यू.जी.सी. NTA नेट /जेआरएफ परीक्षा, जून 2020 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

1. वैदिक परंपरा में ब्रह्माण्ड की नियंता शक्ति है-

Correct Answer: (c) ऋत्
Solution:

वैदिक परंपरा के अनुसार ऋत् ब्रहमाण्ड की नियंता शक्ति है। इसके द्वारा विश्वव्यवस्था के नैतिक पक्ष के साथ-साथ भौतिक पक्ष अर्थात् ब्रहमांड के नियम भी निर्देशित होते है। ब्रहमाण्डीय नियम, खगोलीय पिण्डों की नियमित गति एवं क्रम से ऋत की अवधारणा आई।

2. निम्नलिखित में से कौन न्याय ज्ञान मीमांसा में सत हेतु का लक्षण नही है?

Correct Answer: (e) *
Solution:

(*) : जिस पदार्थ में साध्य की व्याप्ति और पक्षधर्मता के ज्ञान से अनुमिति की उत्पत्ति होती है उसे हेतु कहते है। न्याय ज्ञान मीमांसा में सत हेतु के निम्नलिखित लक्षण है- (1) पक्षसत्व, (2) सपक्षसत्व, (3) विपक्षसत्व, (4) अबाधित विषयत्व, (5) असतप्रतिपक्षत्व । यह सत् हेतु के पाँच लक्षण हैं। यद्यपि इस प्रश्न का उत्तर NTAने विकल्प (c) माना है।

3. न्याय ज्ञान भी मीमांसा में हम सामान्य लक्षण सन्निकर्ष के द्वारा प्राप्त करते हैं-

Correct Answer: (d) अग्नि की सभी घटनाओं का
Solution:

न्याय दर्शन के अनुसार इन्द्रिय और वस्तु का सन्निकर्ष (संपर्क) ही प्रत्यक्ष है। प्रत्यक्ष द्वारा प्राप्त ज्ञान यथार्थ होता है। न्याय का वस्तुवाद इसी विचार पर केन्द्रित है। न्याय के अनुसार विशेष वस्तुओं के प्रत्यक्षीकरण के आधार पर उसमें निहित संपूर्ण जाति का प्रत्यक्ष हो जाता है। अतः इस सामान्य लक्षण के आधार पर अग्नि की सभी घटनाओ का प्रत्यक्ष हो जाता है।

4. वैशेषिक तत्वमीमांसा में द्रव्यों के परिमाण के संदर्भ में सही कूट का चयन कीजिए?

Correct Answer: (a) आकाश, काल, आत्मा
Solution:

वैशेषिक तत्व मीमांसा में द्रव्यों के परिमाण के संदर्भ में सही क्रम इस प्रकार है- (1) पृथ्वी (2) अग्नि (3) वायु (4) जल (5) आकाश (6) दिक (7) काल (8) आत्मा (9) मन। अतः स्पष्ट है कि विकल्प (1) सही होगा।

5. वैदिक परम्परा में किसके लाभ के लिए यज्ञ किया जाता है?

Correct Answer: (d) यजमान
Solution:

वैदिक परंपरा में यज्ञ को 'यजमान' के आत्मिक और भौतिक लाभ के लिए संपन्न किया जाता था यज्ञ कई प्रकार के होते थे जैस- (1) अश्वमेघ यज्ञ चक्रवर्ती सम्राट बनने के लिए (2) राजसूययज्ञ- अन्य राज्यों से कर वसूल करने के लिए (3) पुत्रेष्ठि यज्ञ- पुत्र की कामना हेतु सपन्न किया जाता था। (4) सोमयज्ञ - सभी की कल्याण की कामना के लिए (5) पर्जन्य यज्ञ - अच्छी वर्षा की कामना हेतु।

6. जैन तत्व मीमांसा में निम्न में से कौन अजीव द्रव्य नहीं है?

Correct Answer: (b) स्थावर
Solution:

जैन द्रव्य के दो भाग है (i) आस्तिकाय (ii) अनास्तिकाय आस्तिकाय का विभाजन जीव और अजीव में हुआ है। अजीव तत्व चार प्रकार के है। (i) धर्म (ii) अधर्म (iii) पुदगल (iv) आकाश । अतः स्पष्ट है स्थावर का अजीव से कोई संबंध नही है इसे चार्ट द्वारा समझ सकते हैं-

7. नीचे दो कथन दिए गए हैं। एक को अभिकथन (A) और दूसरे को तर्क (R) कहा गया है:

अभिकथन (A): ईश्वर दुःख रहित है
तर्क (R) : ईश्वर शरीर रहित है। उपर्युक्त कथनों के अवलोक में निम्न में से सही विकल्प चुनिएः

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या है।
Solution:

भारतीय अस्तिक दार्शनिक परंपरा में ईश्वर को दुख रहित माना जाता है। यह सबको प्रकाश देने वाला तथा कर्मों का अधिष्ठाता है, सुख-दुख, प्रदान करता है। यह शरीर रहित है, यह विश्व में अपने कार्यों का संपादन माया के द्वारा करता है। माया इसकी शक्ति है। (A) और (R) दोनो सही है तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।

8. यह किसका विचार है की नीले रंग का प्रत्यय और इसका ज्ञान एक ही है?

Correct Answer: (a) वसुबधु
Solution:

वसुबंधु, हीनायानी वैभाषिक वेत्ता थे बाद में महायान मत स्वीकार कर लिया था। वैभाषिक न्याय में ज्ञेय और ज्ञान दोनो को प्रत्यक्ष माना जाता है, वसुबन्धु का मानना था नीले रंग प्रत्यय और इसका ज्ञान, प्रत्यक्ष और एक ही है।

9. श्रेयस और प्रेयस के संबंध में किसके बीच संवाद हुआ था?

Correct Answer: (c) यम और नचिकेता
Solution:

श्रेयस और प्रेयस का संबंध यम और नचिकेता संवाद से है। इसका वर्णन कठ उपनिषद में है। नचिकेता कहते हैं कि मुझे धन अर्थात् प्रेयस नहीं बल्कि आत्म तत्व का मार्ग अर्थात् 'श्रेयस' की कामना है। दोनों का संवाद ही, श्रेयस और प्रेयस के नाम से जाना जाता है।

10. अपूर्व के संबंध में निम्न में से कौन असत्य है?

Correct Answer: (a) अपूर्व जगत का पालन कर सका है।
Solution:

मीमांसा दर्शन के अनुसार अपूर्व एक अदृश्य पारलौकिक शक्ति है जो कर्म से उत्पन्न होती है और कर्मफल तक ले जाती है। इस प्रकार यह कर्म तथा उसके परिणाम के बीच एक कड़ी है अपूर्व कर्म का फल त्वरित न प्रदान कर भविष्य में प्रदान करता है। यह कर्ता की आत्मा में उत्पन्न होता है।