चाहिए। अतः काण्ट दण्ड के प्रतिकारात्मक सिद्धान्त का समर्थक है। जहां हत्या करने की सजा मृत्युदण्ड हो। वास्तव मे हत्या के लिए मृत्युदण्ड के समर्थक प्रतिकारात्मक न्याय और समाज के नैतिक रोष के आधार पर अपने मत का समर्थन करते हैं।

88. निम्नलिखित कथनों को ध्यानपूर्वक पढ़े तथा सबसे उपयुक्त विकल्प को चुनें

कथन I- चार्ल्स एल स्टीवेंसन ने मूल्यांकन परक कथन तथा तथ्यात्मक कथनों को भिन्न तार्किक विशेषताओं से युक्त माना
कथन II- चार्ल्स एल स्टीवेंसन ने माना की मूल्यांकनपरक कथन तथा तथ्यात्मक कथनों के बीच कोई सम्बन्ध नहीं होता
उपयुक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चुनाव कीजिए:

Correct Answer: (a) कथन I और II दोनों सही हैं।
Solution:

चार्ल्स एल. स्टीवेन्सन नैतिक भाषा के सन्दर्भ में एक संवेगवादी दार्शनिक हैं। स्टीवेन्सन अवर्णनात्मक सिद्धान्त के समर्थक है। अवर्णनात्मक सिद्धान्त के अनुसार नैतिक निर्णय मूलतः तथ्यात्मक निर्णयों से अलग होते हैं और वे किसी तथ्य का वर्णन मात्र न करके निर्णयकर्ता की भावनाओं को अभिव्यक्त करते हैं।

89. नीतिशास्त्र की कौन सी निम्नलिखित शाखा को नैतिक पदों के अर्थ और तार्किक विशेषताओं विषयक अन्वेषण के रूप में संप्रेषित किया जाता है?

Correct Answer: (a) अधिनितिशास्त्र
Solution:

नीतिशास्त्र की चार शाखाएं हैं- (1) वर्णनात्मक नीतिशास्त्र (2) मानकीय नीतिशास्त्र (3) अधिनीतिशास्त्र (4) व्यावहारिक नीतिशास्त्र । अधिनीतिशास्त्र (Meta ethics) में नैतिक पदों के अर्थ और तार्किक विशेषताओं का विश्लेषण एवं जाँच की जाती है।

90. व्यवसायिक नीतिशास्त्र के क्षेत्र में पृथक्करण पक्ष के निम्नलिखत कथनों में कौन से सही हैं?

(a) X एक व्यवसायिक विनिश्चय है" जैसे वाक्यों में कोई नैतिक अंश नहीं है।
(b) X एक नैतिक विनिश्चय है" जैसे वाक्यों में कोई व्यवसायिक अंश नही है।
(c) X एक व्यावसायिक विनिश्चय है" जैसे वाक्यों में नैतिक और व्यवसायिक दोनों अंश है।
(d) “X एक व्यावसायिक विनिश्चय है" जैसे वाक्यों में नैतिक अंश है "जबकि X एक नैतिक विनिश्चय है" जैसे वाक्यों में व्यवसायिक अंश हो भी सकता है अथवा नहीं भी हो सकता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुने :

Correct Answer: (a) केवल A और B
Solution:

गैरेट के अनुसार, "व्यावसायिक नीतिशास्त्र उस विशेष दायित्व का अध्ययन करता है जिसे एक व्यक्ति और नागरिक स्वीकार करते हैं जब वह व्यवसाय की दुनिया का हिस्सा बन जाता है।" व्यावसायिक नैतिकता नैतिक सिद्धान्तों की व्यवस्था और व्यवसाय पर लागू आचरण को सन्दर्भित करती है।"