यदि आप सोचते हैं की सत्य ज्ञान की अमुक वस्तुएं, प्रसरण द्वारा स्थापित होती हैं, तो हमारा प्रश्न है कि वे प्रमाण कैसे स्थापित होते हैं? यदि आप समझते हैं की प्रमेय को प्रमाण द्वारा स्थापित किया जाता है, तथा वे प्रमाण अन्य प्रमाण द्वारा स्थापित होते हैं, तो यदि आप समझते हैं की प्रमाण के बिना प्रमाण स्थापित किए जाते हैं तो आप की दार्शनिक स्थिति अनुपयोगी है। यह विचार की प्रमाण, अन्य वस्तुओं के साथ-साथ स्वयं को भी स्थापित करते हैं को स्वतः प्रमाण्यवाद करते हैं, जिसके प्रवक्ता प्रभाकर एवं शंकर रहे है।
अब यदि आप यह सोच रहे हैं की प्रमाण के स्थापित होने से प्रमेय स्थापित होते हैं और प्रमेय के स्थापित होने से प्रमाण स्थापित होते है तो उनमें अन्योन्याश्रय दोष होगा।
निम्नलिखित में कौन-सा भारतीय दर्शन यह विश्वास करता है की "प्रमाण स्वयं को स्थापित करता है।"
A. न्याय
B. बौद्ध
C. प्रभाकर
D. शंकर का अद्वैत
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए-
Correct Answer: (c) केवल C और D
Solution:पूर्वमीमांसकों में प्रभाकर का महत्वपूर्ण स्थान है। ये स्वतः प्रमाण्यवाद को मानते है। प्रभाकर के अनुसार 'स्वतः' का अर्थ है 'ज्ञान जनक सामग्री'। जो दोषरहित कारण सामग्री ज्ञान को उत्पन्न करती है, वही सामग्री उस ज्ञान के प्रमाण्य को भी साथ ही उत्पन्न करती है। स्वतः प्रमाण्यवाद पर इसी तरह का मत शंकर का भी है। प्रभाकर और शंकर के अनुसार "प्रमाण अन्य वस्तुओं के साथ-साथ स्वयं को भी स्थापित करते हैं, को स्वतः प्रमाण्यवाद कहते हैं।